लोकसभा में विपक्ष के नेता और कांग्रेस सांसद राहुल गांधी ने रविवार को सोशल मीडिया पर एक रहस्यमयी पोस्ट साझा किया। पोस्ट में राहुल गांधी ने कहा कि उन्हें समुद्र की उफनती लहरों में तैरना पसंद है, क्योंकि यह आपको सिखाता है कि उथल-पुथल भी एक अलग तरह की शांति ही है।

राहुल गांधी ने ‘एक्स’ पर एक पोस्ट में बिना कोई संदर्भ या विवरण दिए हुए लिखा, “मुझे समुद्र में तब तैरना पसंद है, जब लहरें तेज हों। इससे यह सीख मिलती है कि उथल-पुथल भी शांति का ही एक रूप है।”

कांग्रेस के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष की यह पोस्ट ‘इंडियन एक्सप्रेस’ में 23 सितंबर को छपी उस खबर को लेकर मचे सियासी हंगामे के बीच आया है, जिसमें कहा गया है कि निर्वाचन आयुक्त- सुखबीर सिंह संधू और विवेक जोशी ने मतदाता सूचियों के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) से जुड़े मुद्दों पर बार-बार सवाल उठाए थे। एसआईआर के देशव्यापी कार्यान्वयन का काम तीन-सदस्यीय निर्वाचन आयोग की निगरानी में हो रहा है।

‘इंडियन एक्सप्रेस’ की खबर में कहा गया है कि संधू और जोशी ने पिछले 10 महीने में एसआईआर को लेकर 14 बार उन फैसलों और आदेशों पर औपचारिक रूप से आपत्ति दर्ज कराई थी, जिनके बारे में उनका कहना है कि ये उनकी जानकारी या सिफारिश के बिना लिये या जारी किए गए थे। राहुल ने पिछले साल ‘वोट चोरी’ का मुद्दा उठाया था और चुनावों में गड़बड़ी का आरोप लगाया था। उन्होंने कहा है कि मीडिया रिपोर्ट ने इन आरोपों की पुष्टि कर दी है।

इससे पहले शनिवार को राहुल गांधी ने एक अन्य पोस्ट में कहा था, “पहले, जब ज्ञानेश कुमार एक सेवारत IAS अधिकारी थे, तब उनका इस्तेमाल BJP के लिए लोगों को पार्टी में शामिल कराने के लिए किया गया। फिर मोदी और शाह ने उन्हें अंपायर बना दिया और भारत के चुनावों में मैच फिक्सिंग की जिम्मेदारी उनके हाथों में सौंप दी।”

राहुल गांधी ने यह बयान कांग्रेस केरल के द्वारा शेयर किए गए एक टीवी क्लिक को पोस्ट करते हुए कही थी। कांग्रेस केरल ने जो क्लिप शेयर की थी, उसके साथ लिखा था, “ज्ञानेश कुमार को लेकर बड़ा खुलासा। केरल के पूर्व मुख्य सचिव जिजी थॉमसन का कहना है कि ज्ञानेश कुमार ने उनसे संपर्क किया और उन्हें बीजेपी के टिकट पर चुनाव लड़ने के लिए कहा। साथ ही मंत्री पद का प्रस्ताव भी दिया था।

चुनाव आयोग पर इंडियन एक्सप्रेस की एक्सक्लूसिव रिपोर्ट को 5 बिंदुओं में समझें

भारतीय निर्वाचन आयोग (ECI) ने जून 2025 में बिहार से ‘स्पेशल इंटेंसिव रिवीजन’ (SIR) के तहत वोटर लिस्ट के संशोधन की प्रक्रिया शुरू की थी। हालांकि इसको लेकर कई सवाल उठ रहे थे। एसआईआर के तहत 30 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से 13 करोड़ से ज्यादा नाम हटाए गए। ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ की रिपोर्टर रितिका चोपड़ा की पड़ताल में एसआईआर प्रक्रिया और इसे लेकर निर्वाचन आयोग के अंदर उठी असहमतियों के बारे में अहम जानकारियां सामने आई हैं। पढ़ें पूरी खबर।