कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी की कांग्रेस में एंट्री से राजनीति में क्या फर्क पड़ेगा? यहां जानिए

मेवाणी और कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने से आने वाले चुनावों में कांग्रेस के कैंपेन को मजबूती मिलेगी।

Kanhaiya Kumar and Jignesh Mevani
कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी कांग्रेस में शामिल होंगे (Photo Source- Indian Express)

एक पुरानी कहावत है कि राजनीति में किसी भी समय बदलाव हो सकता है। ताजा मामला जेएनयू के पूर्व छात्र संघ अध्यक्ष और CPI सदस्य कन्हैया कुमार और गुजरात के वडगाम से निर्दलीय विधायक जिग्नेश मेवाणी से जुड़ा हुआ है।

कन्हैया कुमार और जिग्नेश मेवाणी ने मंगलवार (28 सितंबर) को कांग्रेस ज्वाइन कर ली है। ये दोनों युवा नेता हैं और इन्हें दक्षिणपंथी राजनीति का विरोध करने की वजह से देश में सुर्खियां मिलीं थीं।

कहा जा रहा है कि कन्हैया कुमार को कांग्रेस ज्वाइन कराने में चुनावी रणनीतिकार प्रशांत किशोर ने अहम भूमिका निभाई है। वह कुछ समय पहले जेडीयू के पूर्व नेता पवन वर्मा के आवास पर कन्हैया से मिले थे।

ऐसे में ये साफ है कि मेवाणी और कन्हैया के कांग्रेस में शामिल होने से यूपी, पंजाब, उत्तराखंड, गोवा और मणिपुर चुनाव में कांग्रेस के कैंपेन को मजबूती मिलेगी।

कांग्रेस में शामिल होने से क्या फर्क पड़ेगा: कन्हैया और जिग्नेश युवा हैं और युवाओं के बीच काफी लोकप्रिय हैं। पीएम मोदी के खिलाफ कैंपेन में इन दोनों नेताओं के उतरने से कांग्रेस के लिए एक चुनावी माहौल तैयार होगा, जिसका फायदा कांग्रेस उठा सकती है। कहा जा रहा है कि इन दोनों नेताओं के महत्व को ना ही कम करके आंका जा सकता है और ना ही खारिज किया जा सकता है।

मेवाणी और कन्हैया कुमार हिंदुत्व की विचारधारा के खिलाफ बोल्ड तरीके से अपनी बात रखते हैं, ऐसे में ये दोनों कांग्रेस के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। ऐसे में एंटी बीजेपी वोटरों के बीच कांग्रेस ये संदेश देने में भी कामयाब हो सकती है कि भाजपा की प्रमुख विरोधी पार्टी आज भी कांग्रेस ही है।

हालांकि, एक और तरह का वोटर है जिसके बीच मेवाणी और कुमार की मौजूदगी शायद ज्यादा काम न आए और इस वर्ग के बीच मेवाणी और कुमार सबसे अच्छे चेहरे भी नहीं हो सकते हैं।

इसका एक उदाहरण ये भी है कि एक युवा वोटर आर्थिक मोर्चे पर भाजपा से नाराज हो सकता है, लेकिन राष्ट्रीय सुरक्षा के मामलों में भाजपा का समर्थन भी करता है। ऐसे वोटरों को लुभाना मेवाणी और कुमार के लिए बड़ी चुनौती होगी।

कौन हैं कन्हैया कुमार: कन्हैया कुमार बिहार के बेगूसराय के रहने वाले हैं और सीपीआई से प्रभावित परिवार से आते हैं। उन्होंने बेगूसराय से सीपीआई के टिकट पर लोकसभा का चुनाव लड़ा था, लेकिन बीजेपी के गिरिराज सिंह से बड़े अंतर से हार गए थे। हालांकि, वह राष्ट्रीय जनता दल-कांग्रेस के उम्मीदवार से आगे रहे थे।

इसके बाद से उन्होंने बिहार में नागरिकता विरोधी (संशोधन) अधिनियम (CAA) के विरोध के दौरान कई रैलियों को संबोधित किया। हालांकि बिहार चुनाव अभियान के दौरान वह शांत दिखाई दिए।

कौन हैं जिग्नेश मेवाणी: जिग्नेश मेवाणी की राजनीति गुजरात के दलितों के बीच भाजपा के खिलाफ बढ़ रही नाराजगी से शुरू होती है। जिग्नेश मेवाणी इस समय उत्तरी गुजरात में बनासकांठा जिले के वडगाम निर्वाचन क्षेत्र का प्रतिनिधित्व करते हैं। उन्होंने 2017 के विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के समर्थन से सीट जीती थी।

2016 में हुई ऊना घटना के बाद मेवाणी ने दलितों द्वारा कई विरोध प्रदर्शनों का नेतृत्व किया था और वह गुजरात में दलितों के लिए भूमि अधिकारों के लिए भी लड़ रहे हैं। हालांकि, मेवाणी की राजनीति का दायरा सीमित है और वह राष्ट्रीय स्तर पर वोटरों को लुभाने में इतना कारगर साबित नहीं हो सकते हैं।

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