पश्चिम बंगाल की पूर्व सीएम ममता बनर्जी की पार्टी टीएमसी में चल रहा राजनीतिक संकट संसद के संख्या बल को बदल सकता है। जो एनडीए की स्थिति को और मजबूत कर सकता है। इसका असर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की सरकार के विधायी एजेंडे पर दिखेगा। इसमें आगामी मानसून सत्र में विवादास्पद परिसीमन (डिलिमिटेशन) विधेयक को फिर से आगे बढ़ाने की योजना भी शामिल है।

बागी नेताओं का दावा है कि उन्हें टीएमसी के 28 लोकसभा सांसदों में से 20 का समर्थन प्राप्त है। वहीं, इस साल की शुरुआत में आम आदमी पार्टी (AAP) के सात राज्यसभा सांसद पहले ही भाजपा में शामिल हो चुके हैं। इसके अलावा, मौजूदा राजनीतिक उथल-पुथल के बीच टीएमसी के तीन और राज्यसभा सदस्यों ने भी इस्तीफा दे दिया है।

इन घटनाक्रमों के कारण विपक्ष की संसदीय ताकत में बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है। इसे 2022 में शिवसेना और 2023 में राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एनसीपी) में हुई टूट के बाद सबसे बड़ा राजनीतिक पुनर्गठन माना जा रहा है।

यह सब ऐसे समय में हो रहा है जब विपक्ष पहले से ही कमजोर स्थिति में है। तमिलनाडु विधानसभा चुनावों के बाद कांग्रेस ने अभिनेता-राजनेता विजय की पार्टी तमिलगा वेत्री कझगम (टीवीके) के साथ गठबंधन कर लिया, जिसके कारण कांग्रेस और डीएमके का गठबंधन टूट गया। इससे विपक्ष की एकजुटता को और झटका लगा है।

वर्तमान में 543 सदस्यीय लोकसभा में एनडीए को लगभग 293 सांसदों का समर्थन प्राप्त है। बागी टीएमसी नेताओं का दावा है कि पार्टी के 28 में से 20 लोकसभा सांसद उनके साथ हैं और उन्होंने सरकार को समर्थन देने की इच्छा जताई है। यदि ये आंकड़े सही साबित होते हैं तो सरकार का प्रभावी समर्थन आधार 293 से बढ़कर 313 सांसद हो जाएगा।

इस बदलाव का महत्व तब और स्पष्ट होता है जब इसे परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन पर अप्रैल में हुए मतदान के संदर्भ में देखा जाए। सभी एनडीए सहयोगियों और कई गैर-गठबंधन दलों का समर्थन मिलने के बावजूद सरकार केवल 298 वोट ही जुटा सकी थी और विधेयक पारित नहीं करा पाई थी।

सैद्धांतिक रूप से 20 टीएमसी सांसदों के जुड़ने से सरकार का समर्थन आधार 298 से बढ़कर 318 वोट हो जाएगा, जिससे पहले की तुलना में उसकी स्थिति काफी मजबूत हो जाएगी।

इसमें और महत्वपूर्ण जोड़ने वाली बात टीएमसी संकट का समय है। यह ऐसे वक्त आया है जब विपक्ष की संसदीय संरचना पहले से ही दबाव में है। कांग्रेस द्वारा तमिलनाडु में TVK के साथ जाने के निर्णय के बाद कांग्रेस-डीएमके गठबंधन टूट चुका है।

यह विभाजन INDIA गठबंधन के सबसे मजबूत स्तंभों में से एक को कमजोर करता है और विशेष विधायी मुद्दों पर डीएमके तथा सरकार के बीच मुद्दा-आधारित सहयोग की संभावना खोलता है। डीएमके के पास लोकसभा में 22 सांसद हैं।

यदि डीएमके परिसीमन से जुड़े संवैधानिक संशोधन का समर्थन करती है, तो सरकार का संभावित समर्थन आधार 313 से बढ़कर 335 सांसदों तक पहुंच सकता है। यह मौजूदा लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत से केवल 25 सीट कम होगा।

