आईडीएफसी फर्स्ट के हरियाणा ब्रांच में एक कथित घोटाला सामने आया है जहां पर बैंक के कर्मचारी तो शामिल रहे ही, कुछ बाहर की पार्टियों ने भी अहम भूमिका निभाई। हरियाणा सरकार के उन खातों में यह कथित घोटाला देखने को मिला है जो बैंक के साथ जुड़े हुए थे। इस घोटाले को अंजाम भी साधारण चेक्स के जरिए दिया गया जहां बैंक से पैसे निकाले जा रहे थे। कुछ हफ्ते पहले ही हरियाणा सरकार और बैंक को इन अनियमितताओं के बारे में पता चला और एक्शन शुरू हुआ।
भाई-बहन की क्या भूमिका?
इस मामले में IDFC फर्स्ट बैंक के कर्मचारी, एयू स्मॉल फाइनेंस बैंक और कुछ दूसरे सरकारी कर्मचारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज की गई है। इस समय स्टेट विजिलेंस और एंटी करप्शन ब्यूरो टीम चंडीगढ़ में एक भाई-बहन की जोड़ी की तलाश भी कर रही है। 100 करोड़ की एक मनी ट्रेल मिली है जिसके तार इस भाई-बहन की कंपनी से जुड़े हुए हैं। संदिग्ध महिला के खिलाफ लुक आउट सर्कुलर जारी कर दिया गया है और उसके भाई की तलाश जारी है।
एयरपोर्ट अलर्ट पर, सीपोर्ट पर चौकसी
इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए एक अधिकारी ने कहा कि अभी हम जांच के तहत भाई-बहन की तलाश कर रहे हैं। एलओसी इसलिए जारी किया गया है जिससे अंतरराष्ट्रीय एयरपोर्ट और सीपोर्ट पर चौकसी बढ़ जाए और दोनों में से कोई भी देश छोड़ ना जा पाएं। इस मामले में पंचुकला के एक स्थानीय निवासी को भी संदिग्ध के तौर पर देखा जा रहा है, वो इसी बैंक का पूर्व मैनेजर भी रहा। छह महीने पहले ही उसने नौकरी छोड़ी थी, लेकिन अब जांच एजेंसियों को उसकी भूमिका पर शक है।
जांच कैसे आगे बढ़ेगी?
एक सरकारी अधिकारी ने बताया कि जांच इस पहलू पर होनी है कि बैंकर्स ने पैसे डायवर्ट किसी आधिकारिक चिट्ठी के आधार पर किए या फिर खुद से। वहीं अगर कोई आधिकारिक चिट्ठी मिली भी थी तो जिन अधिकारियों ने पैसे डायवर्ट करने का फैसला लिया, क्या वो असल में ऐसी ताकत रखते थे या नहीं। इस समय एसीबी ने एक एसाईटी का गठन कर दिया है, उसकी अध्यक्षता डीएसपी रैंक के अधिकारी कर रहे हैं। माना जा रहा है कि इस मामले में आने वाले दिनों में और गिरफ्तारियां देखने को मिल सकती हैं।
धोखाधड़ी के बारे में कैसे पता चला?
हरियाणा सरकार को कुछ गड़बड़ियां मिलीं और उसने बैंक से जानकारी मांगी। एक महीने पहले हरियाणा सरकार ने जब अपने फंड को दूसरे बैंक में ट्रांसफर करने के लिए कहा तो पता चला कि खाते में मौजूद राशि उतनी नहीं थी, जितना विभाग का अनुमान था। इसके बाद इस मामले में कार्रवाई की गई। जब बैलेंस चेक किया गया तो 490 करोड़ रुपये की गड़बड़ी सामने आई। बैंक ने इस मामले में जांच की और कुछ अन्य अकाउंट में 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की गड़बड़ियां मिली। बैंक का कहना है कि उसके पास मजबूत सिस्टम है लेकिन वह अपने कर्मचारियों की मिलीभगत के कारण इस गड़बड़ी को नहीं रोक सका। आसान शब्दों में इस घोटाले को समझने के लिए यहां क्लिक करें
