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केंद्रीय योजना में भ्रष्टाचार पर HRD ने उठाए सवाल, 2 करोड़ रुपये के फंड दुरुपयोग का आरोप, हाथ से बना दिए गए 1.2 करोड़ रुपये के टैक्सी के बिल

मंत्रालय और टिस्स के बीच जुलाई में एक बैठक हुई थी। बैठक में टिस्स ने निदेशक ने धन के इस्तेमाल में कुछ "गंभीर अनियमितताओं" की ओर इशारा किया।

Corruption, news,प्रतीकात्मक तस्वीर। (Illustration by C R Sasikumar)

मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने केंद्रीय योजना में भ्रष्टाचार पर सवाल उठाए हैं। दो करोड़ रुपये के फंड दुरुपयोग करने का आरोप है। आरोप में कहा गया है कि 1.2 करोड़ रुपये के टैक्सी के बिल हाथ से बना दिए गए हैं। इस गड़बड़ी का पता ऑडिट के दौरान चला है। मंत्रालय मामले को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय पहुंचा है।

मंत्रालय ने एक पूर्व-संयुक्त सचिव और टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (TISS) के एक प्रोफेसर द्वारा राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान (RUSA) के कार्यान्वयन में कथित भ्रष्टाचार को लेकर प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) से संपर्क किया है। राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान राज्यों के लिए उच्च शिक्षा योजना है।

टिस्स ने पिछले साल एक ऑडिट किया था। ऑडिट रिपोर्ट से खुलासा हुआ कि भारत और विदेश में इशिता रॉय और उनके बच्चों की व्यक्तिगत यात्राओं पर कथित तौर पर रुसा फंड से 23 लाख रुपये खर्च किए गए थे। केरल कैडर के 1991 बैच की आईएएस अधिकारी रॉय मानव संसाधन विकास मंत्रालय में संयुक्त सचिव के रूप में रूसा के राष्ट्रीय मिशन की निदेशक थीं। उसने सात महीने पहले मंत्रालय छोड़ दिया और वर्तमान में केरल में प्रमुख सचिव (मत्स्य विभाग) के रूप में तैनात है।

ऑडिट में यह भी पता चला कि रूसा के राष्ट्रीय समन्वयक बी वेंकटेश कुमार ने कथित रूप से 2.02 करोड़ रुपये का गबन किया। उन्होंने कुछ खर्चों को सही ठहराने के लिए 1.26 करोड़ रुपये के हाथ से लिखे टैक्सी बिल जमा किए थे।

कुमार टिस्स में सेंटर फॉर पब्लिक पॉलिसी एंड गवर्नेंस, स्कूल ऑफ मैनेजमेंट एंड लेबर स्टडीज के अध्यक्ष हैं। उन्हें 27 जुलाई, 2019 को रूसा कोऑर्डिनेटर के प्रभार से मुक्त कर दिया गया था। संस्थान ने उनके ऊपर अगस्त 2019 में कारण बताओ नोटिस भी जारी किया था। इसके तुरंत बाद यूजीसी में एक पूर्व संयुक्त सचिव सुनीता सिवाच को योजना के नए कोऑर्डिनेटर के रूप में नियुक्त की गईं थी।

एचआरडी मंत्रालय ने पिछले साल सितंबर में इस मामले से पीएमओ को अवगत कराया है। रॉय के खिलाफ मंत्रालय द्वारा प्रारंभिक जांच और कुमार के खिलाफ टिस्स की जांच में चल रही है। इस मामले पर टिस्स के रजिस्ट्रार पी बालामुरुगन ने किसी तरह की प्रतिक्रिया नहीं दी। रॉय और कुमार ने इंडियन एक्सप्रेस के फो कॉल और ईमेल का जवाब नहीं दिया।

रूसा अक्टूबर 2013 में शुरू की गई केंद्र सरकार की एक योजना है, जिसका उद्देश्य राज्यों में उच्च शिक्षा में सुधार करना है। यह योजना राज्य विश्वविद्यालयों और कॉलेजों को “इक्विटी, एक्सेस और एक्सिलेंश के लक्ष्यों को प्राप्त करने” के लिए मिशन मोड में संचालित की जा रही है। 2016-17 के बाद से सरकार ने रूसा पर हर साल औसतन 1,500 करोड़ रुपये खर्च किए हैं।

टिस्स नवंबर 2013 से इस योजना की कार्यान्वयन एजेंसी है और संस्थान के साथ सरकार के समझौता के अनुसार खर्च करेगी और उसके वापस लेने (रिइंबर्समेंट) के लिए मानव संसाधन विकास मंत्रालय के पास दावे को जमा करेगी। कुमार को नवंबर 2013 में रूसा के राष्ट्रीय समन्वयक के रूप में नियुक्त किया गया था। रूसा के क्रियान्वयन में भ्रष्टाचार के कथित आरोप का पिछले साल जुलाई में ही पता चला था। उस समय रॉय ने मानव संसाधन विकास मंत्रालय में अपना कार्यकाल पूरा कर लिया था।

मंत्रालय और टिस्स के बीच जुलाई में एक बैठक हुई थी। बैठक में टिस्स ने निदेशक ने धन के इस्तेमाल में कुछ “गंभीर अनियमितताओं” की ओर इशारा किया। बैठक के बाद, टिस्स को मंत्रालय द्वारा रूसा के तहत जारी किए गए फंड का पूरा ऑडिट करने के लिए कहा गया।

टिस्स ने पाया कि नेशनल कॉर्डिनेटर कुमार परियोजना खर्च को पूरा करने के लिए देश और विदेश में सम्मेलनों और सेमिनारों के आयोजन करते रहे हैं। साथ ही विभिन्न उद्देश्यों के लिए समय-समय पर अग्रिम बैठकें करते रहे हैं। ऑडिट में पाया गया उनके कार्यकाल के दौरान उन्होंने कथित तौर पर दिल्ली और विदेशों में रहने के लिए जो अग्रिम राशि दी थी, उसे सही ठहराने के लिए 2.02 करोड़ रुपये के संदिग्ध बिल जमा किए थे।

उदाहरण के तौर पर 1.2 करोड़ रुपये के हाथ से लिखे टैक्सी के बिल, सैन फ्रांसिसको से पेंसिल्वेनिया के दो दिनो की यात्रा के लिए 1.6 लाख रुपये के बिल जमा किए गए। ऑडिट में यह दावा संदिग्ध पाया गया क्योंकि यात्री की दूरी करीब 10,000 किलोमीटर थी। इसके अलावा उड़ानें एक ही यात्रा के लिए उपलब्ध थीं। कुमार द्वारा दावा किए गए कुछ अन्य खर्च कथित रूप से उनकी विदेश यात्रा की तारीखों से मेल खाते नहीं दिखें।

सितंबर 2019 में टिस्स ने मंत्रालय को कुमार द्वारा किए गए दावों के हिस्से के रूप में रॉय और उसके दो बच्चों के नाम पर 23 लाख रुपये के बिलों के बारे में जानकारी दी गई। कथित तौर पर बिल काम से छुट्टी के दौरान भारत और विदेश में रॉय की निजी यात्राओं पर खर्च किए गए पैसों के थे। ऑडिट के बारे में जानकारी देने के बाद कुमार ने अगस्त और सितंबर 2019 में चेक के माध्यम से कुल 2.02 करोड़ रुपये में से 51 लाख रुपये वापस कर दिए थे।

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