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ह्यूस्‍टन में बोले मोदी- भारत में सब अच्‍छा है, पर यहां की सच्‍चाई तो ये भी है

कहा जा रहा है कि जब आर्थिक मोर्चे पर लगातार देश झटके झेल रहा है तब पीएम ने तथ्यों की अनदेखी करते हुए कैसे विश्व बिरादरी के सामने कह दिया कि ऑल इज वेल?

Author नई दिल्ली | Updated: September 26, 2019 4:16 PM
इतनी बुरी खबरों के बावजूद मोदी ने ह्यूस्‍टन में 8 भाषाओं में कहा- भारत में सब ठीक है

अमेरिकी शहर ह्यूस्टन में आयोजित ‘हाउडी मोदी’ कार्यक्रम में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी-भारतीय समुदाय के करीब 50,000 लोगों को संबोधित करते हुए कहा था कि भारत में सब कुछ ठीक है। पीएम ने अपनी बात पर जोर देते हुए उसे आठ अलग-अलग भारतीय भाषाओं में कहा। हालांकि, पीएम के इस डायलॉग पर विवाद खड़े हो रहे हैं। कहा जा रहा है कि जब आर्थिक मोर्चे पर लगातार देश झटके झेल रहा है तब पीएम ने तथ्यों की अनदेखी करते हुए कैसे विश्व बिरादरी के सामने कह दिया कि ऑल इज वेल?

6 सालों में सबसे नीचे जीडीपी: देश की आर्थिक वृद्धि दर मौजूदा वित्त वर्ष (2019-20) की पहली तिमाही में गिरकर 5 फीसदी पर आ गई है जो 6 साल में इसका सबसे निचला स्‍तर है। पिछले साल इसी दौरान यह आठ फीसदी थी।

मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में गिरावट: पिछले साल 2018-19 की पहली तिमाही में 12.10 फीसदी थी मैन्यूफैक्चरिंग सेक्टर में उत्पादन दर दो मौजूदा वर्ष (2019-20) की पहली तिमाही में गिरकर 0.6 फीसदी रह गई है।

कृषि क्षेत्र में विकास दर गिरी: कृषि क्षेत्र में विकास दर 5.1 फीसदी थी जो 2019-20 की पहली तिमाही में गिरकर 2 फीसदी पर आ गई है।

निवेशकों के डूबे 14 लाख करोड़: मोदी-2.0 के 100 दिनों के कार्यकाल में पिछले तीन महीनों में शेयर बाजार में निवेशकों के 14 लाख करोड़ रुपये डूब गए हैं। हालांकि, निवेशकों का भरोसा बढ़ाने के लिए सरकार ने कई कदम उठाए हैं, बावजूद इसके अव निवेशक पैसा लगाने से कतरा रहे हैं।

मिड-डे-मील में नमक रोटी: पिछले दिनों बीजेपी शासित राज्य उत्तर प्रदेश के मिर्जापुर जिले के एक स्कूल में मिड-डे-मील के तहत बच्चों को नमक-रोटी दिया गया। बच्चों के अभिभावकों का आरोप है कि यह सिलसिला करीब साल भर से चल रहा था।

ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत 103वें पायदान पर खिसका: ग्लोबल हंगर इंडेक्स में भारत लगातार पिछड़ता जा रहा है। 2018 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत का स्थान खिसक कर 103वें स्थान पर चला गया है, जबकि 119 देशों के इंडेक्स में 2017 में भारत 100वें नंबर पर था।

डॉलर के मुकाबले रुपया सबसे कमजोर: 2019 में डॉलर के मुकाबले रुपया सबसे कमजोर होकर 72 के आंकड़े पर पहुंच गया है। इससे पहले पिछले साल अक्टूबर 2018 में रुपया लुढ़ककर 74 के सबसे निम्नतम स्तर के आंकड़े तक जा चुका है।

बैंक फ्रॉड के 2480 मामले, 32,000 करोड़ की चपत: मौजूदा वित्तीय वर्ष की पहली तिमाही में पब्लिक सेक्टर के कुल 18 बैंकों में धोखाधड़ी के कुल 2480 मामले उजागर हुए हैं। इनकी वजह से 32,000 करोड़ रुपये की चपत बैंकों को लग चुकी है।

45 सालों में सबसे ज्यादा बेरोजगारी: देश में बेरोजगारी का आंकड़ा चरम पर है। पिछले 45 सालों का आंकड़ा टूट चुका है। सरकारी आंकड़ों के अनुसार वित्त वर्ष 2017-18 के दौरान देश में बेरोजगारी की दर 6.1 फीसदी रही जो 45 सालों में उच्चतम है। इसका आलम हरियाणा में पिछले दिनों दिखा जब क्लर्क के 4800 पदों के लिए करीब 15 लाख लोगों ने आवेदन दिए और जब परीक्षा देने पहुंचे तो सब जगह अफरा-तफरी मच गई।

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