Jammu-Kashmir News: कश्मीर में पहले के मुकाबले आज माहौल कुछ शांत दिखाई देता है। आज से करीब 11 साल पहले कश्मीर में सोशल मीडिया पर 11 स्थानीय आतंकियों की एक तस्वीर वायरल थी… इस तस्वीर में दिखाई दे रहे सभी लड़कों के पास कलाश्निकोव राइफल थी और ये सभी मिलिट्री की ड्रेस में थे।

इस तस्वीर के बीचों-बीच में एक बुरहान वानी था, तस्वीरें वायरल होने के बाद बुरहान वानी ने खुद की पहचान छिपाने की कोशिश नहीं की बल्कि यह सोशल मीडिया पर यह दिखाया कि वह अपने साथियों साथ कश्मीर घाटी के शहरी इलाकों और दक्षिणी कश्मीर में घूम रहा है।

उसने यह उम्मीद की थी, कि इन तस्वीरों का असर संपन्न परिवारों के कई शिक्षित, तकनीकी रूप से सक्षम युवाओं पर पड़ेगा। इससे कश्मीर में उग्रवाद के खिलाफ लड़ाई में एक नया अध्याय खुल जाएगा। बुरहान एक ऐसा संकट खड़ा करना चाहता था, जो कि 1990 के दशक के बाद से कभी देखा तक नहीं गया था।

10 साल पहले मारा गया था बुरहान

सुरक्षाबलों ने दक्षिण कश्मीर के कोकरनाग में ऑपरेशन के तहत बुरहान वानी को मार गिराया था। बुरहान के मारे जाने के दस साल बाद अब स्थिति फिर से बदल गई है।

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बुरहान वानी गुट की वायरल तस्वीर ( Image Source: Indian Express File Photo)

आतंकवादियों के मारे जाने की संख्या में तो बढ़ी है लेकिन आतंकियों की स्थानीय भर्ती से लेकर सभी अन्य मानकों में गिरावट ही आई है। हालांकि, हाई लेवल अधिकारियों का कहना है कि जमीनी स्थिति जटिल बनी हुई है, इसलिए सुरक्षा बलों को अभी तक सतर्क रहने की जरूरत है।

आंकड़े बता रहे ताजा हकीकत

आंकड़े जम्मू कश्मीर की सच्चाई बताते हैं। साल 2016 में बुरहान वानी की पहली तस्वीर सामने आई थी, तो 157 आतंकी मारे गए थे। उसके बाद 2018 में यह हालत 266 हो गई और 2020 में यह आंकड़ा बढ़कर 230 तक गए। हालांकि उसके बाद से आतंकी हमलों में कमी आई है।

इस साल केवल 10 मौतें हुई हैं। सुरक्षाबलों के हताहत होने की संख्या में भी गिरावट देखने को मिली है। 2018 में 94 के उच्चतम स्तर से घटकर इस वर्ष केवल एक रह गई है। नागरिकों के मामले में भी यही स्थिति है, 2018 में 88 मौतों से घटकर इस वर्ष केवल एक रह गई है।

सालमारे गए आतंकीहताहत जवाननागरिकों की मौत
20161578856
20172178354
20182669488
20191607842
20202305737
20211924536
20221863030
2023853211
2024682632
2025461728
20261011

कश्मीर में शांति, अधिकारियों के लिए चुनौतियां

एक प्रमुख आतंकवाद-विरोधी पुलिस अधिकारी ने कहा, ““एक नागरिक के तौर पर आपको कश्मीर में शांति दिखाई देती है। उसके फायदे भी नजर आते हैं। आतंकी हमलों में कमी आई है। इतना ही नहीं, गिरफ्तारियों और एफआईआर की संख्या में कमी आई है।” हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि एक सुरक्षा अधिकारी के तौर पर देखा जाए तो चुनौती अभी भी पहले की तरह ही बनी हुई है।

बुधवार को दक्षिण कश्मीर के शोपियां में हुई मुठभेड़ में लश्कर-ए-तैयबा का आतंकवादी जाकिर अहमद गनई मारा गया। माना जाता है कि वह कश्मीर में सक्रिय दो स्थानीय आतंकवादियों में से एक था, लेकिन सुरक्षा अधिकारियों का कहना है कि अभी क्षेत्र में पाकिस्तानी आतंकवादियों की संख्या 30 के करीब है।

घाटी के जंगलों में सिमटे आतंकी

अधिकारियों का कहना है कि आतंकवाद का दायरा अब कस्बों और शहरों से हटकर घाटी के घने जंगलों तक में सीमित हो गया है। सोशल मीडिया पर अब आतंकी ज्यादा एक्टिव नहीं है, और ऑनलाइन उनकी मौजदूगी लगभग न के बराबर हो गई है।

एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा, “ह्यूमन इंटेलीजेंस ज्यादातर ऑपरेशंस में मददगार रही है, लेकिन आतंकवाद के खिलाफ तकनीक ने सटीकता के साथ काम करने में अहम भूमिका भी निभाई। अधिकारी ने कहा कि ऑनलाइन चर्चा कम होने से सुरक्षा बलों को तकनीकी जानकारी पर भरोसा करने का मौका मिला है।

एक अधिकारी ने कहा, “सुरक्षा या खुफिया अधिकारी होने के नाते हम देखते हैं कि समग्र सुरक्षा स्थिति में सुधार हुआ है, लेकिन इससे नई चुनौतियां भी सामने आई हैं।” उन्होंने कहा, “हो सकता है कि अब आतंकवादियों की संख्या कम हो गई हो, लेकिन वे अब शांत हो गए हैं। विद्रोह अधिक अस्पष्ट घुसपैठ करना कठिन और ट्रैक करना कठिन हो गया है।”

बुरहान मॉडल ज्यादा टिकाऊ नहीं रहा

सुरक्षा अधिकारियों ने इस बात पर भी ज़ोर दिया कि बुरहान मॉडल विद्रोह का एक स्थायी मॉडल नहीं बल्कि एक अपवाद था। एक अन्य अधिकारी ने यह भी कहा, “हो सकता है कि उसने बड़ी संख्या में युवाओं को लुभाने के लिए सोशल मीडिया का इस्तेमाल किया हो, लेकिन देखिए कि वे कितनी तेजी से मारे गए। आतंकियों को यह समझने में चार साल लग गए कि ये बुरहान मॉडल ज्यादा टिकाऊ नहीं है।”

सुरक्षा अधिकारियों ने बताया कि एक अहम बदलाव पाकिस्तानी गुर्गों द्वारा “कमांड और कंट्रोल” की बागडोर संभालना रहा है। पुलिस अधिकारी ने कहा कि 2019 के बाद हिजबुल मुजाहिदीन लगभग पूरी तरह खत्म हो गया और लश्कर ने मुख्य भूमिका निभाना शुरू कर दिया। वे ज्यादा प्रोफेशनल्स और तकनीक से लैस हैं। वे ऊंचे पहाड़ी जंगलों से काम करते हैं। कमांड और कंट्रोल लश्कर के इन पाकिस्तानी गुर्गों के हाथों में चला गया है, जबकि भारत में स्थापित संगठनों का नेटवर्क खत्म हो चुका है।

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पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर के रहने वाले जीशान अहमद मीर को अपनी प्रेमिका से मिलने के लिए उरी में लाइन ऑफ कंट्रोल पार करने के एक महीने बाद वापस सीमा पार भेज दिया गया। इस बात की जानकारी शनिवार को अधिकारियों ने दी है। पढ़िए पूरी खबर…