Jammu-Kashmir News: श्रीनगर में कश्मीर यूनिवर्सिटी के 21वें दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए उपराष्ट्रपति सीपी राधाकृष्णन ने गुरुवार को दूसरों की भावनाओं का सम्मान करने के महत्व के बारे में बात की और झारखंड के राज्यपाल रहते हुए जम्मू-कश्मीर के छात्रों की झारखंड यात्रा को याद किया।

उपराष्ट्रपति राधाकृष्णन ने कहा कि खुद शाकाहारी होने के बावजूद उन्होंने जम्मू-कश्मीर से आए छात्रों के ग्रुप के लिए नॉन-वेजिटेरियन खाना परोसने का अनुरोध किया। उन्होंने इस बात पर जोर दिया कि लोकतंत्र में, “दूसरों की भावनाओं का सम्मान करना उतना ही महत्वपूर्ण है जितना अपनी भावनाओं का सम्मान करना और इस तरह के आदान-प्रदान से राष्ट्रीय एकता मजबूत होती है।”

भारत में हो रहे सबसे बड़े बदलावों के बारे में उपराष्ट्रपति ने बात की

सीपी राधाकृष्णन ने भारत में हो रहे सबसे बड़े बदलाव के बारे में भी बात की। उन्होंने कहा, “भारत अब केवल टेक्नोलॉजी को अपनाने वाला देश नहीं रहा, हम इनोवेटर के तौर पर उभर रहे हैं और यही वह बड़ा बदलाव है जिससे भारत गुजर रहा है। रूप में उभर रहे हैं, और यही वह बड़ा बदलाव है जिससे भारत गुजर रहा है।” उपराष्ट्रपति ने दिल्ली में हाल ही में संपन्न हुए एआई समिट में जिन सीईओ से मुलाकात की, उनके उत्साह के बारे में भी जिक्र किया।

ग्रेजुएशन के छात्रों को बधाई देते हुए राधाकृष्णन ने कहा कि विश्वविद्यालयों को भले ही बुनियादी ढांचे और अकादमिक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता हो, लेकिन उनकी सच्ची विरासत उनके स्नातकों के चरित्र और योगदान में झलकती है। उन्होंने बताया कि जम्मू-कश्मीर में स्वर्ण पदक हासिल करने वालों में भी ज्यादातर महिलाएं हैं। उन्होंने कहा, “इन महत्वपूर्ण कारणों से मैं बहुत खुश हूं।” उन्होंने इसे जम्मू-कश्मीर में महिला सशक्तिकरण और प्रगति का सशक्त प्रमाण बताया। राधाकृष्णन ने डिजिटल इंडिया, स्टार्ट-अप इंडिया और मेक इन इंडिया जैसी सरकारी पहलों का भी हवाला दिया।

उमर अब्दुल्ला ने क्या कहा?

जम्मू-कश्मीर के राज्यपाल मनोज सिन्हा और मुख्यमंत्री उमर अब्दु्ल्ला ने भी ग्रेजुएशन के छात्रों को संबोधित किया। उमर ने कहा कि छात्र उन पीढ़ियों की विरासत को आगे बढ़ा रहे हैं जिन्होंने कठिन समय में भी ज्ञान की लौ को जलाए रखा।” अपनी सरकार के योग्यता, सतत विकास और डिजिटल संप्रभुता के तीन स्तंभों पर केंद्रित होने पर जोर देते हुए अब्दुल्ला ने कहा कि सबसे प्रेरणादायक आंकड़ा यह है कि 60000 ग्रेजुएशन छात्रों में से 60% से ज्यादा डिग्रियां हमारी बेटियों को मिल रही हैं। मुख्यमंत्री ने कहा, “हम महिला कल्याण से हटकर महिला नेतृत्व वाले विकास की ओर बढ़ चुके हैं।”

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पूर्व उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने कहा कि उन्होंने अपने पद से इस्तीफा देते समय कभी भी अपनी बीमारी का दावा नहीं किया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उन्होंने केवल इतना कहा था कि वे अपने स्वास्थ्य को प्राथमिकता दे रहे हैं, जो कि सभी को करना चाहिए। पढ़ें पूरी खबर…