नोएडा की गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी के छात्र अक्षत त्रिपाठी जानना चाहते हैं कि उन्हें नोटिस जारी किए जाने की वजह क्या थी? अक्षत को जारी नोटिस अब वापस ले लिया गया है। 20 साल के अक्षत गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में BA LLB के सेकेंड ईयर के छात्र हैं।
नोएडा पुलिस ने इस मामले में आधिकारिक बयान जारी किया है। पुलिस ने कहा है कि छात्र को जारी किए गए नोटिस को पांच सितंबर को रद्द कर दिया गया था। पुलिस ने यह भी कहा है कि नोटिस जारी करने में शामिल कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
अक्षत त्रिपाठी ने ‘द इंडियन एक्सप्रेस’ से कहा, “मेरी कोई क्रिमिनल हिस्ट्री नहीं है। उन्होंने मुझ पर झूठे आरोप लगाए हैं, ऐसे आरोप जिन्हें साबित नहीं किया जा सकता। भले ही उन्होंने इसे रद्द कर दिया हो लेकिन मैं जानना चाहता हूं कि नोटिस जारी करने के पीछे क्या वजह और आधार थे।”
अक्षत कहते हैं, “प्रोटेस्ट के दो महीने बाद अचानक किसी अधिकारी के मन में यह बात कैसे आ सकती है? … हम आखिर तक लड़ेंगे।”
SFI के सेक्रेटरी हैं अक्षत त्रिपाठी
अक्षत त्रिपाठी, गौतम बुद्ध यूनिवर्सिटी में स्टूडेंट्स फेडरेशन ऑफ इंडिया (SFI) के सेक्रेटरी हैं। पुलिस की रिपोर्ट में अक्षत पर यूनिवर्सिटी के छात्रों के बीच ‘सरकार-विरोधी, गुमराह करने वाले बयान फैलाने और उन्हें उकसाने’ का आरोप लगाया गया था।
पुलिस की रिपोर्ट में कहा गया था कि इससे शांति-व्यवस्था भंग हो सकती है। इसी रिपोर्ट का हवाला देते हुए ग्रेटर नोएडा के कार्यकारी मजिस्ट्रेट ने नोटिस जारी किया था और कहा था कि विपक्षी पक्ष शांति भंग कर सकता है।
नोटिस के जवाब में अक्षत त्रिपाठी ने कहा कि उन्होंने 20 जुलाई को जंतर-मंतर पर हुए प्रोटेस्ट में हिस्सा लिया था और पुलिस के लाठीचार्ज में घायल भी हुए थे लेकिन वह 25 मई के बाद से यूनिवर्सिटी नहीं गए हैं।
25 मई के बाद से यूनिवर्सिटी नहीं गया- अक्षत
अक्षत ने कहा, “जब मैं 25 मई के बाद से यूनिवर्सिटी गया ही नहीं, तो मुझ पर लोगों को उकसाने का आरोप कैसे लगाया जा सकता है?” उन्होंने बताया कि मई के आखिर में यूनिवर्सिटी में दो महीने की छुट्टियां हो गई थी और इसके बाद वह हॉस्टल छोड़कर चले गए थे।
अक्षत ने कहा, “छुट्टियां खत्म होने के बाद एक महीने तक हमारी क्लास ऑनलाइन चलीं क्योंकि एडमिनिस्ट्रेशन का कहना था कि कॉलेज की बिल्डिंग में मरम्मत का काम चल रहा है। नोटिस में कहा गया है कि मैंने छात्रों को उकसाया, यह कैसे मुमकिन है? जुलाई के लगभग पूरे महीने मैं इलाहाबाद हाई कोर्ट में इंटर्नशिप कर रहा था।” त्रिपाठी ने बताया कि ऑफलाइन क्लास इसी हफ्ते, 7 सितंबर को शुरू हुईं।
अक्षत ने याचिका में क्या कहा?
