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क्रिश्चन समुदाय भी बढ़ा सकता है मोदी सरकार की परेशानी, तीन बड़े चर्च ने CAA के खिलाफ खोला मोर्चा, NCM डिप्टी चेयरमैन ने मांगा लिखित विरोध

एनसीएम के उपाध्यक्ष जॉर्ज कुरियन, जिन्होंने शुरू में दावा किया था कि चर्च के सभी संप्रदायों ने कानून को स्वीकार कर लिया है, द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्हें नए कानून का स्वागत करते हुए कई संदेश और कॉल आए हैं।

कई ईसाई नेता नागरिकता (संशोधन) अधिनियम के खिलाफ सामने आए हैं, राष्ट्रीय अल्पसंख्यक आयोग (NCM) के उपाध्यक्ष ने कहा है कि यदि कोई भी चर्च नहीं चाहता कि ईसाई अधिनियम के दायरे में हों, तो वह इसे लिखित रूप में दे सकता है और उन्हें बाहर रखा जा सकता है। एनसीएम के उपाध्यक्ष जॉर्ज कुरियन, जिन्होंने शुरू में दावा किया था कि चर्च के सभी संप्रदायों ने कानून को स्वीकार कर लिया है, द इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि उन्हें नए कानून का स्वागत करते हुए कई संदेश और कॉल आए हैं। लेकिन चर्च के प्रमुख इसके समर्थन में नहीं आना चाहते हैं। हालांकि, बुधवार को चर्च के तीन नेता अधिनियम के खिलाफ सामने आए।

सिरो-मलंकरा कैथोलिक चर्च के प्रमुख आर्कबिशप और भारत के कैथोलिक बिशप सम्मेलन के पूर्व प्रमुख कार्डिनल बेसेलियोस क्लीमिस ने द इंडियन एक्सप्रेस से कहा, “धर्म किसी की नागरिकता तय करने की कसौटी नहीं हो सकता है। लेकिन कार्डिनल ने कहा कि चर्च हिंसा का समर्थन नहीं करता। उन्होंने कहा “लोगों को नए कानून या इसे लाने के तरीके के खिलाफ विरोध करने का अधिकार है। लेकिन हिंसा हमारी लड़ाई के पूरे उद्देश्य को बिगाड़ देगी … साथ ही सरकार को लोगों से बातचीत शुरू करनी चाहिए।

मालनकारा मारथोमा चर्च के बिशप ग्रेगोरियोस मार स्टीफानोस ने कहा कि उनके चर्च ने अभी तक आधिकारिक रुख नहीं लिया है। उन्होंने कहा “धर्मनिरपेक्षता कायम रहना चाहिए। यदि कोई बल देश के धर्मनिरपेक्ष स्वरूप को नष्ट करने के लिए काम करता है, तो इसका विरोध किया जाना चाहिए। लेटिन चर्च सोसा पिकायम के तिरुवनंतपुरम आर्क-बिशप ने बुधवार कहा, “हम एक लोकतांत्रिक देश हैं। हम एक विशेष समुदाय के खिलाफ भेदभाव को स्वीकार नहीं कर सकते। मैं कहता हूं कि यह हमारी लोकतांत्रिक और धर्मनिरपेक्ष साख को प्रभावित करेगा।’

भारत में कैथोलिक चर्च के एक प्रकाशन इंडियन करंट्स के एक संपादकीय में कहा गया है, “दोनों सदनों के माध्यम से विधेयक को बुलडोज करने के लिए क्रूर बहुमत का इस्तेमाल किया गया है, जो लोगों को धर्म पर भेदभाव करता है। उत्पीड़न के कारण पाकिस्तान, बांग्लादेश और अफगानिस्तान के पड़ोसी देशों से आए मुसलमानों को छोड़कर सभी को नागरिकता प्रदान करने का कदम एक स्पष्ट संकेत है कि वर्तमान विवाद के तहत राष्ट्र हिंदू राष्ट्र के लक्ष्य की ओर बढ़ रहा है।”

कुरियन, जो केरल में एक भाजपा नेता हैं, ने इस सप्ताह की शुरुआत में कहा कि एनसीएम नए कानून का स्वागत करने वाले ईसाई नेताओं के संदेशों से भर गया है। उन्होंने कहा “वे मुझे बताते हैं कि न्याय आखिरकार उन ईसाइयों के लिए किया गया है जो ड्रैकियन ईशनिंदा कानून, धर्मांतरण और अपहरण के शिकार हैं। कानून के खिलाफ आने वाले ईसाई नेताओं के बारे में पूछे जाने पर उन्होंने कहा, “अगर चर्च को लगता है कि इन देशों के ईसाई भारत में शरण नहीं चाहते हैं, तो वह इसे लिखित रूप में दे सकता है, हम इसकी सिफारिश कर सकते हैं। कोई भी चर्च या समुदाय जो इसमें शामिल नहीं होना चाहता, वह ऐसा करने के लिए स्वतंत्र हैं।”

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