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नए आईसीएसएसआर चीफ के विचार- नरेंद्र मोदी सबसे अच्छे पीएम, उन्हें बर्दाश्त करना सीखो

बीबी कुमार ने लिखा था, "नरेंद्र मोदी के विरोधियों की समस्या ये है कि वो समझ ही नहीं पा रहे हैं कि नरेंद्र मोदी का नुकसान करके वो देश का नुकसान कर रहे हैं।... "

Narendra Modiप्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी (Image Source: PTI)

“नरेंद्र मोदी देश के सबसे अच्छे प्रधानमंत्री हैं और देश में असहिष्णुता के सबसे बड़े शिकार हैं।” “मौजूदा स्वरूप में भारत में जाति व्यवस्था और छुआछूत अरब, तुर्क और मंगोलों के आक्रमण का परिणाम है।” “मैकालेवाद और मार्क्सवाद की वजह से भारत का बौद्धिक ह्रास हुआ।” “विपक्ष द्वारा जेएनयू के छात्रों के समर्थन से राष्ट्रवादी भावनाएं आहत हुई हैं।” ये विचार हैं इंडियन काउंसिल ऑफ सोशल साइंस रिसर्च (आईसीएसएसआर) के नव नियुक्त चेयरमैन बीबी कुमार के। कुमार के ये विचार एक त्रैमासिक पत्रिका “डायलॉग” में पिछले दो साल में प्रकाशित हुए हैं। कुमार इस पत्रिका के संपादक हैं। आईसीएसएसआर देश में समाज विज्ञान में शोध को बढ़ावा देती है।

इंडियन एक्सप्रेस ने सबसे पहले प्रकाशित किया था कि दो मई को बीबी कुमार को मानव संसाधन मंत्रालय ने आईसीएसएसआर का चेयरमैन नियुक्त किया। कुमार एंथ्रोपॉलजिस्ट (मानवविज्ञानी) हैं। कुमार ने पांच मई को अपना पद ग्रहण किया। उन्होंने सुखदेव थोराट की जगह ली है जो आईसीएसएसआर के अप्रैल 2011 से चेयरमैन थे। 76 वर्षीय कुमार का चयन एक चयन मंडल ने किया है जिसमें अशोक मोदक, (नेशनल रिसर्च प्रोफेसर और महाराष्ट्र से भाजपा के पूर्व एमएलसी) सतीश मित्तल (आरएसएस के अखिल भारतीय इतिहास संकलन योजना के अध्यक्ष) सदस्य थे।

बीबी कुमार नगालैंड के साओ चेंज गवर्नमेंट कॉलेज और साइंस कॉलेज कोहिमा के पूर्व प्रिंसिपल रह चुके हैं। कुमार ने 136 किताबों का लेखन, सह-लेखन और संपादन किया है। आइए देखते हैं कि साल 2015 और 2016 में बीबी कुमार ने अपनी पत्रिका डायलॉग में विभिन्न विषयों पर प्रकाशित उनके विचार-

असहिष्णुता के शिकार- अपनी पत्रिका के अक्टूबर-दिसंबर 2015 अंक में कुमार ने “लर्न टू टॉलरेट मोदी” शीर्षक से संपादकीय लिखा था। उन्होंने लिखा था, “नरेंद्र मोदी ने खुद को सबसे अच्छा प्रधानमंत्री साबित किया है। जब वो सत्ता में आए तो देश की अर्थव्यवस्था खराब थी। थोड़े ही समय में हम जीडीपी विकास दर में चीन से आगे निकल गये हैं। लोगों के आर्थिक सशक्तिकरण के लिए कदम उठाए गए हैं। भारी विदेशी निवेश आ रहा है। भ्रष्टाचार या घोटाले का कोई मामला अब तक सामने नहीं आया है….”

कुमार ने लिखा था, “नरेंद्र मोदी के विरोधियों की समस्या ये है कि वो समझ ही नहीं पा रहे हैं कि नरेंद्र मोदी का नुकसान करके वो देश का नुकसान कर रहे हैं।… ” कुमार ने लिखा था, “सच तो ये है और जिसे हममें से बहुत से लोग महसूस करते हैं कि इस वक्त भारत में असहिष्णुता के सबसे बड़े शिकार नरेंद्र मोदी हैं। वक्त आ गया है कि उनके विरोधी उन्हें सहना सीख लें।”

छुआछूत की वजह धर्मांतरण- अपनी पत्रिका में जनवरी-मार्च 2016 अंक में कुमार ने लिखा है, “(अरब विद्वान) अल-बरूनी ने केवल एक हजार साल पहले केवल चार वर्णों की बात करते थे। सभी साथ बैठते थे, खाते-पीते थे। इतनी जातियां या छुआछूत नहीं थे….” कुमार ने लिखा था, “मुस्लिम शासकों द्वारा उग्र हिंदू-विरोधी धर्मांतरण की मुहिम चलाने की वजह से लाखों हिंदू खुद को बचाने के लिए जंगलों में भाग गए। कइयों ने मुसलमान बनने से बचने के लिए सूअर का मांस लेना शुरू कर दिया। वो अंततः अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति बन गए….जो देने लायक बिंदू ये है कि वर्तमान स्वरूप में जाति, छुआछूत, हिंदू समाज के अंदर सामाजिक उत्पीड़न गैर-हिंदू तत्व हैं। जेएनयू टाइप विद्वता के दबाव में समाज विज्ञान में सही दृष्टिकोण से  विमर्श की तो मंशा है और न ही सलाहियत।”

मार्क्सवाद की वजह से वैचारिक ह्रास- कुमार ने जुलाई-सितंबर 2015 के अपने संपादकीय में लिखा था कि “मैकालेवाद और मार्क्सवाद ब्रिटिश के भारत में सबसे बड़े हथियार थे।” इस अंक में उन्होंने लिखा था, “ब्रिटिश को पता था कि मार्क्सवाद से ब्रिटिश साम्राज्यवाद को मदद मिलेगी। इसीलिए वो भारतीय क्रांतिकारियों को जेलों में मार्क्सवादी साहित्य पहुंचवाया करते थे जिनसे वो जेल से निकलने के बाद मार्क्सवादी हो जाते थे।” वो आगे लिखते हैं, “हम मौलिक विचारों पैदा करने की क्षमता खो रहे हैं और इसकी वजह है मैकालेवादी शिक्षा पद्धति का जारी रहना और भारतीय अकादमिक जगद में मार्क्सवादियों और वामपंथियों का प्रभुत्व। आजकल हर जगह दिखायी देने वाले बौद्धिक ह्रास की यही वजह है।” इसी संपादकीय में कुमार ने एनसीईआरटी की किताबों को तत्काल बदलने की जरूरत पर जोर दिया है।

जेएनयू से आहत भावनाएं– जनवरी-मार्च 2016 के संपादकीय में कुमार ने लिखा था, “जेएनयू परिसर के घटनाक्रम से कुछ बातें साफ हो गयी हैं, 1- भारत विभाजन के साथ ही देश से पाकिस्तान विचारधारा खत्म हो गयी है। 2- विध्वंसक मार्क्सवादी-लेनिनवादी विचारधारा भारत में अभी भी मजबूत है… ” कुमार ने लिखा है, “ये सर्वविदित है कि नक्सलाइट भारत के विभाजनकारी सभी ताकतों का समर्थन करते हैं। “

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