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Karvy: निवेशकों के 2000 करोड़ रुपए दूसरे बिजनेस में लगा दिया! समझें क्या है पूरा फर्जीवाड़ा

खास बात है कि अपने कुकुर्म छिपाने के लिए KSBL ने जनवरी 2019 से अगस्त 2019 के बीच सेबी को भेजे सबमिशन में डीपी अकाउंट (नंबर- 11458979) में इसका जिक्र भी नहीं किया।

SEBIतस्वीर का इस्तेमाल केवल प्रतीकात्मक रूप से किया गया है।

Karvy Stock Broking Ltd नाम की ब्रोकरेज कंपनी बीते शुक्रवार यानी 22 नवंबर से सुर्खियों में बनी हुई है। इसकी एक महत्वपूर्ण वजह ये भी है कि सिक्योरिटी एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने एक अंतरिम आदेश जारी कर कंपनी के नए बिजनेस पर प्रतिबंध लगा दिया। आरोप है कि कार्वी फंड अपने रियल स्टेट की शाखा में खर्च करने के लिए कथित तौर पर निवेशकों के पैसों और प्रतिभूतियों का दुरुपयोग कर रहा है।

सेबी का कहना का कहना कि कार्वी ने 1,096 करोड़ रुपए अपने रियल स्टेट बिजनेस में ट्रांसफर कर दिए। बाजार के अनुमान में इसमें निवेश की गई राशि लगभग 2,000 करोड़ रुपए हो सकती है। सेबी ने इसके अलावा ऐसे ही अन्य ब्रोकरेज कंपनियों की भी जांच कर रहा है, चूंकि शक है कि कार्वी के अलावा अन्य कंपनियों ने भी इसी तरह की हेराफेरी की हो। सेबी के मुताबिक इस तरह की हेराफेरी से शेयर बाजार में संकट पैदा हो सकता है।

यहां जानिए आखिर कार्वी ने क्या किया
सेबी कार्वी के खिलाफ तय मानदंडों का उल्लंघन करने के चलते कार्रवाई कर रहा है। इसमें ग्राहक के शेयर खुद को ट्रांसफर करना और पैसा जुटाने के लिए ग्राहकों के शेयर गिरवी रखना शामिल है। अनुमान के मुताबिक कार्वी के 2.40 लाख से अधिक ग्राहकों ने अपने ट्रेडिंग खातों में आने वाले पैसे और प्रतिभूतियों के बारे में सेबी से शिकायत की है। कार्वी पर बिना जानकारी के ग्राहकों के खातों के इस्तेमाल का भी आरोप है।

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज ऑफ इंडिया (NSE) द्वारा सेबी को भेजी एक रिपोर्ट के मुताबिक Karvy Stock Broking Ltd ने कंपनी की एक इकाई द्वारा गुप्त रूप से ग्राहकों की सिक्योरिटीज बेचने के लिए अपने ग्राहकों के द्वारा उसे दी गई पॉवर ऑफ अटॉर्नी का गलत इस्तेमाल किया। इसके अलावा फंड को अपने निजी उद्देश्य के लिए इस्तेमाल किया।

खास बात है कि अपने कुकुर्म छिपाने के लिए KSBL ने जनवरी 2019 से अगस्त 2019 के बीच सेबी को भेजे सबमिशन में डीपी अकाउंट (नंबर- 11458979) में इसका जिक्र भी नहीं किया। एनएसई ने बताया कि जांच के दौरान यह घपला सामने आया।

कितनी रकम की हेराफेरी हुई?
सेबी कहता है कि 1,096 करोड़ की राशि कार्वी द्वारा कार्वी रियलस्टेट को ट्रांसफर की गई। मगर घोटाला इस राशि से दोगुना या इससे भी ज्यादा का होने की संभावना है। बता दें कि सेबी मामले की प्रारंभिक जांच 9 अगस्त को शुरू की थी, वो भी सीमित उद्देश्य के लिए।

क्या निवेशकों का पैसा डूब जाएगा?
कार्वी ने कथित रूप से अपने हजारों निवेशकों की प्रतिभूतियों का दुरुपयोग किया। हालांकि इंडस्ट्री से जुड़े सूत्रों का कहना है कि इस समय कोई डिफॉल्ट नहीं है। और गिरवी रखी गई प्रतिभूतियों का मूल्य दलाल द्वारा निकाले गए धन से अधिक है। इसके अलावा सरकारी सूत्रों ने भी स्पष्ट किया है कि निवेशकों का पैसा डूबेगा नहीं।

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