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कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद बोले- यदि पीएम परमाणु बमों का बटन रख सकते हैं तो जजों की नियुक्ति क्‍यों नहीं कर सकते

केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जब यह बयान दिया उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में मौजूद थे।

ravi shankar prasad, judge appointment, law minister, judiciary, supreme court, lok sabha, parliament, appointment of judges, narendra modi, modi govt vs judiciary, national news कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने लोकसभा में कहा कि यदि परमाणु बमों के बटन को लेकर प्रधानमंत्री पर भरोसा किया जा सकता है तो श्रेष्‍ठ लोगों को जज नियुक्‍त करने को लेकर उन पर विश्‍वास क्यों नहीं किया जा सकता।

केंद्र सरकार की ओर से लोकसभा में बुधवार (22 मार्च) को कहा गया कि यदि परमाणु बमों के बटन को लेकर प्रधानमंत्री पर भरोसा किया जा सकता है तो श्रेष्‍ठ लोगों को जज नियुक्‍त करने को लेकर उन पर विश्‍वास क्यों नहीं किया जा सकता। केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने जब यह बयान दिया उस समय प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी लोकसभा में मौजूद थे। प्रसाद ने कहा कि शक्तियों की बाध्‍यता विधायिका के साथ ही न्‍यायपालिका पर भी लागू होती है क्‍यों कि वह भी लोकतंत्र का एक अंग है। लोकसभा के कुछ सदस्‍यों ने दावा किया था कि सुप्रीम कोर्ट अपने कुछ फैसलों के जरिए विधायिका के मामलों में दखल दे रहा है। इसके बाद कानून मंत्री ने यह बयान दिया।

कुछ सांसदों ने जजों की नियुक्ति को लेकर बने कानून को बदलने वाले सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर सवाल उठाए थे। इस फैसले में सुप्रीम कोर्ट ने कहा था कि एक याचिकाकर्ता को लग सकता है कि एक जज जो कि कानून मंत्री की सदस्‍यता वाली कमिटी की ओर से चुना गया है वह तटस्‍थ नहीं है। कोर्ट में बकाया पड़े मामलों और खाली पदों से जुड़े सवाल पर सप्‍लीमेंट्री सवाल करते हुए भाजपा सांसद संजय जायसवाल ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट क्रिकेट मैनेजमेंट से लेकर मेडिकल प्रवेश परीक्षा जैसे मामलों में अपने फैसलों के जरिए विधायिका के काम में दखल दे रहा है। उनकी इस टिप्‍पणी पर सदन के लगभग सभी दलों के सदस्‍यों ने मेजें थपथपाई।

कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने क्रिकेट मैनेजमेंट और नीट परीक्षा से जुड़े कोर्ट के फैसलों पर कोई टिप्‍पणी नहीं की। हालांकि उन्‍होंने केशवानंद भारती बनाम केरल राज्‍य के मामले में फैसले की ओर इशारा करते हुए कहा कि सुप्रीम कोर्ट ने लोकतंत्र के तीनों अंगों की ताकतों को अलग-अलग परिभाषित किया है।

कानून मंत्री ने कहा कि विधायिका कानून बनाएगी, कार्यपालिका इसे लागू करेगी और न्‍यायपालिका कानून को परिभाषित करेगी। उन्‍होंने कहा, ”यदि यह सब पर लागू होता है तो अफसोस के साथ कहना पड़ रहा है कि यह न्‍यायपालिका पर भी बराबर रूप से लागू होता है।” कोर्ट की कार्यवाही के लाइव टेलीकास्‍ट के सवाल पर रविशंकर प्रसाद ने कहा कि ऑनलाइन ट्रांसमिशन से मनौवैज्ञानिक दबाव बनेगा। साथ ही इसमें तार्किक समस्‍याएं भी हैं। कई हजारों कोर्ट रूम से लाइव प्रसारण करना मुश्किल है। लेकिन सदस्‍य का सुझाव मूल्‍यवान है। अदालतों में बकाया मामलों की बढ़ती संख्‍या पर कानून मंत्री ने बताया कि सरकार उनके कामकाज में दखल नहीं देती। लेकिन इस बारे में न्‍यायपालिका को सूचित कर दिया जाएगा।

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