PM Modi Book Launch Event: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बुधवार को दिल्ली के विज्ञान भवन में पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की आत्मकथा का विमोचन किया। इसका शीर्षक ‘ट्रायम्फ ऑफ द इंडियन रिपब्लिक: माई लाइफ, माई स्ट्रगल्स’ है। इस अवसर पर प्रधानमंत्री मोदी ने अपनी मां हीराबेन को याद किया।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा, “आप रामनाथ कोविंद जी का जीवन देखिए, वो एक सामान्य परिवार से आते हैं। कानपुर देहात में उनका जन्म हुआ। कोविंद जी ने अपनी किताब में लिखा है कि कैसे गर्मी के मौसम में एक दिन उनके घर में आग लग गई, उनकी मां अपनी चिंता छोड़कर घर की चीजों को बचा रही थीं।”
मैं मां की कमी आज भी महसूस करता हूं- पीएम मोदी
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, “एक सामान्य परिवार में मां के लिए एक-एक चीज बच्चों के पालन-पोषण का जरिया होती है। उसी कोशिश में आग में फंसकर उनकी माता जी की मृत्यु हो गई। आप कल्पना कर सकते हैं, छोटी सी उम्र में इस तरह की घटना, मां को इस तरह खो देना, कितना दर्दनाक रहा होगा। मैं तो भाग्यशाली रहा हूं, मेरी मां 100 सालों से ज्यादा जिंदा रहीं और मुझे आशीर्वाद देती रहीं, इसके बावजूद मैं मां की कमी महसूस करता हूं।”
साथ ही पीएम मोदी ने युवाओं से आत्मकथाएं पढ़ने का आग्रह किया। उन्होंने कहा कि आत्मकथाएं उन लोगों के जीवन के जरिये अलग-अलग दौर को समझने का मौका देती हैं जिन्होंने उन्हें खुद जिया है। उन्होंने कहा, “मैं खास तौर पर युवा पीढ़ी से कहना चाहूंगा हम रील्स और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के दौर में जी रहे हैं। शॉर्टकट के इस जमाने में भी, आइए रेलवे स्टेशनों पर लिखी एक बात याद रखें, शॉर्टकट आपकी जिंदगी बर्बाद कर सकता है।”
पीएम नरेंद्र मोदी ने कहा, “मैं युवाओं से गुजारिश करूंगा कि वे उन लोगों की आत्मकथा पढ़ें जिन्हें वे पसंद करते हैं। आत्मकथा किसी खास दौर की ऐतिहासिक घटनाओं को एक अनोखे नजरिये से दिखाती है। इसमें बताया गया समय हमें इतिहास के बहुत करीब ले आता है। इसीलिए मुझे पूरी उम्मीद है कि कोविंद जी की मेहनत आने वाली पीढ़ियों और खासकर युवाओं के लिए फायदेमंद साबित होगी।”
पूर्व राष्ट्रपति कोविंद की तारीफ की
प्रधानमंत्री मोदी ने पूर्व राष्ट्रपति रामनाथ कोविंद की तारीफ भी की है। उन्होंने कहा, “हमारे पूर्वजों ने सदियों तक संघर्ष किया। महात्मा गांधी, बाबा साहेब अंबेडकर, ज्योतिबा फुले, सावित्रीबाई फुले। ऐसी कितनी महान विभूतियों ने भारत के नवनिर्माण का सपना देखा था। एक ऐसा भारत जहां गरीब से गरीब, वंचित से वंचित को शिखर तक पहुंचने का अवसर मिल सके। कोविंद जी जैसे व्यक्तित्वों ने अपने श्रम और काबिलियत से न सिर्फ अपना जीवन बदला बल्कि सदियों के उस सपने और विजन को साकार करने में अपनी अहम भूमिका निभाई।”
प्रधानमंत्री ने आगे कहा, “राष्ट्रपति जैसे सर्वोच्च पद से सेवामुक्त होने के बाद भी उन्होंने विश्राम नहीं लिया है। वो अभी भी ‘एक देश, एक चुनाव’ जैसे महत्वपूर्ण विषय पर काम कर रहे हैं। ये एक ऐसा विषय है, जिसका समाधान देश के लोकतंत्र का नया अध्याय शुरू कर सकता है। मैं मानता हूं, कोविंद जी की इस कर्तव्यनिष्ठा और सेवाभाव से देश के लोग बहुत कुछ सीख सकते हैं।”
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आईआईटी दिल्ली के दीक्षांत समारोह में शनिवार को देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी शामिल हुए। इस मौके पर उन्होंने संस्थान से पढ़ाई पूरी करने वाले छात्र-छात्राओं को डिग्री और मेडल प्रदान किए। इस मौके पर एक अवसर ऐसा भी आया जब उनकी बात सुनकर सारे छात्र-छात्राएं हंसने लगें। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
