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सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा- लोगों को हफ्ते में 24 हजार नहीं मिल रहे हैं, कुछ को लाखों के नए नोट कैसे मिले?

इससे पहले 9 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार ने पूछा था, ‘आप लोगों ने नोटबंदी पर पॉलिसी कब बनाई थी, क्या वह गोपनीय रखी गई थीं?’

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नोटबंदी के खिलाफ दाखिल की गई याचिका पर फैसले को सुरक्षित रखते हुए गुरुवार को सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सरकार के इस कदम से कुछ लोगों को काफी दिक्कतें हो रही हैं, जबकि कईयों को बिल्कुल भी इससे समस्या नहीं हो रही। साथ ही सुप्रीम कोर्ट ने छापों में काफी संख्या में नए नोट मिलने का संज्ञान लेते हुए अटॉर्नी जनरल मुकुल रोहतगी से पूछा कि कुछ लोगों को लाखों की संख्या में रुपए कैसे मिल रहे हैं और इसमें नए नोट भी शामिल हैं।

सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस टीएस ठाकुर ने रोहतगी से पूछा, ‘लोगों को एक हफ्ते में 24000 रुपए नहीं मिल रहे हैं, जबकि कुछ लोगों को लाखों में नए नोट कैसे मिल रहे हैं।?’ जस्टिस ठाकुर के सवाल का जवाब देते हुए रोहतगी ने कहा कि कुछ बैंक मैनेजर्स कथित रूप से अवैध गतिविधियों में शामिल हैं और सरकार दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर रही है। रोहतगी ने साथ ही सुप्रीम कोर्ट से कहा कि लोगों की दिक्कतों को कम करने लिए काम किया जा रहा है।

इससे पहले 9 दिसंबर को सुप्रीम कोर्ट ने केंद्र सरकार ने पूछा था, ‘आप लोगों ने नोटबंदी पर पॉलिसी कब बनाई थी, क्या वह गोपनीय रखी गई थीं?’ इसके साथ ही चीफ जस्टिस ऑफ इंडिया ने केंद्र सरकार ने यह भी पूछा कि जब केंद्र सरकार ने प्रतिदन 24,000 रुपए निकालने की इजाजत दी है तो फिर उसका पालन क्यों नहीं हो रहा है। केंद्र सरकार की तरफ से सुप्रीम कोर्ट को कहा गया कि सरकार पूरी तरह से कोशिश कर रही और 10-15 दिनों में समस्या खत्म हो जाएगी।

पिछले सप्ताह केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में नोटबंदी के कदम पर एक हलफनामा भी जमा करवाया था, जिसमें कहा गया था कि यह कदम कालाधन को खत्म करने के लिए उठाया गया है। केंद्र ने हलफनामे में सुप्रीम कोर्ट को बताया था कि नोटबंदी का फैसला कैश ट्रांजेक्शन को कम करने के लिए उठाया गया है, इससे अवैध इकॉनोमी से पर्दा उठेगा। गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट की तीन जजों की बेंच नोटबंदी से जुड़ी कुछ याचिकाओं पर सुनवाई कर रही थी।

अटॉर्नी जनरल रोहतगी ने पहले सुप्रीम कोर्ट के सामने ट्रांसफर याचिका दाखिल की थी। जिसमें उन्होंने नोटबंदी के खिलाफ लंबित याचिकाओं पर रोक की मांग की थी। 18 नवंबर को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका खारिज करते हुए अलग-अलग हाईकोर्ट और निचली अदालतों में नोटबंदी के खिलाफ दाखिल की गई याचिकाओं की सुनवाई पर रोक लगाने से मना कर दिया था।

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