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किसानों का नेता कैसा हो? सुधीर चौधरी ने ट्व‍िटर पर समझाया, लोग कुछ और समझाने लगे

सुधीर का कहना है कि अधिकतर नेता सिर्फ राजनीति करने और अपना नाम चमकाने के लिए आंदोलनकारियों के साथ फोटो खिंचवाने के लिए पहुंचे हैं। वे न किसानों के हितैषी हैं और न ही वह स्वयं किसान हैं।

modi governmentसरकार के कृषि कानूनों के खिलाफ किसानों का प्रदर्शन जारी है। (ट्विटर)

किसान आंदोलन का अभी तक कोई हल नहीं निकल सका है। सरकार और किसानों के बीच बातचीत से कुछ रास्ते निकलने की उम्मीद लगाए लोगों को अब भी निराशा ही हाथ लगी है। इस बीच जी न्यूज के संपादक सुधीर चौधरी ने ट्विटर पर समझाया कि किसानों के हित में बात करने के लिए कोई एक नेता होना चाहिए। उन्होंने कहा,”किसानों का नेता कैसा हो? किसानों को राजनीति के नए दुकानदारों से सावधान रहना होगा। हमेशा के तरह नए नेताओं की दुकानें सज जाएंगी और किसान उसी हाल में रह जाएंगे।” लेकिन उनकी बात पर लोग कुछ और समझाने लगे।

दरअसल सुधीर चौधरी ने ट्विटर पर अपने वीडियो में यह समझाने की कोशिश की कि किसानों के आंदोलन में कोई एक सर्वमान्य नेता नहीं है। किसानों की ओर से बात करने के लिए कुल 30-35 नेता हैं। सुधीर का कहना है कि अधिकतर नेता सिर्फ राजनीति करने और अपना नाम चमकाने के लिए आंदोलनकारियों के साथ फोटो खिंचवाने के लिए पहुंचे हैं। वे न किसानों के हितैषी हैं और न ही वह स्वयं किसान हैं। सरकार का भी कहना है कि बात करने के लिए 4-5 लोग आएं, लेकिन वहां कई दर्जन नेता पहुंच रहे हैं।

अंक्रुश @AnkrushP नाम के एक यूजर ने लिखा, “यह न केवल किसान आंदोलन है, बल्कि बेरोजगारी और मुद्रास्फीति की लहर भी है। इन तीन कानूनों से महंगाई और बेरोजगारी आसमान छू रही है। मुद्रास्फीति और बेरोजगारी”

शिवम कुमार@SHIVAM72720602 नाम के एक अन्य यूजर ने जवाब में लिखा, “बरसों बरस से गांव में, गांव से बाहर जाने का सिर्फ एक ही रास्ता था जिस पर एक पहलवान लट्ठ ले कर बैठा रहता था और वह हर आने जाने वालों से कमीशन लेता था। फिर गांव में एक नया प्रधान आया, उसने गांव से बाहर जाने के लिए एक दूसरा रास्ता बना दिया जिस पर कोई पहलवान लट्ठ लेकर नहीं बैठता।” उन्होंने आगे लिखा, “कुछ लोगों ने नासमझी में और कुछ लोगों ने सब कुछ समझते हुए भी नए रास्ते का विरोध किया तो प्रधान ने कहा कि मैंने पुराना रास्ता बंद नहीं किया है सिर्फ नया रास्ता बनवाया है जिसको जिस भी रास्ते से गुजरना हो वह गुजर ले।”

सुमित अग्रवाल@Sumit_ag01 ने लिखा, “किसानों को सरकार से बातचीत करने के लिए उनके नेताओं को अपनी पसंद का नेता चुनने के लिए आपस में लड़ने दें।”

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