Pawan Khera News: तेलंगाना हाईकोर्ट ने गुरुवार को पवन खेड़ा की अग्रिम जमानत याचिका पर अपना फैसला सुरक्षित रख लिया। यह याचिका हिमंता बिस्वा सरमा की पत्नी रिनिकी भुइयां सरमा द्वारा दर्ज कराई गई एफआईआर से जुड़ी है।

खेड़ा की ओर से पेश होते हुए वरिष्ठ वकील अभिषेक मनु सिंघवी ने कहा कि पवन खेड़ा के खिलाफ कई आरोप दर्ज किए गए हैं, लेकिन मामला सिर्फ मानहानि का है, इससे ज्यादा कुछ नहीं। उन्होंने तर्क दिया कि एफआईआर राजनीतिक विरोधियों को चुप कराने, परेशान करने और डराने का एक चालाक तरीका है और इसके लिए गिरफ्तारी जायज नहीं है। सिंघवी ने स्पष्ट किया कि खेड़ा ने तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका इसलिए दायर की क्योंकि जब उन्हें एफआईआर की सूचना मिली, तब वे हैदराबाद में अपनी पत्नी से मिलने गए हुए थे।

अभिषेक मनु सिंघवी ने दी दलीलें

बार एंड बेंच की रिपोर्ट के मुताबिक, सिंघवी ने कहा, “क्या हम किसी अराजक युग में रह रहे हैं, जहां इस तरह की शिकायत पर मुझे गिरफ्तार करना पड़े? एफआईआर में हर तरह के जुर्म का जिक्र है। आरोप है कि मैंने प्रेस कॉन्फ्रेंस की और आपके खिलाफ मानहानिकारक बयान दिए। मुझे परेशान करने के लिए आपने हर तरह के जुर्म जोड़ दिए हैं।”

उन्होंने आगे कहा, “मैं एक राजनीतिक विरोधी हूं। अगर आप इस तरह लोगों को गिरफ्तार करना शुरू कर देंगे, तो यह जंगल राज के अलावा और कुछ नहीं होगा।” जमानत के पहलू पर सिंघवी ने बताया कि खेड़ा अपराधी नहीं बल्कि एक प्रमुख राजनीतिक व्यक्ति हैं और उनके भागने का कोई खतरा नहीं है।

सिंघवी ने तर्क दिया, “मेरी पत्नी स्थायी रूप से हैदराबाद में रहती है और मैं भी अक्सर यहां आता-जाता रहता हूं। मैंने सबूत पेश कर दिए हैं। मेरे भागने का कोई खतरा नहीं है। मैं एक प्रमुख राजनीतिज्ञ हूं। मैं आदतन अपराधी या गुनाहगार नहीं हूं। अगर आप सभी आरोपों को सच भी मान लें, तब भी मेरे भागने का कोई खतरा नहीं है। मैं एक सक्रिय राजनीतिज्ञ हूं। मैं सहयोग कर सकता हूं। पूरी दुनिया मुझे जानती है क्योंकि मैं टेलीविजन पर आता हूं।”

आप मुझे परेशान करना चाहते हैं- सिंघवी

सिंघवी ने कहा कि खेड़ा के खिलाफ मामले का उद्देश्य उसे चुप कराना और डराना है। उन्होंने दावा किया, “मुझे गिरफ्तार किए बिना आप यही काम क्यों नहीं कर सकते? जवाब सीधा सा है, क्योंकि आप मुझे परेशान करना चाहते हैं, मुझे डराना चाहते हैं, मुझे धमकाना चाहते हैं। आप मुझे चुप कराना चाहते हैं। यह शिकायत 6 अप्रैल की आधी रात को 12:49 बजे दर्ज की गई, जो कि 7 अप्रैल की आधी रात के ठीक बाद का समय है। और यह सब कैमरे में रिकॉर्ड है, मेरी कोई भी बात रिकॉर्ड से बाहर नहीं है। दिल्ली में मेरे एक घर में सौ पुलिसकर्मी आए थे।”

उन्होंने मानहानि के एक मामले में उन्हें गिरफ्तार करने के लिए असम पुलिस द्वारा 100 कर्मियों को दिल्ली भेजने पर भी कड़ी आपत्ति जताई। सिंघवी ने कहा, “हम संवैधानिक मनमानी करने वाले लोगों के युग में नहीं जी रहे हैं। हम दुर्भावना के युग में नहीं जी रहे हैं, जहां लोग मनमाने ढंग से हथियार निकालकर असम से 100 लोगों को निजामुद्दीन भेज देते हैं, जबकि शिकायत में कहा गया है कि यह मानहानि का मामला है।”

गुवाहाटी पुलिस क्राइम ब्रांच की तरफ से पेश हुए देवजीत सैकिया

असम के एडवोकेट जनरल देवजीत सैकिया गुवाहाटी पुलिस क्राइम ब्रांच की ओर से पेश हुए और दावा किया कि याचिका में याचिकाकर्ता के आधार कार्ड की कॉपी में दोनों तरफ अलग-अलग आधार नंबर हैं। मामले की खूबियों पर विचार किए बिना उन्होंने जमानत याचिका की स्वीकार्यता पर आपत्ति जताते हुए कहा कि याचिकाकर्ता दिल्ली का रहने वाला है, हैदराबाद का नहीं। सैकिया ने तर्क दिया कि याचिका में ऐसा कोई संकेत नहीं है कि खेड़ा असम आकर अग्रिम जमानत के लिए आवेदन क्यों नहीं कर सकते।

उन्होंने आगे तर्क दिया कि याचिकाकर्ता ने तेलंगाना हाईकोर्ट में याचिका दायर करने के लिए कोई असाधारण या बाध्यकारी परिस्थितियां नहीं बताई हैं और वह दिल्ली हाई कोर्ट में याचिका दायर कर सकता था क्योंकि वह दिल्ली का रहने वाला था। उन्होंने यह भी कहा कि खेड़ा पुलिस के उसके निजामुद्दीन स्थित आवास पर पहुंचने से पहले ही दिल्ली से भाग गया था और इसलिए उसके भागने का स्पष्ट खतरा था। खेड़ा को इंटरनेशनल प्लेयर बताते हुए उन्होंने यह भी कहा कि याचिकाकर्ता के खिलाफ देशभर में 19 मामले दर्ज है। दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कोर्ट ने शुक्रवार के लिए अपना फैसला सुरक्षित रख लिया।

असम पुलिस ने किन-किन धाराओं में दर्ज की एफआईआर

असम पुलिस द्वारा कांग्रेस प्रवक्ता पवन खेड़ा के खिलाफ दर्ज FIR में मानहानि, जालसाजी और आपराधिक साजिश सहित BNS की 14 धाराओं के तहत आरोप शामिल हैं। इंडियन एक्सप्रेस को मिली जानकारी के अनुसार, एफआईआर में पवन खेड़ा और अज्ञात को आरोपी बनाया गया है। इसमें चुनाव के संबंध में झूठा बयान देना, धोखाधड़ी, जालसाजी से संबंधित विभिन्न आरोप, आपराधिक धमकी, शांति भंग करने के इरादे से जानबूझकर अपमान करना, शांति भंग करने वाले बयान देना, मानहानि और आपराधिक साजिश जैसे आरोप शामिल हैं। पढ़ें पूरी खबर…