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अगर मन्नान वानी अच्छा आदमी था तो फिर बंदूक क्यों उठाई? आर्मी चीफ ने कहा

हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी मन्नान वानी पर पूछे सवाल के जवाब में आर्मी चीफ ने कहा, 'मन्नान वानी अच्छा छात्र था। मैं कहता हूं कि उसने बंदूक क्यों उठाई और आतंकवादी बन गया। अगर वह अच्छा आदमी था तो बंदूक उठाने के लिए क्यों प्रेरित हुआ।'

सेना प्रमुख बिपिन रावत (पीटीआई फोटो)

आर्मी चीफ जनरल बिपिन रावत ने कहा है कि भारतीय सेना पर लगाए 95 फीसदी आरोप झूठे होते हैं, इसलिए इन मामलों में भारतीय सेना को जांच करने की जरुरत है और फर्जी मामले भड़काने वाले व्यक्ति को सजा देनी चाहिए। बुधवार (21 नवंबर, 2018) को और 26/11 मुंबई हमले की बरसी से कुछ दिन पहले आर्मी चीफ ने कहा जम्मू-कश्मीर में समाज का एक वर्ग हिंसा का सहारा ले रहा है। पुलिसकर्मियों की हत्या की जा रही है। ये वर्ग विकास और रोजगार की सुविधा देने वाले कपड़ा उद्योग को खत्म कर रहा है। एक टीवी कार्यक्रम में एंकर द्वारा हिजबुल मुजाहिदीन आतंकी मन्नान वानी पर पूछे सवाल के जवाब में आर्मी चीफ ने कहा, ‘मन्नान वानी अच्छा छात्र था। मैं कहता हूं कि उसने बंदूक क्यों उठाई और आतंकवादी बन गया। अगर वह अच्छा आदमी था तो बंदूक उठाने के लिए क्यों प्रेरित हुआ।’ मन्नान वानी को हंदवाड़ा (कश्मीर) में सुरक्षाबलों ने मुठभेड़ में गिराया था। वह एएमयू में पीएचडी का छात्र था। जनवरी में उसने सोशल मीडिया पर एके-47 रायफल के साथ अपनी तस्वीर डाली थी, जिसके बाद उसे विश्वविद्यालय से निकाल दिया गया था।

कार्यक्रम में आर्मी चीफ ने कहा कि राज्य में लोकतंत्र को जमीनी स्तर तक ले जाने के लिए सरकार पंचायत चुनाव की ओर देख रही है। यहां सरकार विकास पर पैसा खर्च कर रही है और लोग विकास के खिलाफ जा रहे हैं। सरकार लोगों को पुलिस सर्विस में शामिल होने का मौका दे रही है ताकि उन्होंने नौकरी मिल सके। मगर आप (आतंकी) उनका अपहरण करते हैं और उन्हें जबरन नौकरी छोड़ने के लिए कहते हैं। हमें (सेना) यह कहकर फटकार रहे हैं कि सेना ने अत्यधिक बल का इस्तेमाल किया। अपनी आत्मरक्षा में, एक सैनिक अपनी पूरी ताकत का इस्तेमाल करता है। जब भी फर्जी मुठभेड़ होती है हमने लोगों को काम में लिया है। सेना प्रमुख ने यह बात सेना पर लगी फर्जी मुठभेड़ पर आरोपों के जवाब में कही है। सर्जिकल स्ट्राइक पर उन्होंने कहा कि यह पाकिस्तान के लिए संदेश था। हम एलओसी पर आतंकी लांच पैड को खत्म करने से बिल्कुल नहीं घबराएंगे। हालांकि आतंकी हमले और घुसपैठियों से निपटने के लिए सुरक्षा का स्तर बढ़ाने की जरुरत है। आज दिल्ली में एक हाई अलर्ट है, हमने यहां सुरक्षा का स्तर बढ़ाया है।

जानकारी के लिए बता दें कि भारत पाक सीमा पर गोलीबारी, आतंकवादी और उग्रवादी गतिविधियों के कारण पिछले तीन सालों में सुरक्षा बलों के करीब 400 जवानों ने जान गंवाई है। इनमें सीमा सुरक्षा बल (बीएसएफ) के सबसे अधिक जवान शहीद हुए हैं। इस बल ने 2015 से 2017 के बीच 167 जवानों को खोया और इनमें से अधिकतर अति संवेदनशील सीमा पर पहरेदारी करते समय शहीद हुए। गृह मंत्रालय के मुताबिक बीते तीन सालों से केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (सीआरपीएफ) के 103 जवानों ने कुर्बानी दी। इनमें से अधिकांश नक्सली गतिविधियों और जम्मू कश्मीर में आतंकवाद का सामना करते हुये शहीद हुए। इसके अलावा सशस्त्र सीमा बल (एसएसबी) के 48 कर्मियों की मौत हो गई। एसएसबी भारत-भूटान और भारत-नेपाल सीमा की रक्षा करता है।

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