केंद्र सरकार के कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय में राज्य मंत्री भागीरथ चौधरी को खीरे की खेती के लिए 99 लाख रुपये की सरकारी सब्सिडी मिली। इसको लेकर अब मंत्री भागीरथ चौधरी की प्रतिक्रिया आई है। उन्होंने कहा कि मैं एक किसान हूं और बचपन से खेती कर रहा हूं। मैंने कुछ नहीं छिपाया है। हजारों किसान पॉलीहाउस लगाते हैं और सब्सिडी का फायदा उठाते हैं। तो मैंने भी उसी के तहत सब्सिडी लिया था।

केंद्रीय मंत्री भागीरथ चौधरी ने कहा, “मैंने 2018 में अप्लाई किया था। मैंने वहां पर बाकायदा एक बोर्ड लगाया है। बोर्ड में मैंने इतना लोन लिया और इतनी मैंने सब्सिडी ली और मैं वहां पर किसानों को प्रशिक्षण दिलाता हूं। आप इस नई तकनीक से खेती करें। मैंने कुछ छिपा के थोड़ी काम किया है। वहां पर कलेक्टर भी आए, डीएम भी आए। उन्होंने इसकी तारीफ भी की है। हम तो वहां पर प्रशिक्षण दे रहे हैं कि आप भी इस तरह की खेती करिए।”

मैंने कुछ भी नहीं छिपाया है- भागीरथ चौधरी

भागीरथ चौधरी ने आगे कहा, “मैं किसान हूं और जो आमजन करते हैं वही मैं कर रहा हूं। बोर्ड लगाया हुआ है, इतना मैंने लोन लिया, मैं तो और भी किसानों को प्रेरित करता हूं। आज मान लो कोई किसान डीएपी का बैग लेकर आएगा, मैं भी लेकर आऊंगा तो उस पर भी सब्सिडी मिलती है। उस पर भी मुझे सब्सिडी नहीं लेनी चाहिए। यूरिया का बैग दो हजार रुपये का आता है, वो 266 रुपये का मिलता है, वो भी नहीं लेना चाहिए। आज कोई नेता हो और वो इंडस्ट्री लगाता है, तो वो सब्सिडी लेता है, फिर तो वो भी गलत है, मैंने फिर क्या गलत किया है और क्या छिपाया है।”

केंद्रीय मंत्री ने कहा, “खुली किताब है, वहां पर मैं किसानों को लेकर जाता हूं। सब कुछ मैंने गाइडलाइन के आधार पर किया है और फसल लगने के छह महीने बाद मैंने सब्सिडी ली है। विपक्ष के पास कोई मुद्दा नहीं है तो वो देखते हैं कि कैसे भागीरथ चौधरी को बदनाम करें। मैं किसानों को बताता हूं कि वर्षा के पानी का संचय करो।”

मंत्री को मिली थी सब्सिडी

द इंडियन एक्सप्रेस की जांच में पता चला है कि केंद्रीय मंत्री को तीन महीने पहले ही उनके मंत्रालय के तहत चलने वाली एक सरकारी योजना के जरिए यह सब्सिडी मिली थी। इस योजना को जिस राष्ट्रीय बागवानी बोर्ड (एनएचबी) ने मंजूरी दी थी, उसमें केंद्रीय कृषि राज्य मंत्री पदेन उपाध्यक्ष होते हैं।

मिशन फॉर इंटीग्रेटेड डेवलपमेंट ऑफ हॉर्टिकल्चर (MIDH) नाम की इस योजना को 2014-15 में लॉन्च किया गया था। इस योजना का मकसद बड़े पैमाने पर कॉमर्शियल खेती को बढ़ावा देना था। इस योजना का संचालन एनएचबी द्वारा किया जाता है और यह बोर्ड भागीरथ चौधरी के मंत्रालय के प्रशासनिक नियंत्रण के तहत आता है। योजना के तहत शिमला मिर्च, खीरा, टमाटर और आठ किस्म के फूलों की खेती के लिए अधिकतम 50% तक सब्सिडी दी जाती है। इसमें हर परिवार के लिए लिमिट 1 करोड़ रुपये है। पूरी रिपोर्ट पढ़ने के लिए यहां क्लिक करें…