West Bengal Politics: पश्चिम बंगाल की राजनीति में इस वक्त टीएमसी से निष्कासित विधायक काफी चर्चा में है। अलग पार्टी बनाने से लेकर असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी AIMIM से गठबंधन के चलते हुमायूं कबीर लाइमलाइट में रहे हैं। अब उन्होंने मुर्शिदाबाद की एक जनसभा के दौरान अपने पुराने बयानों पर खेद जताते हुए माफी भी मांगी है।
मुर्शिदाबाद की रैली में अपने पुराने बयानों के लिए माफी मांगने के साथ ही हुमायूं कबीर ने विशेष रूप से 1 मई 2024 को दिए गए उस भाषण का जिक्र किया, जिसमें उन्होंने भाजपा नेताओं को ‘भागीरथी नदी में फेंकने’ की बात कही थी।
सीएम योगी के लिए क्या था?
दरअसल, हुमायूं कबीर ने विवादित बयान देते हुए भाजपा और उत्तर प्रदेश के सीएम योगी आदित्यनाथ को चुनौती दी थी। उन्होंने कहा था, “योगी आदित्यनाथ, यह उत्तर प्रदेश नहीं, मुर्शिदाबाद है। हम यहां बांटने की राजनीति में विश्वास नहीं करते। लेकिन अगर आप यहां खड़े होकर हमें धमकाते रहेंगे, तो भाजपा नेताओं को भागीरथी नदी में फेंक दिया जाएगा।”
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हिंदू समुदाय से हुमायूं कबीर ने मांगी माफी
अपने तीखे तेवरों के लिए चर्चा में रहने वाले हुमायूं कबीर ने कहा, “मुख्यमंत्री ममता बनर्जी की बातों को ध्यान में रखते हुए, अगर मैंने अपने हिंदू भाइयों की भावनाओं को ठेस पहुंचाई है, तो मैं इसके लिए ईमानदारी से माफी मांगता हूं।”
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63 वर्षीय हुमायूं कबीर ने अपने 42 साल के राजनीतिक करियर का जिक्र करते हुए कहा कि उन्होंने कभी भी सांप्रदायिक द्वेष नहीं फैलाया। उन्होंने स्पष्ट किया कि उनके बयान जानबूझकर किसी को दुख पहुंचाने के लिए नहीं थे।
पुरानी घटनाओं का किया जिक्र
अपनी सेक्युलर छवि बनाने की कोशिश में हुमायूं कबीर ने मुर्शिदाबाद के पूर्व एसपी देवास की हत्या के समय का उदाहरण दिया, जहां उन्होंने स्थिति को संभालने में मदद की थी।
बाबरी मस्जिद के चलते चर्चा में हुमायूं कबीर?
बता दें कि तृणमूल कांग्रेस से निष्कासित विधायक हुमायूं कबीर ने दिसंबर 2025 में पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद में ‘बाबरी मस्जिद’ के नाम पर एक मस्जिद की नींव रखी, जो विवाद का विषय बन गया। उन्होंने 6 दिसंबर 1992 (बाबरी विध्वंस दिवस) को याद करते हुए यह प्रतीकात्मक पहल की थी। इसके साथ ही उन्होंने नई पार्टी भी बना ली है। उन्होंने कहा है कि वे बंगाल विधानसभा चुनाव में 125 से ज्यादा सीटों पर अपने प्रत्याशी उतारेंगे। ममता बनर्जी का वोट बैंक खिसकेगा? मुस्लिम नेता बना रहे अलग चुनावी फ्रंट
