Lok Sabha Delimitation and Women Reservation Bill: संसद में महिला आरक्षण बिल पर जारी बहस के बीच सीटों के परिसीमन को लेकर विपक्ष और सरकार आमने-सामने आ गए। विपक्ष ने सरकार पर 2029 चुनाव को ध्यान में रखकर राजनीतिक फायदा लेने का आरोप लगाया। वहीं, केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने संसद में 850 सीटों का पूरा गणित समझा दिया।

अमित शाह ने कहा कि ऐसी धारणा पैदा की जा रही है कि इन तीनों विधेयकों के पारित होने से दक्षिण राज्यों की संख्या लोकसभा में बहुत कम हो जाएगी और उन्हें बड़ा नुकसान होगा। उन्होंने इसे खारिज करते हुए कहा कि कर्नाटक में अभी 28 लोकसभा सीट हैं जो कुल 543 सीट का 5.15 प्रतिशत हैं, लेकिन ये विधेयक पारित होने के बाद कर्नाटक के सदस्यों की संख्या 42 हो जाएगी जो कुल 816 सीटों का 5.14 प्रतिशत होगी।

अमित शाह ने गणित समझाते हुए कहा कि तमिलनाडु को 20, केरल को 10, तेलंगाना को 9 और आंध्र प्रदेश को 13 सीटें और मिलेंगी। महाराष्ट्र को 24 सीटें और मिलेंगी।

गृहमंत्री ने कहा कि आंध्र प्रदेश में अभी 25 लोकसभा सीट हैं और उसका प्रतिनिधित्व 4.6 प्रतिशत है जो परिसीमन के बाद 38 (4.65 प्रतिशत) हो जाएंगी। उन्होंने कहा कि तेलंगाना में मौजूदा सीट की संख्या 17 (3.13 प्रतिशत) है, जो बाद में 26 (3.18 प्रतिशत) हो जाएंगी। अमित शाह ने कहा, ”मैं तमिलनाडु की जनता को आश्वस्त करना चाहता हूं कि उनके प्रतिनिधित्व में भी कोई कमी नहीं आएगी और राज्य को कोई नुकसान नहीं होगा।”

उन्होंने कहा कि अभी राज्य के 39 सदस्य (7.18 प्रतिशत) हैं जो परिसीमन के बाद 59 (7.23 प्रतिशत) हो जाएंगे। अमित शाह ने कहा कि लोकसभा में अभी केरल का प्रतिनिधित्व 6.38 प्रतिशत है जो बढ़कर 3.67 प्रतिशत (30 सीट) हो जाएगा। उन्होंने कहा कि कुल मिलाकर अभी दक्षिणी राज्यों से 129 लोकसभा सदस्य आते हैं और उनका प्रतिनिधित्व 23.76 प्रतिशत है, जो 50 प्रतिशत वृद्धि के बाद 195 सीट और 23.97 प्रतिशत यानी 24 प्रतिशत हो जाएगा। 

129 सीटों से बढ़कर 195 हो जाएंगी सीटें- शाह

शाह ने कहा कि पांच दक्षिणी राज्यों में लोकसभा सीटों की कुल संख्या मौजूदा 129 सीटों से बढ़कर 195 हो जाएगी, जबकि सत्ता का प्रतिशत 23.76 प्रतिशत से बढ़कर 23.87 प्रतिशत हो जाएगा। अमित शाह ने कहा कि 850 का यह आंकड़ा इस तरह निकाला गया है, “मान लीजिए, 100 सीटें हैं और महिलाओं को 33 प्रतिशत आरक्षण दिया जाना है, तो कुल सीटों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी करने पर यह 150 हो जाती है और जब आरक्षण को 150 के 33 प्रतिशत के रूप में लागू किया जाता है, तो यह स्वतः ही वापस 100 सीटें हो जाती हैं।”

अमित शाह ने आगे कहा, “तो, वर्तमान में बैठे 543 सदस्यों में 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी होगी और जब 33 प्रतिशत सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित होंगी, तो सभी 543 सीटें महिलाओं के लिए खुली होंगी, जहां महिलाएं भी चुनाव लड़ सकती हैं। इस तरह यह 50 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है।”

संसद में चाहिए होगा दो-तिहाई बहुमत

संसद में मौजूद आंकड़े बताते हैं कि अगर विपक्ष एकजुट हो जाता है तो सरकार मुश्किल में पड़ सकती है। संविधान संशोधन विधेयक को संसद के दोनों सदनों में उपस्थित और मतदान करने वाले सदस्यों के दो-तिहाई बहुमत की जरूरत होती है। लोकसभा में प्रभावी सीटों की संख्या 541 है, इसलिए दो-तिहाई बहुमत के लिए 360 सीटें जरूरी हैं। सत्तारूढ़ एनडीए के पास 293 सदस्य हैं, जो बहुमत से 67 सीटें कम हैं। राज्यसभा के लिए बहुमत का जरूरी आंकड़ा 163 है और एनडीए के पास 142 से ज्यादा सदस्य हैं, जो उसे बहुमत से 21 सीटें कम दिलाते हैं। संसद से जुड़ी कार्यवाही के लिए पढ़ें लाइव ब्लॉग…