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IAS अफसर ने पलटा सीएम येदियुरप्पा का फैसला, मर्जी के खिलाफ बेंगलुरु में कराए मेयर के चुनाव

बेंगलुरु डिविजन के क्षेत्रीय आयुक्त ने इसे तय समय पर कराने का फैसला किया। सोमवार शाम डिविजन के क्षेत्रीय आयुक्त एवं चुनाव प्रभारी हर्ष गुप्ता ने कहा कि चुनाव तय समय पर ही होंगे।

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा। (फाइल फोटो सोर्स: द इंडियन एक्सप्रेस)

कर्नाटक के मुख्यमंत्री बीएस येदियुरप्पा ने सोमवार को बेंगुरू डिविजन के मेयर और डिप्टी मेयर के पदों के लिए मंगलवार को होने वाले चुनावों को स्थगित कर दिया था, लेकिन बेंगलुरु डिविजन के क्षेत्रीय आयुक्त ने इसे तय समय पर कराने का फैसला किया। सोमवार शाम डिविजन के क्षेत्रीय आयुक्त एवं चुनाव प्रभारी हर्ष गुप्ता ने कहा कि चुनाव तय समय पर ही होंगे। उधर, अपने निवार्चान क्षेत्र शिकारीपुरा में पत्रकारों को संबोधित करते हुए येदियुरप्पा ने कहा, “हाई कोर्ट ने BBMP (बृहद बेंगलुरु महानगर पालिक, नागरिक निकाय) में (8) स्थायी समितियों के चुनाव स्थगित कर दिए हैं। इसी तरह मैंने आदेश दिए हैं कि मेयर चुनाव भी उसी के साथ होने चाहिए। मेयर का चुनाव महीने-डेढ़ महीने के लिए नहीं होगा।” येदियुरप्पा बीबीएमपी में 12 समितियों में से आठ को चुनावों को चुनौती देने वाली याचिका का उल्लेख कर रहे थे।

‘टाइम्स नाउ’ के मुताबिक बेंगलुरु डिवीजन के क्षेत्रीय आयुक्त हर्ष गुप्ता ने कहा कि उन्होंने चार समितियों के अलावा मेयर और डिप्टी मेयर पदों के लिए चुनाव आगे बढ़ाने का फैसला किया है, जो कि हाईकोर्ट की याचिका का हिस्सा नहीं है। गुप्ता ने कहा, “हमें शहरी विकास विभाग से एक पत्र मिला था कि हमें आवश्यक कार्रवाई करनी चाहिए। हमने जवाब दिया कि हम कानून के अनुसार आगे बढ़ रहे हैं। इसलिए हम पहले से ही चिंताओं को दूर कर रहे हैं। इस संबंध में चुनाव को स्थगित करने की आवश्यकता नहीं है।” गुप्ता ने स्पष्ट किया कि उच्च न्यायालय के समक्ष लंबित मामले में 12 स्थायी समितियों में से आठ शामिल थीं। इसलिए, शेष स्थायी समितियों और मेयर तथा डिप्टी के पदों के लिए चुनाव होंगे।

माना जा रहा है कि चार साल के अंतराल के बाद बीजेपी महापौर के चुनाव में बाजी मार सकती है। लिहाजा, वह उसे काफी ज्यादा महत्व दे रही है। हालांकि इसने 2016 में बीबीएमपी चुनावों में सबसे ज्यादा वार्ड जीते थे, लेकिन कांग्रेस और जनता दल (सेकुलर) के गठबंधन की बदौलत इसे मेयर पद नहीं मिला था। इस बार राज्य की सत्ताधारी पार्टी को प्रबल दावेदार माना जा रहा है। लेकिन, चुनाव में देरी करने के फैसले से भाजपा में ही भ्रम की स्थिति पैदा हो गई थी।

हालांकि, बेंगलुरु की सत्ता किसे मिलेगी, इस पर स्थिति पूरी तरह साफ नहीं है। क्योंकि सात निर्दलीय वार्ड पार्षदों के रुख से ही साफ हो पाएगा कि इस बार फतह का ताज किसके सिर चढ़ेगा। गौरतलब है कि राज्य में कांग्रेस-जेडीएस की सरकार गिरने के बावजूद उनका गठबंघन BBMP चुनाव में बना रहेगा। गठबंधन का ही नतीदा है कि पिछले चार साल से बीजेपी सबसे बड़ी पार्टी होने के बावजूद सत्ता से दूर हैं।

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