भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त एक्शन लेते हुए केंद्र ने भ्रष्टाचार के आरोपों के चलते 2003 बैच की आईएएस अधिकारी पद्मा जायसवाल को बर्खास्त कर दिया है। यह किसी सेवारत आईएएस अधिकारी के खिलाफ इस तरह के सख्त एक्शन का दुर्लभ मामला है। दिल्ली सरकार के प्रशासनिक सुधार विभाग में विशेष सचिव रहीं पद्मा जायसवाल को लंबी अनुशासनात्मक प्रक्रिया के बाद बर्खास्तगी का सामना करना पड़ा है।

सूत्रों ने बताया कि कार्मिक एवं प्रशिक्षण विभाग (DOPT) की सिफारिश पर राष्ट्रपति से अंतिम मंजूरी मिलने के बाद इस सप्ताह की शुरुआत में बर्खास्तगी आदेश जारी किया गया। एजीएमयूटी कैडर के अधिकारियों से संबंधित मामलों में, डीओपीटी गृह मंत्रालय की सिफारिशों के बाद ऐसे निर्णय लेता है।

वहीं, इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत के दौरान पद्मा जायसवाल ने कहा कि मुझे इस तरह के किसी घटनाक्रम या बर्खास्तगी आदेश के पारित होने की कोई जानकारी नहीं है। आइए जानते हैं कौन हैं पद्मा जायसवाल और अपने कार्यकाल के दौरान उन्होंने किन महत्वपूर्ण पदों पर सेवा दी है

दो दशकों से अधिक के अपने करियर के दौरान,पद्मा जायसवाल ने अरुणाचल प्रदेश, दिल्ली, गोवा और पुडुचेरी में कई महत्वपूर्ण पदों पर कार्य किया। उनके लिंक्डइन प्रोफाइल के अनुसार, उन्होंने सेंट जेवियर्स स्कूल में पढ़ाई की और बाद में पंजाब विश्वविद्यालय के यूनिवर्सिटी बिजनेस स्कूल से शिक्षा प्राप्त की। उनके पास एमबीए की डिग्री है और वे इंस्टीट्यूट ऑफ कंपनी सेक्रेटरीज ऑफ इंडिया द्वारा प्रमाणित कंपनी सेक्रेटरी भी हैं। इसके अतिरिक्त, उन्होंने यूजीसी रिसर्च फेलो के रूप में काम किया है, जिसमें उनके फोकस फील्ड बिजनेस एडमिनिस्ट्रेशन, मैनेजमेंट, अंतरराष्ट्रीय मामले, फाइनेंशियल मैनेजमेंट और लीगल पर्सनल मैनेजमेंट शामिल हैं।

पद्मा जायसवाल पर क्या हैं आरोप?

पद्मा जायसवाल के खिलाफ कार्रवाई 2007-08 के उन आरोपों से जुड़ी है, जब वह अरुणाचल प्रदेश के पश्चिम कामेंग जिले की उपायुक्त के पद पर कार्यरत थीं। फरवरी 2008 में स्थानीय निवासियों द्वारा दायर एक शिकायत में उन पर सरकारी राजस्व के गबन और पद के दुरुपयोग का आरोप लगाया गया था। उन्हें अप्रैल 2008 में निलंबित कर दिया गया था। अक्टूबर 2010 में उनका निलंबन रद्द कर दिया गया था।

गृह मंत्रालय ने अखिल भारतीय सेवा (अनुशासन एवं अपील) नियमों के नियम 8 के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई शुरू की। जायसवाल को 2009 और 2010 में आरोप पत्र सौंपे गए। केंद्रीय सतर्कता आयोग और संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से परामर्श किया गया और यूपीएससी ने उन्हें सेवा से हटाने की सिफारिश की।

गृह मंत्रालय ने शुरू की कार्रवाई

हालांकि, केंद्रीय प्रशासनिक न्यायाधिकरण (सीएटी) ने पहले गृह मंत्रालय द्वारा शुरू की गई कार्रवाई को यह कहते हुए रद्द कर दिया था कि गृह मंत्रालय के पास एजीएमयूटी कैडर के अधिकारियों पर अधिकार क्षेत्र नहीं है। केंद्र सरकार ने सीएटी के आदेश को दिल्ली उच्च न्यायालय में चुनौती दी, जिसने इस साल 1 अप्रैल को केंद्र के पक्ष में फैसला सुनाया। उच्च न्यायालय के फैसले के बाद गृह मंत्रालय ने प्रक्रिया पूरी की और बर्खास्तगी की सजा की सिफारिश की।

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