भारतीय वायु सेना के एक विंग कमांडर को दिल्ली पुलिस ने दो महीने पहले रक्षा से जुड़ी संवेदनशील जानकारी लीक करने के आरोप में गिरफ्तार किया था। इंडियन एक्सप्रेस को पता चला है कि अधिकारी पर ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट (सरकारी गोपनीयता कानून) के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है और वह अभी न्यायिक हिरासत में है।

दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ सूत्रों ने कहा कि यह गिरफ्तारी एक बड़े जासूसी नेटवर्क की तरफ इशारा करती है। इसका मकसद रणनीतिक सैन्य खुफिया जानकारी इकट्ठा करना था। सूत्रों का दावा है कि विंग कमांडर पाकिस्तानी खुफिया अधिकारियों द्वारा रचे गए हनी ट्रैप का शिकार हो गया था। गिरफ्तार अधिकारी पर आरोप है कि उसने डिवाइस का कंट्रोल पाने के लिए एक साथी के मोबाइल फोन पर डेटा चुराने वाला सॉफ्टवेयर इंस्टॉल किया था।

पुलिस के एक बयान में कहा गया, “भारतीय वायुसेना के अधिकारियों की शिकायत के आधार पर, एक सेवारत वायुसेना अधिकारी को 30 मई, 2026 को पाकिस्तानी खुफिया एजेंट द्वारा हनी ट्रैप में फंसाए जाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। जांच के बाद, 30 जुलाई, 2026 को सक्षम न्यायालय में आरोप पत्र प्रस्तुत किया गया और मामला विचाराधीन है।”

31 मई को विंग कमांडर को गिरफ्तार किया गया

सूत्रों ने बताया कि इंडियन एयरफोर्स की इंटेलिजेंस विंग द्वारा दिल्ली पुलिस के साथ मामले से जुड़ी खास जानकारी साझा करने के बाद विंग कमांडर को 31 मई की रात गिरफ्तार किया गया था। सूत्रों ने कहा, “शुरुआत में, गिरफ्तारी के बाद उसे पुलिस हिरासत में लिया गया था। बाद में उसे तिहाड़ जेल में न्यायिक हिरासत में भेज दिया गया। राष्ट्रीय रक्षा से जुड़ी गोपनीय जानकारी और दस्तावेज साझा करने के लिए उस पर ‘ऑफिशियल सीक्रेट्स एक्ट’ के प्रावधानों के तहत मामला दर्ज किया गया है।”

एक महिला ने विंग कमांडर से संपर्क किया

इंडियन एयरफोर्स के प्रवक्ता ने कहा, “वह कड़ी निगरानी में था और उसे संबंधित कानून प्रवर्तन एजेंसियों को सौंप दिया गया था।” मामले की पुलिस जांच से अब तक यह पता चला है कि अधिकारी अपनी निजी जिंदगी में मुश्किल दौर से गुजर रहा था, तभी सोशल मीडिया पर एक महिला ने उससे संपर्क किया।

सूत्रों ने बताया, “उसने महिला के साथ चैटिंग और वीडियो कॉल पर बात करना शुरू कर दिया। धीरे-धीरे उसका भरोसा जीतने के बाद, महिला ने उससे तस्वीरें, वीडियो और सैन्य इकाइयों की आवाजाही व तैनाती से जुड़ी जानकारी साझा करने के लिए कहा।”

जांच के दौरान, सूत्रों ने बताया कि यह पता चला कि अधिकारी ने कथित तौर पर डिजिटल कम्युनिकेशन चैनलों के जरिए महिला को अहम दस्तावेज और डेटा भेजे थे। सूत्रों ने बताया, “उससे जानकारी लेने के बाद, उसे अपने साथी के फोन पर एक खास ऐप इंस्टॉल करने के लिए कहा गया। यह ऐप आम तौर पर एक तरह का टारगेटेड स्पाइवेयर या रिमोट-एक्सेस मैलवेयर होता है, जिसे डिवाइस का डेटा चुराने, लोकेशन ट्रैक करने या बातचीत को इंटरसेप्ट करने के लिए बनाया जाता है।”

पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के कहने पर काम कर रही थी महिला

सूत्रों के मुताबिक, वह महिला पाकिस्तान में बैठे हैंडलर्स के कहने पर काम कर रही थी। सूत्रों ने कहा, “यह ऑपरेशन एक बड़े जासूसी नेटवर्क का हिस्सा था, जिसका मकसद रणनीतिक सैन्य खुफिया जानकारी इकट्ठा करना था।” सूत्रों ने बताया कि अब इस बात की जांच की जा रही है कि शेयर की गई जानकारी से क्या राष्ट्रीय सुरक्षा को खतरा हो सकता था या इसका मकसद भारतीय धरती पर दुश्मन की गतिविधियों को बढ़ावा देना था।

सूत्रों ने कहा, “हमें शक है कि वह महिला डिफेंस कर्मियों को टारगेट करने और गोपनीय जानकारी हासिल करने के लिए बनाए गए एक सुनियोजित हनी-ट्रैप मॉड्यूल के हिस्से के तौर पर काम कर रही थी।” सूत्रों ने बताया, “हम कथित तौर पर शामिल विदेशी हैंडलरों की पहचान कर रहे हैं और यह पता लगा रहे हैं कि कितनी जानकारी लीक हुई होगी।”

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