यूजीसी के नए नियमों पर सुप्रीम कोर्ट ने सुनवाई के दौरान रोक लगा दी है। इस फैसले का कई संगठनों ने स्वागत किया है, वहीं केंद्र सरकार के लिए इसे एक बड़े झटके के रूप में देखा जा रहा है। इसी कड़ी में जाने-माने शिक्षाविद् विकास दिव्यकीर्ति का एक बयान चर्चा का विषय बन गया है।
ANI से बातचीत में विकास दिव्यकीर्ति ने कहा कि कई बार चीजों को बढ़ा चढ़ाकर दिखाया जाता है, यहां भी कुछ वैसा ही हो रहा है। जितना डरने इस समय देखने को मिल रहा है, असल में उतना डरने की जरूरत है नहीं। मैं यह जरूर मानता हूं कि सरकार अगर कोई रेगुलेशन लेकर आ रही थी, उसे हड़बड़ी नहीं करनी चाहिए थी। लेकिन यह भी सच है कि सरकार को टाइम पूरा मिला था।
आरक्षण पर बोले विकास दिव्यकीर्ति
उन्होंने आगे कहा कि मैं खुद जनरल कैटेगरी से आता हूं, लेकिन सच्चाई यह है कि मैं आरक्षण का बड़ा समर्थक हूं। इसका यह मतलब नहीं है कि आरक्षण के नाम पर हर नीति का समर्थन कर दिया जाए। अगर किसी नीति में कोई खामी या समस्या होगी, तो मैं उसका विरोध भी करूंगा।
दिव्यकीर्ति ने इस बात पर भी जोर दिया कि यूजीसी 2026 के नियम किसी भी तरह से आपराधिक प्रकृति के नहीं हैं। उनका नेचर क्रिमिनल दिखाई नहीं देता है। यह सिर्फ विश्वविद्यालय के भीतर विवाद निपटाने की एक व्यवस्था तैयार की गई है। इसमें किसी भी प्रकार का आपराधिक पहलू जुड़ा हुआ नहीं है।
वैसे इस मामले में सुप्रीम कोर्ट ने भी तल्ख टिप्पणी की है। चीफ जस्टिस सूर्यकांत ने जोर देकर बोला है कि इन नियमों में संशोधन की जरूरत है, इस समय कुछ भी स्पष्ट नहीं हो रहा है और कोई भी इन नियमों का दुरुपयोग कर सकता है। सीजेआई सूर्यकांत ने आगे कहा कि इन नियमों को लेकर 4–5 गंभीर सवाल खड़े होते हैं। अगर इनका समाधान नहीं किया गया तो इसके बहुत व्यापक और दूरगामी परिणाम होंगे, जो बेहद खतरनाक प्रभाव डाल सकते हैं।
यूजीसी पर सुप्रीम सुनवाई
सीजेआई सूर्यकांत ने सुनवाई के दौरान एक कमेटी बनाने का सुझाव भी दिया। उन्होंने बोला कि हम इस मुद्दे पर सरकार की राय समझना चाहेंगे। आज हम कोई आदेश पारित नहीं करना चाहते। हमारी राय है कि एक समिति गठित होना चाहिए जिसमें प्रतिष्ठित विधिवेत्ता शामिल हों। दो-तीन ऐसे लोग होने चाहिए जो सामाजिक मूल्यों और समाज को प्रभावित करने वाली समस्याओं को समझते हों। अब इस बात पर भी विचार करने की जरूरत है कि यसमाज का समग्र विकास कैसे होगा और अगर इस तरह की व्यवस्था बनाई जाती है तो कैंपस के बाहर लोगों का कैसा रिएक्शन रहने वाला है। इन सभी पहलुओं पर समिति को गंभीरता से विचार करना चाहिए।
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