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वैज्ञानिकों का दावा- ढूंढ निकाला हलाल मीट की पहचान करने का तरीका

इस्लाम के जानकारों के अनुसार, हलाल मूलरूप से एक अरबी शब्द है। इसका अर्थ वैध या फिर मान्य होता है।

तस्वीर का इस्तेमाल सिर्फ प्रस्तुतिकरण के लिए किया गया है। (फोटोः Freepik)

रेस्त्रां में परोसा जाने वाला या फिर सुपरमार्केट्स में मिलने वाला मांस क्या वाकई में हलाल किया हुआ मीट होता है? पहली बार इस सवाल का जवाब वैज्ञानिकों की ओर से दिया गया है। हैदराबाद में नेशनल रिसर्च सेंटर ऑन मीट (एनआरसीएम) के वैज्ञानिकों का दावा है कि उन्होंने हलाल मीट की पहचान का तरीका ढूंढ निकाला है। उन्होंने इसके लिए खास तौर पर एक लैब टेस्ट तैयार किया है। वह उसकी मदद से पता लगा सकते हैं कि मीट का टुकड़ा इस्लामिक खाने-पीने के नियम-कानून के मुताबिक हासिल किया गया है या नहीं।

एनआरसीएम के वैज्ञानिकों ने यह टेस्ट पहले भेड़ पर हलाल प्रक्रिया के जरिए किया, जिसके बाद उन्होंने मीट के उस हिस्से की तुलना इलेक्ट्रिक स्टनिंग (बिजली की मदद से) के जरिए निकाले गए भेड़ के मांस से की। वैज्ञानिकों ने मीट के दोनों टुकड़ों में मॉलीक्यूल (अणु) के स्तर पर विभिन्नताएं पाईं। हलाल प्रक्रिया से निकाले गए मीट के टुकड़े में प्रोटीन वाले भाग पर असर पड़ा, जबकि इलेक्ट्रिक स्टनिंग वाले टुकड़े में वह कुछ अलग सा नजर आया। मीट के टुकड़ों में इन्हीं बदलावों के आधार पर वैज्ञानिकों ने दावा किया कि मीट हलाल है या नहीं? वह यह बताने में सक्षम हैं।

मीट के टुकड़ों में अंतर पता लगाने के लिए वैज्ञानिकों ने टेस्ट के दौरान भेड़ के मीट के भीतर खून में आए बायोकेमिकल पैरामीटर्स और प्रोटीन स्ट्रक्चर (प्रोटियोमिक प्रोफाइल) की जांच भी की। दोनों प्रकार के मीट में मसल प्रोटीन के बीच का अंतर मालूम करने के लिए वैज्ञानिकों ने ‘डिफरेंस जेल इलेक्ट्रोफोरेसिस’ तरीका अपनाया। इन दोनों ही तरीकों में तकरीबन 46 प्रोटीन प्रभावित हुए। वैज्ञानिकों की मानें तो पशुओं के मानसिक तनाव से भी पता लगाया जा सकता है कि उनका मीट हलाल किया हुआ है या फिर नहीं। साथ ही उनका दावा है कि हलाल मीट की पहचान करने वाला टेस्ट विश्व में सिर्फ उन्होंने ही किया है।

क्या होता है हलाल?: इस्लाम के जानकारों के मुताबिक, यह अरबी शब्द है। इसका मतलब वैध या मान्य होता है। खान-पान के मामले में हलाल चीजें वे होती हैं, जो इस्लाम में मान्य होती हैं। मुस्लिमों के पवित्र धर्म ग्रंथ कुरान में भी हलाल का जिक्र मिलता है। इस्लामिक विधि के मुताबिक, मीट के लिए पशुओं के गले की नस धारदार हथियार से रेती जाती है। ऐसा माना जाता है कि हलाल करने से उनके शरीर का खून और उसमें मौजूद कीटाणू उस दौरान पूरी तरह बाहर निकल जाते हैं।

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