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ओवैसी बोले- बाबरी मस्जिद के लिए शहीद होने के लिए तैयार हूं, मेरी जान ले लो

राम मंदिर मुद्दे पर एआईएमपीएलबी से निकाले गए नेता सलमान नदवी ने एआईएमआईएम के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी को बोर्ड से निकालने की मांग की, इस पर ओवैसी ने जवाब दिया कि वह बाबरी मस्जिद के लिए शहीद होने के लिए तैयार हैं।

Author Published on: March 3, 2018 9:25 AM
एआईएमआईएम प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी। (FILE PHOTO)

राम मंदिर मुद्दे पर ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (एआईएमपीएलबी) से निकाले गए नेता सलमान नदवी ने ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (एआईएमआईएम) के अध्यक्ष असदुद्दीन ओवैसी को बोर्ड से निकालने की मांग की, इस पर ओवैसी ने जवाब दिया कि वह बाबरी मस्जिद के लिए शहीद होने के लिए तैयार हैं। ओवैसी ने हैदराबाद में एक कार्यक्रम में मंच से बोलते हुए कहा- ”आज अगर कोई कहता है कि असदुद्दीन ओवैसी को निकाल दो पर्सनल लॉ बोर्ड से तो मैं शामिल हो जाऊंगा, हजरत, निकालना क्या आप कहिए कि तू मस्जिद के लिए शहीद हो जा तो ये जान ले ली जाएगी तो मैं तैयार हूं। अगर मेरी मस्जिद बन जाती है मेरी मौत से अजब तो आप खुद अपने हाथों से मेरी जान ले लो, मगर मेरी मस्जिद का सौदा मत करो।” असदुद्दीन के इस बयान की क्लिप रिपब्लिक टीवी ने शुक्रवार (2 मार्च) को हुई एक टीवी डिबेट के दौरान दिखाई।

सलमान नदवी ने रिपब्लिक टीवी की डिबेट में ओवैसी पर करारा प्रहार किया था। उन्होंने कहा था कि अगर ओवैसी को मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड से नहीं निकाला जाएगा तो बोर्ड अपने आप खत्म हो जाएगा। सलमान नदवी ने ओवैसी के बिहार और यूपी में चुनाव लड़ने के उनके मकसद के बारे में पूछा था और उन पर मुस्लिम वोट कमजोर करने के आरोप लगाए थे। बता दें कि गुरुवार (1 मार्च) को नदवी ने आर्ट ऑफ लिविंग संस्था चलाने वाले श्रीश्री रविशंकर से मुलाकात की थी। नदवी ने बाद में कहा था कि 28 मार्च को हिन्दू समुदाय के साथ उलेमाओं और मौलानाओं की एक बड़ी बैठक होगी।

श्रीश्री रविशंकर ने कहा- ”हर ओर से अच्छी प्रतिक्रियाएं मिल रही हैं, हम दोनों समुदायों के सामंजस्यपूर्ण सह-अस्तित्व और राम मंदिर के निर्माण की बात कर रहे हैं। मुस्लिम समुदाय से बहुत सद्भावना और सहयोग मिल रहा है।” श्रीश्री रविशंकर ने बुधवार को कहा था कि राम जन्मभूमि-बाबरी मस्जिद का विवाद सुलझा लिया जाएगा। श्रीश्री ने कहा था कि कोर्ट के जरिये किसी तरह से विवाद का हल नहीं निकल सकता है। कोर्ट के बाहर विवाद को सुलझाया जा सकता है।

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