हिरासत में हर आरोपी की हिफाजत करना पुलिस का धर्म, हैदराबाद एनकाउंटर पर फिर बोले रिटायर्ड जज

पूर्व जज ने कहा कि मेरे हिसाब से मामले बढ़ नहीं रहे हैं बल्कि ज्यादा उजागर हो रहे हैं जो अच्छी बात है। मामले जितने उजागर होंगे, जनता में उतनी ही जागरूकता आएगी।

Author 1246343 , 1246209 | December 8, 2019 4:38 PM
hyderabadवो जगह जहां पुलिस ने सभी चार आरोपियों को एनकाउंटर में गोली मार दी थी। (फोटो: पीटीआई)

हैदराबाद में महिला वेटरनरी डॉक्टर के साथ गैंगरेप के आरोपियों के एनकाउंटर पर दिल्ली उच्च न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीश न्यायमूर्ति आरएस सोढी ने सवाल उठाए हैं। उनका कहना है कि किसी भी मामले में आरोपियों की सुरक्षा करना पुलिस का धर्म होता है।

अदालत ने चार आरोपियों को पुलिस की हिरासत में भेजा था, तो उनकी हिफाजत करना, उनकी देखभाल करना पुलिस का धर्म है। यह कह देना कि वे भाग रहे थे। वे भाग कैसे सकते हैं? आप 15 हैं और वे चार हैं। आपने कहा कि उन्होंने पत्थर फेंके तो आप 15 आदमी थे, क्या आप उन्हें पकड़ नहीं सकते थे? यह कहानी मुझे जंचती नहीं है। यह हिरासत में की गई हत्या है।

पूर्व जस्टिस ने सवाल उठाया कि यह किसने कह दिया कि आरोपियों ने बलात्कार किया था? यह तो पुलिस कह रही है और आरोपियों ने यह पुलिस के सामने ही कहा। पुलिस की हिरासत में किसी से भी, कोई भी जुर्म कबूल कराया जा सकता है। अभी तो यह साबित नहीं हुआ था कि उन्होंने बलात्कार किया था। वे सभी कम उम्र के थे। वे भी किसी के बच्चे थे। आपने उनकी जांच कर ली, मुकदमा चला लिया और मार भी दिया।

पूर्व जस्टिस आरएस सोढी ने कहा कि पुलिस अदालती कार्यवाही को अपने हाथ में ले ले तो उसका कदम कभी जायज नहीं हो सकता है। अगर पुलिस कानून के खिलाफ जाएगी तो वह भी वैसी ही मुल्जिम है जैसे वे मुल्जिम हैं। उसका काम सिर्फ जांच करना है और जांच में मिले तथ्यों को अदालत के सामने रखना है।

इसमें प्रतिवादी को भी बता दिया जाता है कि आपके खिलाफ ये आरोप हैं और आपको अपनी सफाई में कुछ कहना है तो कह दें। अगर प्रतिवादी को अपनी बेगुनाही साबित करने का मौका नहीं दिया जाएगा और गोली मार दी जाएगी … हो सकता है कि किसी और मुल्क में ऐसा इंसाफ होता हो, लेकिन हमारे संविधान के मुताबिक यह इंसाफ नहीं है।

पुलिस की कार्यशैली पर सवाल खड़े करते हुए पूर्व जज ने कहा कि मुठभेड़ के बाद पुलिस पर शक का नजरिया आज तक इसलिए नहीं बदला क्योंकि पुलिस नहीं बदली। उच्चतम न्यायालय के दिशा-निर्देश हैं कि बिलकुल स्वतंत्र जांच होनी चाहिए। इसके बाद जो भी तथ्य आएंगे उसके तहत आगे कार्रवाई की जा सकती है।

पूर्व जज ने कहा कि कानून कितने चाहे बना लें, जब तक इसको लागू ठीक से नहीं किया जाएगा तब तक कुछ नहीं होगा। जांच और दोषसिद्धि की प्रक्रिया तथा सजा को लागू करने में जब तक तेजी नहीं लाई जाएगी, तब तक किसी के मन में कानून का खौफ ही नहीं होगा। कानून भी खौफ के साथ ही चलता है।

मेरे हिसाब से मामले बढ़ नहीं रहे हैं बल्कि ज्यादा उजागर हो रहे हैं जो अच्छी बात है। मामले जितने उजागर होंगे, जनता में उतनी ही जागरूकता आएगी। जब किसी लड़की को सड़क पर छेड़ा जाता है तो लोग उसे बचाते नहीं, बल्कि उसका फोटा या वीडियो बनाने को तैयार हो जाते हैं। ऐसे मामलों को रोकने के लिए लोगों की भागीदारी भी होनी चाहिए। हर इंसान को निजी तौर पर जिम्मेदार होना होगा।

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