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दो माह पहले शरद पवार ने जिस फार्मुले से BJP को दी मात, झारखंड में उसे ही INC-JMM दोहराकर पा सकती है सत्ता

झारखंड में चुनाव में कांग्रेस ने निश्चित रूप से शरद पवार की महाराष्ट्र चुनावी रणनीति से सीख ली। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान शरद पवार ने सफलतापूर्वक भाजपा के राष्ट्रवाद से बचते हुए स्थानीय मुद्दों पर व्यापक स्तर पर प्रचार किया था।

sharad pawarएनसीपी चीफ शरद पवार। (रॉयटर्स फोटो)

झारखंड में नई सरकार के गठन के लिए पांच चरणों में चुनाव हुआ है। आज (23 दिसंबर, 2019) चुनावी रुझान/नतीजे भी आ रहे हैं। ताजा ट्रेंड्स के मुताबिक, JMM, Congress और RJD का गठबंधन 41 सीट के साथ सबसे आगे चल रहा है, जबकि 28 सीटों पर BJP पीछे है। वहीं, JVM, AJSU और अन्य के पाले में 4-4 सीट जा सकती हैं।

इससे पहले, एग्जिट पोल में कहा गया था कि भाजपा को झटका लगा सकता है और पार्टी की सरकार जाने की भी नौबत आ सकती है। सूत्रों के मुताबिक चुनाव में बढ़त बनाते हुए नजर आ रहे कांग्रेस-जेएमएम गठबंधन ने झारखंड में एनसीपी प्रमुख शरद पवार की महाराष्ट्र वाली चुनावी रणनीति को अपनाया। दरअसल गठबंधन ने चुनाव स्थानीय मुद्दों, अर्थव्यवस्था, नौकरियों में कमी पर लड़ा और भाजपा के राष्ट्रवाद जैसे मुद्दों से खुद को दूर रखा।

विधानसभा चुनाव में भाजपा ने जम्मू-कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाले अनुच्छेद 370 के अधिकतर प्रावधान निरस्त करने, राम मंदिर निर्माण का रास्त साफ होने और नागरिकता संशोधन कानून, 2019 को प्रचार का प्रमुख मुद्दा बनाया। इस बीच कांग्रेस और इसके सहयोगी दल झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM) स्थानीय मुद्दों पर सरकार को घेरने की रणनीति में लगे रहे। गठबंधन ने आर्थिक मंदी और बढ़ती कीमतें और बेरोजगारी को लेकर सरकार पर निशाना साधा।

एक अंग्रेजी न्यूज वेबसाइट में छपी खबर के मुताबिक कांग्रेस ने निश्चित रूप से शरद पवार की महाराष्ट्र चुनावी रणनीति से सीख ली। महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव के दौरान शरद पवार ने सफलतापूर्वक भाजपा के राष्ट्रवाद से बचते हुए स्थानीय मुद्दों पर व्यापक स्तर पर प्रचार किया था। मामले में कांग्रेस के एक वरिष्ठ नेता अजय शर्मा कहते हैं, ‘चुनावों को स्थानीय मुद्दों पर बनाए रखने और इसे राष्ट्रवाद केंद्रित बनाने के भाजपा के जाल में ना पड़ने के लिए हमारी तरह से ऐसा जानबूझकर किया गया था। हमें यह भी फीडबैक मिला था कि भाजपा के मुख्यमंत्री रघुबरदास के खिलाफ जबरदस्त सत्ता-विरोधी लहर है, और जैसे ही वो अनुच्छेद-370, अयोध्या, सीएए जैसे मुद्दों पर चुनाव लड़ेंगे ये लहर और भी बढ़ेगी।’ शर्मा कहते हैं कि हम भाजपा के जाल में नहीं फंसे और चुनाव अभियान पूरी तरह झारखंड पर केंद्रित रखा।

उल्लेखनीय है कि शर्मा ने रांची में कांग्रेस के चुनावी अभियान को संभाला और चुनावी रणनीति में पार्टी के झारखंड इंचार्ज आरपीएन सिंह की खूब मदद की। हिंदुस्तान टाइम्स में छपी खबर के मुताबिक शर्मा कहते हैं, ‘कांग्रेस ने भाजपा द्वारा पीएम मोदी पर केंद्रित चुनाव अभियान के सभी प्रयासों को विफल कर दिया।’

बता दें कि सत्तापक्ष भाजपा ने झारखंड में पीएम मोदी की रैलियों की संख्या बढ़ाने का निर्णय लिया था, क्योंकि पार्टी ने आकलन किया कि चुनाव अभियान में स्थानीय नेताओं को जमीनी स्तर पर ज्यादा तवज्जों नहीं मिल रही थी।

वहीं कांग्रेस ने पांच चरणों के लिए चुनाव अभियान में प्रत्येक चरण के लिए अलग-अलग योजना तैयार कर रखी थी। इसके अलावा पार्टी ने 18 दिसंबर को कांग्रेस की अंतरिम अध्यक्ष सोनिया गांधी या पार्टी महासचिव प्रियंका गांधी की रैली के साथ चुनाव प्रचार खत्म करने की योजना बनाई थी। आखिर में संथाल-परगना क्षेत्र के पाकुर में जेएमएम प्रमुख हेमंत सोरेन ने भी एक जनसभा को संबोधित किया। इसके अलावा कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने राज्य में चार रैलियों को संबोधित किया।

राज्य में पार्टी कार्यवाहक अध्यक्ष राजेश ठाकुर कहते हैं, ‘पिछले 18 सालों में पहली बार कांग्रेस फाइट में थी और हमने अपना सर्वश्रेष्ठ दिया। इसके अलावा आरपीएन सिंह ने चालीस दिनों तक राज्य में डेरा डाले रखा। ऐसा पहले नहीं हुआ।’

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