इंडियन एयरफोर्स के प्रमुख एयरचीफ मार्शल एपी सिंह ने एयरफोर्स को हर साल 40 एयरक्राफ्ट शामिल करने की जरूरत पर जोर दिया। साथ ही उन्होंने पाकिस्तान के चीनी पांचवीं पीढ़ी के एयरक्राफ्ट से जुड़े रिपोर्ट्स पर भी चिंता जाहिर की।

एयर चीफ मार्शल ए पी सिंह ने शनिवार को कहा कि इंडियन एयरफोर्स (IAF) को अभी हर साल 36 से 40 एयरक्राफ्ट शामिल करने की जरूरत है, जिससे हमारे फाइटर स्क्वाड्रन की संख्या 30 से कम न हो और वह जरूरी 42 की संख्या तक पहुँच सके।

स्वेदशी हथियारों पर दिया जोर

इसके अलावा उन्होंने स्वदेशी ‘अस्त्र’ (ASTRA) और उसके अलग-अलग तरह के BVR (बियॉन्ड-विजुअल-रेंज) हवा-से-हवा में मार करने वाले मिसाइलों के साथ-साथ अधिक रेंज वाली विदेशी मिसाइलों और बैच शामिल करके मजबूत BVR कॉम्बैट क्षमता विकसित करने की IAF की कोशिशों पर भी जोर दिया।

एयरचीफ मार्शल ने 8 अक्टूबर को मनाए जाने वाले 94वें वायु सेना दिवस से पहले मीडिया से बात करते हुए ये बातें कहीं।

हर साल 30-35 जेट शामिल करना शुरू हो सकती है- एयरमार्शल चीफ

इंडियन एयरफोर्स के फाइटर स्क्वाड्रन की संख्या के बारे में पूछे गए एक सवाल का जवाब देते हुए, एयर चीफ मार्शल ने कहा कि अगर सब कुछ प्लान के हिसाब से हुआ तो एयरफोर्स हर साल 30 से 35 फाइटर जेट शामिल करना शुरू कर सकती है।

हिंदुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) के हर साल एयरफोर्स को 24 LCA Mk1A एयरक्राफ्ट देने के लक्ष्य का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा कि अगर HAL हर साल 20 एयरक्राफ्ट बनाता है और इस साल के आखिर तक मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA) का कॉन्ट्रैक्ट फाइनल हो जाता है, तो कुल मिलाकर हर साल लगभग 32 एयरक्राफ्ट शामिल होंगे। MRFA प्रोग्राम में 114 राफेल जेट खरीदने का प्रस्ताव शामिल है, इसके तहत इंडियन एयरफोर्स को हर साल लगभग 12 एयरक्राफ्ट मिलेंगे।

उन्होंने आगे कहा कि अगर 12 और Su-30 विमान खरीदने का प्रस्तावित कॉन्ट्रैक्ट शामिल कर लिया जाए और हर साल छह जेट मिलें, तो सालाना शामिल किए जाने वाले विमानों की संख्या 30-35 से 40 के बीच हो सकती है, बशर्ते यह सभी प्लान उम्मीद के मुताबिक आगे बढ़ें।

उन्होंने कहा, “हमें उम्मीद है कि ऐसा होगा और हम विकास की उस गति को हासिल कर पाएंगे जो हमने अपने लिए बनाए हैं।”

तीन-चार तरह के फाइटर जेट होने जरूरी

एयर मार्शल एपी सिंह ने कहा कि एयरफोर्स के बेड़े में तीन से चार तरह के फाइटर जेट का मिला-जुला रहना समझदारी है, ताकि वे जरूरत के समय अलग-अलग भूमिकाएँ प्रभावी ढंग से निभा सकें।

उन्होंने कहा कि निकट भविष्य में, एयरफोर्स के पास LCA तेजस Mk 1A, LCA Mk 2, फ्रांसीसी राफेल और स्वदेशी पाँचवीं पीढ़ी के फाइटर जेट- एडवांस्ड मीडियम कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (AMCA) होंगे।

पाकिस्तान के इस कदम पर जाहिर की चिंता

पाकिस्तान द्वारा चीन के पाँचवीं पीढ़ी के J-35 स्टील्थ फाइटर जेट को हासिल करने की खबरों पर बात करते हुए, एयर चीफ मार्शल एपी सिंह ने कहा कि यह चिंता का विषय है।

उन्होंने कहा, “क्या यह ऐसी स्थिति है जिसका कोई समाधान नहीं है? मैं इससे सहमत नहीं हूँ। हमारे पास जरूरी क्षमताएँ हैं यह महज एक प्लेटफार्म की बात नहीं है, बल्कि यह है कि इसे पूरे सिस्टम में कैसे एकीकृत किया जाता है।”

आगे कहा, “पाकिस्तान के पास पहले भी अन्य प्लेटफॉर्म रहे हैं, फिर भी वे ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान उनसे कुछ खास हासिल नहीं कर पाए। इसी तरह, अगर हम उन प्लेटफॉर्म को प्रभावी ढंग से एकीकृत करते हैं जिन्हें हम खरीद रहे हैं और शामिल कर रहे हैं, तो हमें इस खतरे का सामना करने में सक्षम होना चाहिए- कम से कम अभी के लिए, जब तक कि वे इन नए विमानों को पूरी तरह से अपने सिस्टम में एकीकृत नहीं कर लेते।”

