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अभी चुनाव हुए तो कांग्रेस जीतेगी 200 से ज्‍यादा सीटें, पार्टी के इंटरनल सर्वे के नतीजे देख राहुल गदगद

2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस सिर्फ 44 सीटें जीत सकी थी।

भाजपा अगले साल पांच राज्‍यों में होने वाले चुनावों के लिए दलितों को लुभाने की कोशिश कर रही है।

कांग्रेस पार्टी ने वर्तमान परिस्थितियों में अपनी संभावनाएं आंकने के लिए एक आंतरिक सर्वे कराया गया है। इससे पता चला है कि अगर अभी लोकसभा चुनाव होते हैं तो पार्टी अच्‍छा प्रदर्शन करेगी। सर्वे का अनुमान है कि अभी चुनाव होने पर कांग्रेस को लोकसभा की 545 सीटों में 200 से ज्‍यादा सीटें मिलेंगी। 2014 के लोकसभा चुनावों में कांग्रेस सिर्फ 44 सीटें जीत सकी थी। रेडिफ की खबर के अनुसार, सर्वे से उत्‍साहित कांग्रेस उपाध्‍यक्ष राहुल गांधी यह सुनिश्चित करना चाहते हैं कि ‘देश के मूड का पता लगाने वाले सर्वे’ के अनुमान आगामी लोकसभा चुनावों में पार्टी को 300 सीट तक दिला सकते हैं। अगले आम चुनाव 2019 में होने हैं। इस सर्वे के लिए 350-400 संसदीय क्षेत्रों से सैंपल लिए हैं। मुख्‍य रूप से सर्वे फोन पर किए गए हैं और नोएडा-दिल्‍ली एरिया से इनका चयन हुआ, जहां पर पोल कंपनी का हेडक्‍वार्टर है। कांग्रेस पूरी ताकत के साथ केंद्र सरकार के 500, 1000 रुपए के पुराने नोट बंद करने के फैसले का विरोध कर रही है।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा 8 नवंबर को विमुद्रीकरण के ऐलान के बाद स्‍थानीय चुनावों में बीजेपी को बढ़त मिली है। महाराष्‍ट्र के 164 नगर निकायों के चुनाव में भारतीय जनता पार्टी इकलौती सबसे बड़ी पार्टी बनकर उभरी थी। हालांकि गुजरात के स्‍थानीय चुनावों में पार्टी अच्‍छा प्रदर्शन नहीं कर सकी। आम चुनावों से पहले 2017 में पांच राज्‍यों के विधानसभा चुनाव होंगे, जिन्‍हें 2019 का सेमी-फाइनल कहा जा रहा है। उत्‍तर प्रदेश जैसे बड़े राज्‍य में कांग्रेस की मौजूदगी बेहद कम है, ऐसे में विधान सभा चुनावों के लिए दूसरे चरण का प्रचार अभियान शुरू करने के लिए तैयार है।

कांग्रेस संसद के शीतकालीन सत्र के खत्म होते ही अपना प्रचार अभियान शुरू कर देगी लेकिन प्रचार योजना में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर को अलग-थलग रखा गया है। दूसरे चरण के प्रचार अभियान में राहुल गांधी इसी महीने 19 दिसंबर को जौनपुर में और 22 दिसंबर को बहराइच में जनसभा करेंगे।

यूपी चुनावों के मद्देनजर,  कांग्रेस समाजवादी पार्टी के बीच चुनाव-पूर्व गठबंधन की चर्चाएं गरम हैं। हालांकि सूत्रों के अनुसार दोनों दलों के बीच इस मुद्दे पर अभी कोई उल्लेखनीय प्रगति नहीं हुई है। दोनों दल के बीच सीटों के बंटवारे के लेकर मतभेद नहीं सुलझ रहे हैं। शायद इसी वजह से कांग्रेस ने अकेले दम पर प्रचार की रणनीति तैयार की है।

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