Jagdeep Dhankhar News: पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देते समय कभी भी अपनी बीमारी का दावा नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल इतना कहा था कि वे अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो कि सभी को करना चाहिए।
राजस्थान के चुरू में एक छोटी सभा को संबोधित करते हुए पूर्व उपराष्ट्रपति धनखड़ ने कहा, “कहते हैं पहला सुख निरोगी काया। मैंने स्वास्थ्य के प्रति कभी लापरवाही नहीं बरती। मैंने जब कहा कि मैं पद त्याग रहा हूं तो मैंने यह कभी नहीं कहा कि मैं बीमार हूं। मैंने कहा की मैं स्वास्थ्य को अहमियत दे रहा हूं। स्वास्थ्य को भी महत्व देना चाहिए, क्योंकि हमारे शास्त्रों में भी यही कहा गया है। मैंने अक्सर ऐसी बातें कही हैं जिनसे लोग नाराज हुए हैं, लेकिन मैंने सीधे-सीधे अपनी बात कही।”
चूरू में धनखड़ की मेजबानी कांग्रेस के पूर्व सांसद राम सिंह कासवान और ओलंपियन और कांग्रेस की पूर्व विधायक कृष्णा पूनिया ने की। पूर्व उपराष्ट्रपति ने कहा कि राम सिंह के स्वास्थ्य को लेकर चिंता ही उन्हें चूरू ले आई और जब भी वह अस्वस्थ हुए हैं, राम सिंह सबसे पहले उनका हालचाल पूछने वालों में से रहे हैं।
जगदीप धनखड़ ने उपराष्ट्रपति पद से दिया था इस्तीफा
21 जुलाई 2025 को मानसून सत्र शुरू होने से एक दिन पहले उन्होंने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू को अपना इस्तीफा सौंप दिया। इस अचानक लिए गए फैसले से सत्ताधारी दल और विपक्ष दोनों ही हैरान रह गए। विपक्षी दलों ने इस मुद्दे पर सवाल उठाए और दावा किया कि इस्तीफे के पीछे कोई और कारण हो सकता है।
जगदीप धनखड़ ने 21 जुलाई 2025 को राष्ट्रपति को लिखे अपने पत्र में कहा था कि वह स्वास्थ्य को प्राथमिकता देने और मेडिकल एडवाइस का पालन करने के लिए इस्तीफा दे रहे हैं। धनखड़ ने लिखा, “मैं संविधान के अनुच्छेद 67A के अनुसार अपने पद से इस्तीफा देता हूं। मैं भारत के राष्ट्रपति में गहरी कृतज्ञता प्रकट करता हूं। आपका समर्थन अडिग रहा और मेरा कार्यकाल शांतिपूर्ण और बेहतरीन रहा। मैं माननीय प्रधानमंत्री और मंत्रीपरिषद के प्रति भी गहरी कृतज्ञता व्यक्त करता हूं। प्रधानमंत्री का सहयोग और समर्थन अमूल्य रहा है और मैंने अपने कार्यकाल के दौरान उनसे बहुत कुछ सीखा है।”
उन्होंने आगे लिखा, “माननीय सांसदों से जो मुझे स्नेह, विश्वास और अपनापन मिला, वह मेरी स्मृति में हमेशा रहेगा। मैं इस महान लोकतंत्र के लिए आभारी हूं कि मुझे इस महान लोकतंत्र में उपराष्ट्रपति के रूप में जो अनुभव और ज्ञान मिला, वह अत्यंत मूल्यवान रहा। यह मेरे लिए सौभाग्य और संतोष की बात रही है कि मैंने भारत की अभूतपूर्व आर्थिक प्रगति और परिवर्तनकारी युग में तेज विकास को देखा और उसमें अपनी भागीदारी निभाई। इस महत्वपूर्ण दौर में सेवा करना मेरे लिए सच्चे सम्मान की बात रही है। आज जब मैं इस पद को छोड़ रहा हूं तो मेरे दिल में भारत की उपलब्धियां और शानदार भविष्य के लिए गर्व और अटूट विश्वास है।”
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पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने जुलाई में ही अपने पद से इस्तीफा दे दिया था। हालांकि उपराष्ट्रपति पद से इस्तीफा देने के पांच महीने बाद भी जगदीप धनखड़ को अभी तक सरकारी आवास नहीं मिला है। पूरी खबर पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…
