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इलाहाबाद और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वीसी के खिलाफ जांच चाहता है HRD मंत्रालय, राष्ट्रपति को भेजा प्रस्ताव

शाह और हंगलू छठे और सातवें कुलपति हैं जो एनडीए सरकार के निशाने पर आए हैं। स्मृति ईरानी इससे पहले विश्व भारती विश्वविद्यालय, पांडिचेरी यूनिवर्सिटी के वीसी को इसी तरह के आरोपों पर हटा चुकी हैं.

Aligarh Muslim University, Allahabad University, Vice Chancellor, President, irregularity, Pranab Mukherjee, to probe, Prakash Javadekar, HRD,केन्द्रीय मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर (फाइल फोटो)

मानव संसाधन विकास मंत्री प्रकाश जावड़ेकर ने इलाहाबाद और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के कुलपतियों के खिलाफ जांच कराने का फैसला किया है। इसके लिए मंत्रालय ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी से निर्देश देने का अनुरोध किया है। मंत्रालय को अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वीसी जमीरुद्दीन शाह और इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के वीसी आर एल हंगलू के खिलाफ वित्तीय, प्रशासनिक और अकादमिक अनियमितताओं की शिकायत मिली थी। इसके बाद मंत्रालय ने दोनों कुलपतियों के खिलाफ जांच कराने की मंजूरी के लिए राष्ट्रपति भवन को प्रपोजल भेजा है। शाह की नियुक्ति मई 2012 में पिछली यूपीए सरकार ने की थी जबकि हंगलू की नियुक्ति पूर्व मानव संसाधन विकास मंत्री स्मृति ईरानी के कार्यकाल में हुई थी। अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वीसी यूनिवर्सिटी के अल्पसंख्यक दर्जा हटाने की सरकार के हलफनामे का विरोध करने के बाद से ही निशाने पर हैं।

सूत्रों के मुताबिक, मंत्रालय ने दोनों कुलपतियों के खिलाफ कई अनियमितताएं पाई हैं। इसके बाद दोनों के खिलाफ जांच कराने का फैसला लिया गया। इलाहाबाद यूनिवर्सिटी के वीसी आर एल हंगलू पर ओएसडी और स्पोर्ट्स ट्रेनर की नियुक्ति में धांधली के अलावा अपनी सुरक्षा पर हर महीने 10 लाख रुपये खर्च करने और वीसी क्वार्टर की मरम्मति पर 70 लाख रुपये खर्च करने के आरोप हैं। उन पर यूनिवर्सिटी के एंट्रेंस एग्जाम में कुव्यवस्था, शैक्षणिक अनियमितता और यूनिवर्सिटी में लैंगिक असुरक्षा समेत यूनिवर्सिटी का माहौल बिगाड़ने के भी आरोप हैं।

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अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के वीसी पर भी प्रोफेसर और एसोसिएट प्रोफेसर की जगह असिस्टेन्ट प्रोफेसर को बहाल करने, यूनिवर्सिटी स्टूडेन्ट्स से जमा किए गए फंड को सर सैय्यद एजुकेशनल फाउंडेशन नाम के एक प्राइवेट ट्रस्ट को ट्रांसफर करने और कैम्पस में कानून-व्यवस्था को ध्वस्त करने के आरोप हैं। इसके अलावा शाह पर अपनी शक्तियों का दुरुपयोग कर एक रिटायर्ड ब्रिगेडियर को नियुक्त करने का भी आरोप है।

जब इंडियन एक्सप्रेस ने राष्ट्रपति प्रणब मुखर्जी के प्रेस सचिव वेणु राजमणि से इस बारे में पूछा तो उन्होंने इस पर टिप्पणी करने से इनकार कर दिया, जबकि हंगलू ने इंडियन एक्सप्रेस को बताया, “मैंने उच्च शिक्षा सचिव से बात की है। ऐसा कुछ नहीं है।” एएमयू के वीसी से संपर्क नहीं हो सका है। अगर राष्ट्रपति भवन से मंत्रालय को मंजूरी मिल जाती है तो मंत्रालय दोनों ही कुलपतियों को कारण बताओ नोटिस जारी कर सकता है और उन पर लगे आरोपों की जांच के लिए कमेटी का गठन कर सकता है। शाह और हंगलू छठे और सातवें कुलपति हैं जो एनडीए सरकार के निशाने पर आए हैं। स्मृति ईरानी इससे पहले विश्व भारती विश्वविद्यालय, पांडिचेरी यूनिवर्सिटी के वीसी को इसी तरह के आरोपों पर हटा चुकी हैं और इग्नू, डीयू और जामिया मिलिया इस्लामिया के वीसी के खिलाफ जांच शुरू किया जा चुका है।

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