अक्षत बुधवार सुबह दिल्ली पहुंचे और सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की। उन्होंने अपनी याचिका में कहा, “याचिकाकर्ता को कोई जानकारी नहीं दी गई है। नियमों के अनुसार, जिन लोगों के खिलाफ ऐसी धाराओं के तहत कार्रवाई की जाती है, उन्हें उनके खिलाफ दी गई जानकारी के बारे में बताया जाना चाहिए ताकि वे प्रभावी ढंग से अपना पक्ष रख सकें।”
अक्षत बताते हैं कि उन्हें 4 सितंबर की रात करीब 8 बजे व्हाट्स ऐप पर नोटिस मिला। उन्होंने बताया कि 5 लाख रुपये का पर्सनल बॉन्ड भरने और अगले ही दिन ग्रेटर नोएडा के सूरजपुर में पेश होने के लिए कहा गया था। 5 सितंबर को त्रिपाठी ने मजिस्ट्रेट को इसका जवाब दिया। जवाब में उन्होंने कहा, “सिर्फ शक के आधार पर किसी व्यक्ति के खिलाफ ऐसी कार्रवाई करना सही नहीं है।”
नोएडा पुलिस ने क्या कहा?
बुधवार को नोएडा पुलिस ने आधिकारिक बयान में कहा, “यह नोटिस विरोध प्रदर्शन के सिलसिले में BNSS की धारा 126 और 135 के तहत जारी किया गया था, जिसमें शांति और सार्वजनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उनसे एक बॉन्ड भरने की मांग की गई थी। जैसे ही यह मामला वरिष्ठ अधिकारियों की जानकारी में आया, 5 सितंबर 2026 को गलत तरीके से जारी किए गए नोटिस को रद्द कर दिया गया।”
भारतीय नागरिक सुरक्षा संहिता (BNSS) की धारा 126 और 135 कानूनी प्रावधान हैं जिनका इस्तेमाल कार्यकारी मजिस्ट्रेट सार्वजनिक शांति और व्यवस्था बनाए रखने के लिए करते हैं।
पुलिस के बयान में कहा गया है कि गौतम बुद्ध नगर के जिला मजिस्ट्रेट इस मामले में शामिल नहीं थे। पुलिस ने कहा, “चूंकि गौतम बुद्ध नगर में पुलिस कमिश्नरेट सिस्टम लागू है, इसलिए संबंधित नोटिस गौतम बुद्ध नगर के मजिस्ट्रेट III के कार्यालय द्वारा जारी किया गया था।”
जुलाई के विरोध प्रदर्शन को याद करते हुए त्रिपाठी बताते हैं कि कॉकरोच जनता पार्टी के द्वारा संसद तक मार्च बुलाए जाने से एक दिन पहले, 19 जुलाई की सुबह वह 15 अन्य लोगों के साथ इलाहाबाद से दिल्ली के लिए ट्रेन में सवार हुए थे।
अक्षत ने कहा, “मुझे अपने माता-पिता को जाने देने के लिए मनाना पड़ा… मैंने उन्हें भरोसा दिलाया कि मैं सुरक्षित रहूंगा लेकिन जब विरोध प्रदर्शन के दौरान मैं घायल हो गया, तो वे परेशान हो गए।”
किसी को तो जिम्मेदारी लेनी चाहिए…
अक्षत त्रिपाठी ने कहा, “मेरे कई करीबी दोस्त उन लोगों में शामिल थे जिन्होंने NEET-UG परीक्षा दी थी, यह रद्द कर दी गई थी, कुछ छात्रों ने गैप ईयर लिया था और उनके अच्छे अंक आए थे। मैं सभी NEET उम्मीदवारों का समर्थन करना चाहता था… किसी को तो जिम्मेदारी लेनी चाहिए और मैं अपने समर्थन के जरिये यह सुनिश्चित करना चाहता था।”
इलाहाबाद के रहने वाले अक्षत कहते हैं, “नोटिस मिलने के बाद मेरे माता-पिता मेरी सुरक्षा को लेकर डरे हुए हैं लेकिन उन्हें मुझ पर भरोसा है। SFI पहले दिन से ही मेरे साथ खड़ी रही है।”
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25 वर्षीय छात्रा आकृति चौधरी को NSA के तहत हिरासत में रखने का आदेश इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रद्द कर दिया। कोर्ट ने हिरासत को मनमाना बताया है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर।