संख्याओं का खेल

पूरी 543 सदस्यीय लोकसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 362 है। हालांकि वर्तमान में तीन सीटें रिक्त हैं- पश्चिम बंगाल की बशीरहाट, मेघालय की शिलांग और असम की नवगांव, जिससे सदन की प्रभावी संख्या 540 रह जाती है। इसके अनुसार प्रभावी दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 360 हो जाता है।

हालांकि, 335 का आंकड़ा भी संवैधानिक संशोधन पारित होने की गारंटी नहीं देगा, लेकिन यह सरकार को आवश्यक संख्या के काफी करीब पहुंचा देगा और भाजपा नेतृत्व को सदन में मतदान के दिन रणनीतिक प्रबंधन के लिए कहीं अधिक मजबूत स्थिति प्रदान करेगा।

व्यावहारिक रूप से सरकार को अब किसी संवैधानिक संशोधन के लिए पूरी तरह नया गठबंधन खड़ा करने की आवश्यकता नहीं होगी। इसके बजाय उसे विपक्षी खेमे में समर्थन, अनुपस्थिति या मतदान से दूरी के जरिए अपेक्षाकृत कम अतिरिक्त वोट जुटाने होंगे।

राज्यसभा पर तात्कालिक प्रभाव

राज्यसभा के आंकड़े अभी भी बदल रहे हैं। सात आप सांसदों के भाजपा में विलय के बाद भाजपा की ताकत पहले ही बढ़कर 113 हो गई थी। इसके परिणामस्वरूप एनडीए का आंकड़ा लगभग 148 सदस्यों तक पहुंच गया था।

अब टीएमसी संकट ने एक और अवसर पैदा कर दिया है। टीएमसी के तीन राज्यसभा सांसदों ने इस्तीफा दे दिया है, जिससे पार्टी की संख्या 13 से घटकर 10 रह गई है और तीन रिक्तियां पैदा हो गई हैं।

यदि आगामी उपचुनावों में एनडीए समर्थित उम्मीदवार तीनों सीटें जीत लेते हैं, तो एनडीए की संख्या लगभग 148 से बढ़कर 151 हो जाएगी। राज्यसभा में दो-तिहाई बहुमत का आंकड़ा 163 सदस्यों का है।

पश्चिम बंगाल और दीर्घकालिक रणनीति

इससे भी अधिक महत्वपूर्ण घटनाक्रम पश्चिम बंगाल विधानसभा में है। बागी नेताओं का दावा है कि टीएमसी के 80 में से 58 विधायक उनके समर्थन में हैं, जिससे ममता बनर्जी के पास केवल 22 विधायक बचते हैं।

इन आंकड़ों का भविष्य के राज्यसभा चुनावों पर सीधा असर पड़ेगा। राज्यसभा चुनाव की व्यवस्था के तहत किसी दल की सांसद चुनने की क्षमता विधानसभा में उसके विधायकों की संख्या पर निर्भर करती है। केवल 22 विधायकों के साथ ममता बनर्जी गुट भविष्य के चुनावों में स्वतंत्र रूप से राज्यसभा सदस्य चुनने में संघर्ष करेगा। टीएमसी का वर्तमान राज्यसभा दल तुरंत समाप्त नहीं होगा, लेकिन मौजूदा सदस्यों का कार्यकाल पूरा होने के साथ इसकी संख्या धीरे-धीरे घट सकती है।

स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस के कोच पर फेंका पत्थर, आरएसएस प्रमुख मोहन भागवत थे ट्रेन में सवार

उत्तर प्रदेश में फिरोजाबाद स्टेशन के पास पेमेश्वरगेट पुल के पास बृहस्पतिवार की शाम लखनऊ से दिल्ली जा रही स्वर्ण शताब्दी एक्सप्रेस के एक कोच पर पथराव हुआ है। पुलिस अधिकारियों ने बताया कि शताब्दी एक्सप्रेस में राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ के (आरएसएस) प्रमुख मोहन भागवत यात्रा कर रहे थे। उन्होंने बताया कि भागवत सुरक्षित हैं। यह घटना इटावा टूंडला रेल खंड पर हुई। पढ़ें पूरी खबर।