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हैदराबाद ब्लास्ट केस: दो दोषियों को मौत की सजा, एक को आजीवन कारावास

ये फैसला घटना के 11 साल बाद आया है। इस दोहरे बम ब्लास्ट में 42 लोगों की मौत हुई थी। स्पेशल एनआईए कोर्ट ने अनीक़ सईद और इस्माइल चौधरी को मौत की सजा सुनाई है जबकि तारीक़ अंजुम को आजीवन कारावास दिया गया है। अदालत ने 4 सितंबर को दिये अपने फैसले में इन तीनों को हैदराबाद ब्लास्ट का दोषी माना था।

हैदराबाद में धमाके के बाद घटनास्थल का मुआयना करता एक पुलिसकर्मी (फाइल फोटो)

शहर की एक मेट्रोपॉलिटन अदालत ने 2007 में हुए दोहरे बम विस्फोट के मामले में सोमवार को दो आतंकियों को मौत की सजा सुनायी। शहर में 25 अगस्त, 2007 को एक लोकप्रिय रेस्त्रां ‘गोकुल चाट’ और लुम्बिनी पार्क में स्थित एक ओपन एयर थियेटर में दो शक्तिशाली बम विस्फोट हुए थे जिनमें 44 लोग मारे गए थे और 68 घायल हुए थे। अदालत ने साथ ही एक दूसरे व्यक्ति तारिक अंजुम को नयी दिल्ली और दूसरी जगहों में कुछ गुनाहगारों को पनाह देने का दोषी ठहराया और उम्रकैद की सजा दी। हैदराबाद के चेरापल्ली केंद्रीय कारागार में गठित विशेष अदालत ने सजा की अवधि को लेकर अभियोजन और बचाव पक्ष की दलीलें सुनीं और अनीक शफीक सैयद और मोहम्मद अकबर इस्माइल चौधरी को मौत की सजा सुनायी।

द्वितीय अतिरिक्त मेट्रोपॉलिटन सत्र न्यायालय के न्यायाधीश (प्रभारी) टी श्रीनिवास राव ने चार सितंबर को 11 साल पुराने मामले में अनीक शफीक सैयद और मोहम्मद अकबर इस्माइल चौधरी को दोषी ठहराया था लेकिन पर्याप्त सबूत ना होने के कारण फारूक शरफुद्दीन तर्कश और मोहम्मद सादिक इसरार अहमद शैक को बरी कर दिया था। मामले की जांच करने वाली तेलंगाना पुलिस की काउंटर इंटेलीजेंस विंग का प्रतिनिधित्व करने वाले विशेष सरकारी अभियोजक सी एस रेड्डी ने कहा कि सैयद और चौधरी को आईपीसी की धारा 302 (हत्या) एवं दूसरी संबंधित धाराओं और आतंकवाद रोधी कानून – गैरकानूनी गतिविधि (रोकथाम) अधिनियम के तहत दोषी पाया गया था।

एक दूसरे सरकारी अभियोजक के सुरेंद्र ने कहा कि अनीक और चौधरी को गोकुल चाट एवं लुम्बिनी पार्क में विस्फोट करने का दोषी पाया गया था। उन्हें दिलसुख नगर इलाके में एक फुटओवर ब्रिज के नीचे बरामद हुए बम के मामले में भी दोषी पाया गया। अदालत ने दोनों पर अलग अलग मामलों में 10,000-10,000 रुपये का जुर्माना भी लगाया। पुलिस के आरोपपत्र में नामजद तीन और आतंकी – इंडियन मुजाहिदीन का संस्थापक रियाज भटकल, उसका भाई इकबाल और आमिर रजा खान फरार हैं। समझा जाता है कि कर्नाटक के रहने वाले भटकल भाइयों ने पाकिस्तान में शरण ली हुई है।


लोक अभियोजकों ने कहा कि सजा की अवधि को लेकर बहस के दौरान दोषियों ने बेगुनाह होने का दावा किया और कहा कि उन्हें मामले में गलत तरीके से फंसाया गया। लेकिन न्यायाधीश ने सजा कम करने के लिए दी गयी उनकी दलीलें खारिज कर दीं। दोषी किसी ऊपरी अदालत में सजा को चुनौती देने के लिए याचिका देने के लिए स्वतंत्र हैं। रेड्डी ने कहा कि अभियोजक अदालत के विस्तृत आदेश को पढ़ने के बाद इस बात का फैसला करेंगे कि दो आरोपियों को बरी किए जाने के खिलाफ याचिका दी जाए या नहीं। उन्होंने बताया कि अभियोजन पक्ष निर्णायक रूप से यह साबित नहीं कर पाया कि दोषी प्रतिबंधित संगठन इंडियन मुजाहिदीन के सदस्य थे। हालांकि अदालत ने अभियोजन पक्ष की इस दलील को माना कि उन्होंने एक समूह का गठन किया और आतंकी घटनाओं को अंजाम दिया।

राष्ट्रीय जांच एजेंसी (एनआईए) की एक विशेष अदालत ने फरवरी, 2013 में हुए हैदराबाद बम विस्फोट के मामले में दिसंबर, 2016 में इंडियन मुजाहिदीन के पांच कथित सदस्यों को मौत की सजा सुनायी थी। इन पांच लोगों में संगठन के सह संस्थापक यासिन भटकल और एक पाकिस्तान नागरिक शामिल थे। हमले में 18 लोगों की जान गयी थी।

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