प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने पॉलिटिकल कंसल्टेसी फर्म I-PAC के निदेशक विनेश चंदेल को गिरफ्तार किया है। ईडी ने आरोप लगाया है कि फर्म और उसके सहयोगियों से जुड़े परिसरों में जब तलाशी ली गई तो कई आपत्तिजनक दस्तावेज और डिजिटल सबूत बरामद हुए हैं।
ईडी ने कहा है कि कुछ इसी तरह के दस्तावेज एक राजनीतिक दल के दफ्तर में भी मिले हालांकि उसने पार्टी का नाम नहीं लिया।
विनेश चंदेल को पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी का करीबी माना जाता है। चंदेल ने पश्चिम बंगाल और मेघालय में टीएमसी के साथ काफी काम किया है।
I-PAC में है 33% हिस्सेदारी
चंदेल की I-PAC में 33% हिस्सेदारी है। चंदेल को कोयले की कथित तस्करी से जुड़े मनी लॉन्ड्रिंग मामले में गिरफ्तार किया गया है। ईडी ने आरोप लगाया है कि यह फर्म करोड़ों रुपए की मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल थी और उसने अब तक 50 करोड़ रुपए की राशि बरामद कर ली है।
ईडी ने क्या आरोप लगाए हैं?
ईडी के मुताबिक, I-PAC दो तरीके से पैसे लेती थी। एक तो वह चेक के जरिए लेती थी जबकि कुछ पैसा कैश में लिया जाता था। इस पैसे का इस्तेमाल चुनाव संबंधी खर्चों और दूसरे कामों में किया गया।
ईडी के मुताबिक, जांच में पता चला है कि I-PAC ने वित्तीय वर्ष 2019-20 और 2020-21 के दौरान रामसेथु इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड से ब्याज-मुक्त ऋण के रूप में 13.50 करोड़ रुपये की राशि अपने खातों में डलवाई। ईडी ने कहा है कि यह संस्था न तो बैंक है और न ही राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान (एनबीएफसी) और ऐसा करने में किसी तरह की कोई शर्त भी नहीं रखी गई जैसे- कोई लोन एग्रीमेंट नहीं था, कोई गारंटी या शर्तें नहीं थीं।
हवाला के नेटवर्क का इस्तेमाल
ईडी के मुताबिक, जांच में पता चला है कि I-PAC ने बिना कोई परामर्श या पेशेवर सेवाएं दिए बिना ही कई कंपनियों से लिए गए पैसे को सही ठहराने के लिए फर्जी बिल बना दिए। जांच एजेंसी के मुताबिक, इस बात का पता चला है कि जितना भी पैसा I-PAC को मिला, उसका बंटवारा हुआ और इसमें हवाला के नेटवर्क का इस्तेमाल किया गया। ईडी का दावा है कि विनेश चंदेल, ऋषि राज सिंह और अन्य निदेशकों की कंपनी के फैसलों में अहम भूमिका थी और वे अवैध पैसे के काम और मनी लॉन्ड्रिंग में शामिल थे।
ईडी को इस बात की आशंका है कि विनेश चंदेल जांच से बचने की कोशिश कर सकते हैं और चूंकि वह हाल के वर्षों में कई बार विदेश जा चुके हैं, ऐसे में वह फरार हो सकते हैं। ईडी ने अदालत को बताया कि जनवरी में तलाशी अभियान के बाद चंदेल ने प्रमुख कर्मचारियों के खातों से ईमेल और संवेदनशील फाइनेंशियल डेटा को हटा दिया।
वकील ने बताया राजनीतिक साजिश
दूसरी ओर, विनेश चंदेल की ओर से पेश हुए एडवोकेट विकास पाहवा ने तर्क दिया कि उनके मुवक्किल ने लगातार जांच में सहयोग किया है। उन्होंने इस मामले को तमिलनाडु और पश्चिम बंगाल के चुनावों से जोड़ते हुए राजनीतिक साजिश बताया। I-PAC तमिलनाडु में डीएमके के लिए काम कर रही है।
पाहवा ने कहा कि जो आरोप ईडी ने लगाए हैं, वे आयकर अधिनियम के दायरे में आते हैं ना कि मनी लॉन्ड्रिंग कानून में।