AMCA में देरी पर वैकल्पिक निर्णय लेने की जरूरत

उन्होंने यह भी कहा कि AMCA प्रोग्राम को आगे बढ़ाने और उसमें देरी होने की स्थिति में वैकल्पिक निर्णय लेने की जरूरत है। उन्होंने यह भी साफ किया कि रूस ने Su-57 की पेशकश की है, लेकिन अभी तक कोई फैसला नहीं हुआ है, साथ ही उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि अगर हमारे विरोधी पाँचवीं पीढ़ी का एयरक्राफ्ट हासिल कर रहे हैं तो हमें भी पाँचवीं पीढ़ी के एयरक्राफ्ट की जरूरत पर विचार करना चाहिए।

इंडियन एयरफोर्स अपनी BVR क्षमता को बढ़ाने के लिए क्या कर रही है? ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ के इस सवाल पर एयर चीफ ने कहा कि तीन वैरिएंट- अस्त्र और इसके Mk2 और Mk3 वैरिएंट अभी प्रोडक्शन या रिसर्च के स्टेज में हैं।

अस्त्र BVRAAM का प्रोडक्शन पहले से ही हो रहा है, जबकि Mk2 वैरिएंट का रिसर्च एंड डेवलपमेंट आधा हो चुका है और Mk3 रिसर्च एंड डेवलपमेंट के शुरुआती स्टेज में है, इस पर काम चल रहा है। उन्होंने कहा कि इंडियन एयरफोर्स विदेशी स्रोतों से अधिक रेंज वाली मिसाइलों के और बैच खरीदने की कोशिश भी कर रही है।

खबरों के मुताबिक, भारत रूस की R-37M अल्ट्रा-लॉन्ग-रेंज एयर-टू-एयर मिसाइलें और फ्रांस की मेट्योर मिसाइलों के और बैच खरीदने पर विचार कर रहा है। पिछले साल मई में ऑपरेशन सिंदूर के बाद से ही IAF की BVR क्षमता को बढ़ाने पर ध्यान दिया जा रहा है।

एयरचीफ मार्शल ने कहा कि अस्त्र, इसके वैरिएंट और विदेशी मिसाइलें एयरफोर्स की फौरी जरूरतों को पूरा करेंगी। उन्होंने यह भी कहा कि अस्त्र Mk2 और Mk3 वैरिएंट का डेवलपमेंट सही दिशा में आगे बढ़ रहा है, खासकर रेंज के मामले में।

जानकारी दे दें कि इस सीरीज की पहली मिसाइल- ASTRA Mk 1 की रेंज 80 से 110 km है। ASTRA Mk 1 का एक अधिक एडवांस्ड वर्शन ASTRA Mk 2 है, जिसकी रेंज बढ़ाकर 200 km कर दी गई है; पहले इसकी रेंज लगभग 160 km तय की गई थी।

इस साल की शुरुआत में, DRDO ने ASTRA Mk 3 के लिए अपनी सॉलिड फ्यूल डक्टेड रैमजेट (SFDR) टेक्नोलॉजी का फ्लाइट टेस्ट किया था, जिसकी रेंज 350 km से अधिक हो सकती है।

अलग ड्रोन फोर्स की जरूरत नहीं- एपी सिंह

उन्होंने यह भी कहा कि भले ही एयरफोर्स ड्रोन और लोइटरिंग म्यूनिशन की संख्या बढ़ा रही है, लेकिन किसी अलग ड्रोन फोर्स की जरूरत नहीं है।

राष्ट्रीय शक्ति मजबूत सेना पर निर्भर

IAF चीफ ने कहा कि किसी भी देश की व्यापक राष्ट्रीय शक्ति के अन्य तत्व एक मजबूत सेना पर निर्भर करते हैं।

उन्होंने कहा, “सैन्य शक्ति सबसे अहम होती है, और पर्याप्त सैन्य शक्ति के बिना कोई भी देश दबाव में आ सकता है। अगर हमें अपने तरीके से काम करना है, अगर हमें उस रास्ते पर चलना है जिस पर हम चलना चाहते हैं, तो हमारे पास एक मजबूत सेना होनी चाहिए।”

उन्होंने कहा, “जब हम एक मजबूत सेना की बात करते हैं, तो हाल के संघर्षों में हमने देखा है कि एयर पावर ही सबसे आगे रही है, सैन्य शक्ति के सबसे अहम हिस्से के तौर पर उभरी है और यह एक ऐसा जरिया है जिस पर कोई भी देश अपने लक्ष्यों को पूरा करने के लिए निर्भर करता है।”

उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि चाहे एडवांस्ड फाइटर एयरक्राफ्ट हो, लंबी दूरी के सटीक हथियार हो, इंटीग्रेटेड एयर कमांड और कंट्रोल हो या बिना पायलट वाले एरियल सिस्टम हो, यह सब साफ तौर पर दिखाता है कि सैन्य शक्ति एयरोस्पेस डोमेन के इर्द-गिर्द घूम रही है।”

IAF चीफ ने की कैप्टन मच्छार की तारीफ

इसके अलावा, IAF चीफ ने इजरायल जाने वाली फ़्लाइट से जुड़ी घटना के दौरान फ़्लाईदुबई के कैप्टन स्मित मच्छार की बहादुरी की तारीफ की। उन्होंने कहा, “उन्होंने जबरदस्त शारीरिक और मानसिक मजबूती दिखाई। यह हमारे लिए एक सबक है।”

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एयर वाइस मार्शल शक्ति शर्मा ने इतिहास रच दिया है। वह भारतीय रक्षा बलों (Indian defence forces) में एयर वाइस मार्शल या इसके समकक्ष रैंक हासिल करने वाली पहली गैर-चिकित्सा महिला अधिकारी बन गई हैं। वह भारतीय सशस्त्र बलों में इस स्तर तक पहुंचने वाली पहली महिला अधिकारी हैं। सेना और नौसेना में अब तक महिला अधिकारी कर्नल और उसके समकक्ष रैंक तक पहुंची हैं। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें