भारतीय सेना एक जुलाई से इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) शुरू कर सकती है। अगर ऐसा होता है, तो इसे भारतीय सेना में एक बड़े और निर्णायक बदलाव के रूप में देखा जाएगा। इन नए लड़ाकू समूहों को पश्चिम बंगाल के पानागढ़ में मौजूद 17वीं माउंटेन स्ट्राइक कोर (XVII Corps) से बनाने की तैयारी है। यह कोर चीन सीमा पर तैनात है। ये छोटे लेकिन पूरी तरह सक्षम लड़ाकू दल होंगे, जो पहाड़ी इलाकों में भारत की सैन्य क्षमता को और मजबूत करेंगे।
जनसत्ता के सहयोगी द इंडियन एक्सप्रेस को सूत्रों ने बताया कि पहले योजना थी कि सितंबर तक 17वीं माउंटेन स्ट्राइक कोर की दो डिवीजनों—59वीं डिवीजन और 23वीं डिवीजन—के तहत चार IBG बनाए जाएंगे लेकिन बाद में इस योजना को आगे बढ़ाकर एक जुलाई से लागू करने का निर्णय लिया गया। इसी साल द इंडियन एक्सप्रेस ने सबसे पहले खबर दी थी कि सेना में IBG बनाने की लंबे समय से चली आ रही योजना अब तेजी से आगे बढ़ चुकी है और जल्द लागू की जाएगी।
जानकारी के लिए बता दें कि मौजूदा योजना के तहत 17वीं माउंटेन स्ट्राइक कोर के तहत चार इंटीग्रेटेड बैटल ग्रुप (IBG) और एक फायर सपोर्ट ग्रुप बनाया जाएगा। इन पांचों की कमान मेजर जनरल रैंक के अधिकारी के हाथ में होगी। हर IBG में 5,000 से ज्यादा सैनिक होंगे। इसमें 12 से 13 यूनिट शामिल रहेंगी। इसके अलावा ब्रिगेडियर रैंक का एक अधिकारी चीफ ऑपरेशंस ऑफिसर (COO) के रूप में काम करेगा।
चारों IBG, 17वीं माउंटेन स्ट्राइक कोर की दो डिवीजनों से बनाए जाएंगे, लेकिन फायर सपोर्ट ग्रुप सीधे कोर मुख्यालय के अधीन काम करेगा। इस ग्रुप में सेना की नई दिव्यास्त्र बैटरियों को भी शामिल किया जा सकता है।
हर IBG अपने आप में पूरी तरह सक्षम लड़ाकू यूनिट होगी। इसमें इन्फैंट्री, आर्टिलरी, कॉर्प्स ऑफ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड मैकेनिकल इंजीनियर्स (EME), कॉम्बैट इंजीनियर्स, आर्मी सर्विस कॉर्प्स और एक फील्ड हॉस्पिटल शामिल होगा। इन IBG की सबसे बड़ी खासियत यह होगी कि इन्हें पहाड़ी इलाकों में दूसरे बड़े सैन्य दलों की तुलना में कहीं ज्यादा तेजी से तैनात किया जा सकेगा। IBG की अहमियत इसलिए भी ज्यादा मानी जा रही है, क्योंकि मौजूदा समय में किसी पूरी कोर को तैनात करने में काफी समय लगता है।
IBG बनाना सेना के बड़े पुनर्गठन का हिस्सा है। इसी योजना के तहत भैरव बटालियन, रुद्र ब्रिगेड, दिव्यास्त्र बैटरी और शक्तिबाण यूनिट भी बनाई जा रही हैं। रुद्र ब्रिगेड की कमान एक ब्रिगेडियर के हाथ में होगी। इसमें भी कई तरह की सैन्य इकाइयां शामिल होंगी, लेकिन जरूरत पड़ने पर इसे डिवीजन से अतिरिक्त मदद मिलेगी। वहीं, IBG आकार में बड़े होंगे और अपने दम पर ऑपरेशन चलाने में ज्यादा सक्षम होंगे।
जानकारी के लिए बता दें कि IBG की अवधारणा का पहला परीक्षण 2019 में पाकिस्तान सीमा पर तैनात 9वीं कोर (IX Corps) में किया गया था, लेकिन उस समय इसे लागू नहीं किया जा सका। इसके अलावा 2019 के एक्सरसाइज हिमविजय के दौरान भी कई सैन्य अभ्यासों में IBG की कार्यप्रणाली का परीक्षण किया गया था।
वहीं, पिछले कुछ वर्षों में चीन ने भी अपनी सेना में बड़ा बदलाव किया है। उसने पुराने बड़े डिवीजनों की जगह छोटे लेकिन ज्यादा सक्षम कंबाइंड आर्म्स ब्रिगेड बनाए हैं। इनमें टैंक, तोपखाना, एयर डिफेंस और दूसरी सहयोगी इकाइयों को एक साथ रखा गया है, ताकि संयुक्त सैन्य अभियान तेजी और बेहतर तरीके से चलाए जा सकें।
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