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UP BJP में भारी वैकेंसी, विधानसभा चुनाव से पहले भर्ती शुरू

भाजपा अपनी पूर्व सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को भी फिर से अपने खेमे में ला सकती है लेकिन इसके नेता ओमप्रकाश राजभर ने इस तरह की संभावना को खारिज किया है।

Edited By सचिन शेखर नई दिल्ली | June 14, 2021 9:26 AM
अमित शाह, योगी आदित्य नाथ और पीएम नरेंद्र मोदी (फोटो सोर्स- इंडियन एक्सप्रेस)

उत्तर प्रदेश में अगले साल होने वाले विधानसभा चुनाव के मद्देनजर भाजपा ने एक बार फिर से मजबूत सामाजिक समीकरण तय करने के प्रयास शुरू कर दिए हैं। विभिन्न जातिगत आधार वाले छोटे दलों के साथ बीजेपी की हाथ मिलाने की कोशिश उसकी उसी रणनीति का हिस्सा है जिसने उसे 2017 के विधानसभा चुनाव और 2019 के लोकसभा चुनाव में जीत दिलाई थी।

पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह की अपना दल (एस) और निषाद पार्टी के नेताओं के साथ मुलाकात तथा कांग्रेस के वरिष्ठ नेता जितिन प्रसाद के भाजपा में शामिल होने से सत्तारूढ़ दल अपने अंकगणित को मजबूत करने की कोशिश करता प्रतीत होता है।अपना दल (एस) और निषाद पार्टी भाजपा की सहयोगी रही हैं लेकिन सरकार में प्रतिनिधित्व के मुद्दे पर वे नाराज चल रही थीं। प्रसाद उत्तर प्रदेश के एक जाने-माने ब्राह्मण परिवार से ताल्लुक रखते हैं और वह तीन पीढ़ियों से कांग्रेस के साथ थे। भाजपा को लगता है कि युवा नेता के उसके खेमे में आने से योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व वाली राज्य सरकार से नाराज बताए जा रहे राजनीतिक रूप से प्रभावी ब्राह्मण समुदाय को साधने में मदद मिलेगी।

अपना दल की अनुप्रिया पटेल ने शाह से अपनी मुलाकात को लेकर कुछ नहीं कहा है, वहीं निषाद पार्टी के संजय निषाद ने कहा कि उनकी पार्टी वंचित तबकों की आकांक्षाओं को ‘‘पूरा’’ करने के लिए राज्य सरकार में प्रतिनिधित्व चाहती है। उन्होंने विभिन्न समुदायों से संबंधित मुद्दों के समाधान की आवश्यकता पर जोर देते हुए पीटीआई-भाषा से कहा, ‘‘राजनीतिक शक्ति भगवान की शक्ति से ज्यादा मजबूत होती है।’’

संजय निषाद ने भाजपा को अपने संदेश में कहा कि उनके समुदाय ने विगत में बसपा, सपा और कांग्रेस जैसे दलों का समर्थन किया, लेकिन अपनी समस्याओं का समाधान न होने पर समुदाय ने इन दलों को वोट देना बंद कर दिया। उन्होंने जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाए जाने का जिक्र करते हुए कहा, ‘‘हमें लगता है कि मोदी सरकार महत्वपूर्ण राष्ट्रीय मुद्दों को लेकर व्यस्त रही। अब हमें लगता है कि हमारी चिंताओं का समाधान होगा।’’

ऐसी भी खबरें हैं कि भाजपा अपनी पूर्व सहयोगी सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को भी फिर से अपने खेमे में ला सकती है लेकिन इसके नेता ओमप्रकाश राजभर ने इस तरह की संभावना को खारिज किया है। भाजपा सूत्रों ने कहा कि उनकी पार्टी ने विभिन्न समुदायों को उचित प्रतिनिधित्व देने के लिए काम किया है और वह छोटे दलों के साथ गठबंधन करने के विरोध में कभी नहीं रही है।

इस तरह की अटकलें तेज हैं कि योगी आदित्यनाथ राज्य मंत्रिमंडल का विस्तार कर सकते हैं और सहयोगी दलों के नेताओं के साथ शाह की बैठकों को इसी कवायद का हिस्सा माना जा रहा है। अगले साल के शुरू में पांच राज्यों में होने वाले विधानसभा चुनाव में भाजपा का बहुत कुछ दांव पर लगा है क्योंकि इनमें से चार-उत्तराखंड, गोवा, मणिपुर और सबसे महत्वपूर्ण उत्तर प्रदेश में इसकी सरकारें हैं।

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