West Bengal News: तृणमूल कांग्रेस के अंदर का संकट बुधवार को और गहरा गया, जब चार बार की सांसद शताब्दी रॉय ने पार्टी नेतृत्व पर तीखा हमला किया और काकोली घोष दस्तीदार के नेतृत्व वाले बागी खेमे में शामिल होने के अपने फैसले का बचाव किया।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में शताब्दी रॉय ने कहा, “देखो अगर दो या तीन एमपी जाते तो मैं बोलती कि ये उनका प्रॉब्लम था, जब बीस सांसदों ने पार्टी छोड़ी, तो इससे पता चला कि कुछ दिक्कतें थीं। दीदी ने बहुत दिन से किसी के साथ बात करना छोड़ ही दिया। उन्होंने कोई भी प्रॉब्लम सुलझानी छोड़ ही दी थी।”
टीएमसी सांसद ने कहा, “अगर अभिषेक या ममता बनर्जी ने हमारी बात सुनी होती, अगर हमारी चिंताओं को सुना गया होता तो बेहतर होता। जब भी मैंने पार्टी की निरंतरता या प्रोजेक्ट्स पर चर्चा करने की कोशिश की, तो अक्सर जवाब मिलता था, अभी नहीं, अभी नहीं।”
इतने लोगों ने हमारे खिलाफ क्यों वोट दिया?
शताब्दी रॉय ने कहा, “दीदी से मेरी आखिरी बातचीत उस दिन हुई थी जब वो एसएससी मामले को लेकर दिल्ली गई थीं, उसके बाद से हमारी कोई बात नहीं हुई। हमें अभी भी इस बात का जवाब ढूंढना है कि इतने सारे लोगों ने हमारे खिलाफ वोट क्यों दिया। ममता बनर्जी को अभिषेक को इतनी ज्यादा शक्तियां नहीं सौंपनी चाहिए थीं, उन्हें कंट्रोल अपने पास रखना चाहिए था, लेकिन साथ ही उन्हें शामिल भी रखना चाहिए था। अगर दोनों मिलकर पार्टी चलाते तो पार्टी प्रभावी ढंग से चलती।”
शताब्दी रॉय ने आगे कहा, “आईपैक तो महज एक स्टाफ है, अगर मेरा स्टाफ कोई गलती करे तो गलती तो मेरे ऊपर आएगी। स्टाफ रखा मैने तो अगर गलती आ जाए तो उसको नहीं बोलेंगे।
ममता बनर्जी ने संघर्ष के बाद पार्टी खड़ी की- शताब्दी रॉय
तृणमूल कांग्रेस की नेता शताब्दी रॉय ने कहा, “ममता बनर्जी एक ऐसी नेता हैं जिन्होंने लंबे और कठिन संघर्ष के बाद पार्टी खड़ी की। इस संघर्ष ने उन्हें जनता का समर्थन दिलाया, जो आज भी कायम है। फिर भी, वह अपने आसपास हो रही घटनाओं को समझ नहीं पाईं, ऐसा लगता है जैसे वह मानसिक उलझन में हो। वह अभिषेक को यह क्यों नहीं समझा पाईं कि उन्हें अपनी जीवनशैली बदलनी चाहिए? वह जनता को अच्छी तरह जानती हैं, फिर भी वह यह नहीं समझ पाईं कि जनता उन्हें किस नजरिए से देखती है। यही उनकी गलती थी।
टीएमसी सांसद ने आगे कहा, “अगर दीदी ने खुद मुझे फोन किया होता, उनके साथ मेरे भावनात्मक लगाव को देखते हुए, जो अभी भी है और आगे भी रहेगा शायद मैं उनके साथ ही रहती।”
मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी के राज्य की बागडोर संभालने पर वह आगे कहती हैं, “यह अच्छा है, उन्होंने अच्छी शुरुआत की है। उन्होंने चुनाव से पहले जिन चीजों की बात की थी, जैसे महिलाओं के लिए मुफ्त यात्रा और अन्नपूर्णा योजना, उन्हें लागू कर दिया है। वह इन उपायों को अमल में ला रहे हैं, इसलिए शुरुआत सकारात्मक रही है। हमें उम्मीद है कि वह अपने वादे पूरे करेंगे; अन्यथा, परिणाम तृणमूल जैसा ही होगा।”
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राज्यसभा और टीएमसी की प्राथमिकता से सदस्यता से इस्तीफा देने के बाद सुष्मिता देब ने मीडिया से बात की है। उन्होंने कहा, “मुझे नहीं पता कौन क्या कर रहा है? मेरा बंगाल की राजनीति में सीधे तौर पर कोई लेना देना नहीं है। मैं असम से हूं।” यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
