Punjab News: ईडी के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह ने रविवार को कुछ मुद्दों पर अपरिवर्तनीय मतभेदों का हवाला देते हुए अकाली दल वारिस पंजाब दे से खुद को अलग कर लिया। उन्होंने सांसद अमृतपाल सिंह के नेतृत्व वाली पार्टी में शामिल होने के चार दिन बाद यह फैसला लिया है।

निरंजन सिंह ने अपने फेसबुक पेज पर एक पोस्ट में कहा, “मैं अकाली दल वारिस पंजाब दे से खुद को अलग करता हूं। मैंने पंजाब में मादक पदार्थों की समस्या, भ्रष्टाचार, गैंगस्टरों, जबरन वसूली और मादक पदार्थों की तस्करी में पुलिसकर्मियों की संलिप्तता जैसे मुद्दों पर अपना समर्थन दिया था, लेकिन कुछ मुद्दों पर मतभेद हैं जिन पर समझौता नहीं किया जा सकता। सार्वजनिक जीवन में व्यक्तियों का आचरण भारत के संविधान के दायरे में होना चाहिए।”

23 सितंबर को पार्टी में शामिल हुए थे

निरंजन सिंह ने 23 सितंबर को अकाली दल वारिस पंजाब दे में शामिल हो गए। इस मौके पर विधायक मनप्रीत सिंह अयाली और अमृतपाल के पिता तरसेम सिंह समेत पार्टी के कई नेता मौजूद थे।

शिरोमणि अकाली दल के पंथिक वोटों पर नजर रखते हुए, अकाली दल वारिस पंजाब दे में अपना राजनीतिक आधार बढ़ाने की कोशिश कर रहा है और अगले साल की शुरुआत में होने वाले विधानसभा चुनावों में सभी 117 सीटों पर चुनाव लड़ने की योजना बना रहा है।

उम्मीदवारों की कर दी है घोषणा

हालांकि, अभी तक एक राजनीतिक दल के रूप में रजिस्टर्ड नहीं होने के बावजूद, खालिस्तान की मांग का अक्सर समर्थन करने वाले इस संगठन ने पहले ही कई उम्मीदवारों की घोषणा कर दी है। इनमें गैंगस्टर से कार्यकर्ता बने लखबीर सिंह सिधाना उर्फ ​​लखा सिधाना को मौड़ से, दिवंगत अभिनेता दीप सिद्धू के भाई मनदीप सिंह सिद्धू को तलवंडी साबो से, अमृतपाल के करीबी सहयोगी पापलप्रीत सिंह को मजीठा से और पूर्व प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी की हत्या में अपनी भूमिका के लिए फांसी पर चढ़ाए गए केहर सिंह के बेटे सतवंत सिंह को बस्सी पठाना से मैदान में उतारा गया है।

इंडियन एक्सप्रेस से बात करते हुए निरंजन सिंह ने कहा कि हालांकि वह पार्टी छोड़ने के कारण के रूप में किसी एक व्यक्ति को इंगित नहीं करना चाहेंगे, लेकिन उनके लिए भारत का संविधान सर्वोपरि था। उन्होंने कहा, “जो कुछ भी करना हो, वह संविधान की सीमाओं के भीतर ही होना चाहिए, जो सर्वोच्च है। इस पर कोई समझौता नहीं किया जा सकता।”

जब उनसे पूछा गया कि क्या उन्होंने संगठन के खालिस्तान समर्थक रुख के कारण संगठन छोड़ा, तो उन्होंने कहा, “पार्टी की ओर से सार्वजनिक रूप से बोलने वाले लोगों का आचरण बिल्कुल स्पष्ट होना चाहिए। यह उनके शीर्ष नेतृत्व के बारे में नहीं है। मुझे अब भी लगता है कि वे धर्मनिरपेक्ष लोग हैं। यह उनके कुछ समर्थकों के उन बयानों के बारे में है जो उचित नहीं हैं। यह संवैधानिक मूल्यों के दायरे में होना चाहिए।”

पार्टी छोड़ने का फैसला उनका अपना स्वतंत्र निर्णय- अयाली

इस बीच, अयाली ने कहा, “पार्टी छोड़ने का फैसला उनका अपना स्वतंत्र निर्णय है। उन्होंने सिर्फ हमारे साथ जुड़ने की इच्छा जताई थी। हो सकता है कि अब उन पर कुछ दबाव हो। मुझे असल मुद्दे की जानकारी नहीं है। हम किसी को भी जबरदस्ती अपने साथ नहीं जोड़ सकते। हमारा कोई मतभेद नहीं था। पार्टी छोड़ने का फैसला लेने से पहले उन्होंने मुझसे इस बारे में बात नहीं की।”

इससे पहले पार्टी में शामिल होने के बाद निरंजन सिंह ने कहा था कि वे पारंपरिक पार्टियों और आम आदमी पार्टी से निराश हैं। उन्होंने तब कहा था, “मैं राजनेता नहीं हूं। मैं कोई चुनाव नहीं लड़ूंगा। मैंने चार मुद्दों पर पार्टी ज्वाइन की है, नशाखोरी, भ्रष्टाचार, कानून व्यवस्था और रोजगार।”

मई 2021 में रिटायर्ड हुए निरंजन सिंह ने जगदीश भोला ड्रग रैकेट मामले सहित कई हाई-प्रोफाइल ड्रग मामलों की जांच की थी, जिसमें करोड़ों का घोटाला भी शामिल था। जांच के दौरान उन्होंने पूर्व मंत्रियों बिक्रम सिंह मजीठिया और सरवन सिंह फिल्लौर सहित कई वरिष्ठ राजनेताओं से पूछताछ की थी।

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पंजाब के सबसे जाने-माने प्रवर्तन अधिकारियों में से एक ने ऐसा राजनीतिक कदम उठाया जिसने सब को चौंका दिया। जालंधर में प्रवर्तन निदेशालय के पूर्व डिप्टी डायरेक्टर निरंजन सिंह, अकाली दल (‘वारिस पंजाब दे’) में शामिल हो गए। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…