P Chidambaram News: 16 से 18 अप्रैल के बीच केंद्र सरकार ने संसद का विशेष सत्र बुलाया है। इसको लेकर पूर्व गृह मंत्री और कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पी चिदंबरम भड़क गए हैं। उन्होंने कहा कि 16-18 अप्रैल को संसद बुलाने का प्रस्ताव एक शरारतपूर्ण कदम है और इसका विरोध किया जाना चाहिए।

कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर लिखा, “तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल में मतदान 23 अप्रैल (और पश्चिम बंगाल में 29 अप्रैल) को निर्धारित है। लोकसभा में तमिलनाडु के 39 और पश्चिम बंगाल के 28 सांसद विपक्षी बेंचों पर बैठते हैं। 16-18 अप्रैल के दौरान वे अपने-अपने निर्वाचन क्षेत्रों में पूरी तरह व्यस्त रहेंगे। यदि इन तारीखों पर संविधान संशोधन से जुड़े महत्वपूर्ण विधेयकों पर चर्चा और मतदान कराया जाता है, तो लोकसभा में मौजूद ये 67 सांसद इसमें कैसे भाग ले पाएंगे और मतदान कैसे करेंगे? मुझे संदेह है कि इसके पीछे का मकसद इन सांसदों को इस प्रक्रिया से बाहर रखना है।”

विधेयकों के ड्राफ्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए- पूर्व गृह मंत्री

पूर्व गृह मंत्री ने आगे लिखा, “चूंकि सरकार द्वारा 16-18 अप्रैल को संसद में पेश किए जाने वाले विधेयकों के ड्राफ्ट अभी तक सार्वजनिक नहीं किए गए हैं, इसलिए मैं विधेयकों के सार पर टिप्पणी नहीं कर सकता। लेकिन कल माननीय प्रधानमंत्री के भाषण से विधेयकों में संभावित विषयों का संकेत मिलता है। लोकसभा की संख्या 548 (वर्तमान संख्या 543) से बढ़ाकर 816 करने का प्रस्ताव प्रतिगामी है और इससे अधिक जनसंख्या वाले राज्यों और स्थिर जनसंख्या वाले दक्षिणी राज्यों के बीच अंतर और बढ़ जाएगा।”

कांग्रेस नेता ने लिखा, “लोकसभा में महिलाओं के लिए एक तिहाई सीटें आरक्षित करना वर्तमान सीटों की संख्या का एक तिहाई आरक्षित करके संभव है। 816 सदस्यों वाली लोकसभा एक बड़ी और अव्यवस्थित सभा बन जाएगी, जिसमें प्रत्येक सदस्य को बोलने के कम अवसर और कम समय मिलेगा। एक सांसद क्या कह सकता है जब उसे तीन महीने में एक बार और वह भी कुछ मिनटों से अधिक समय के लिए नहीं बोलने का अवसर मिले?”

संसद सत्र बुलाने की इतनी जल्दी क्यों- पी चिदंबरम

पी चिदंबरम ने खड़गे के पत्र का भी जिक्र किया। उन्होने लिखा, “सरकार के 26 मार्च, 2026 के पत्र के जवाब में मल्लिकार्जुन खड़गे ने 16-18 अप्रैल को संसद सत्र बुलाने के प्रस्ताव का विरोध किया है और इसके बजाय 29 अप्रैल का सुझाव दिया है। 16 अप्रैल को संसद सत्र बुलाने की इतनी जल्दी क्यों है? 29 अप्रैल को संसद सत्र क्यों नहीं बुलाया जा सकता।”

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मुझे नहीं पता कि कौन-से ग्रह एक साथ आएंगे या कौन-सा ग्रह वक्री होगा, लेकिन भारत के राजनीतिक परिदृश्य को देखते हुए मैं कह सकता हूं कि ‘हम रोचक दौर से गुजर रहे हैं’। पढ़ें पूरी खबर….