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तनाव के बावजूद लगातार बढ़ा है चीन से भारत का आयात, जानिए सात साल में कैसे रिकॉर्ड स्तर पर पहुंचा यह आंकड़ा

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्मनिर्भर भारत के आह्वान के बीच वाणिज्य मंत्रालय के आंकड़ों से साफ है कि भारत कैसे चीन के आयात से निर्भरता बढ़ाता गया है।

Edited By कीर्तिवर्धन मिश्र नई दिल्ली | Updated: May 30, 2021 2:44 PM
भारत-चीन के बीच तनाव उभरने के दौरान कई बार उठ चुकी है चीनी उत्पादों को भारत में बैन करने की मांग। (फोटो- Reuters)

मोदी सरकार के सात सालों में भारत और चीन के बीच कई बार विवाद उपजे हैं। इसकी शुरुआत 2016 में डोकलाम स्थित ट्राईजंक्शन पर हुए टकराव के बाद से हुई थी। इसके बाद पाकिस्तानी आतंकी मौलाना मसूद अजहर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने का मुद्दा हो या भारत की न्यूक्लियर सप्लाई ग्रुप (NSG) में एंट्री का। चीन ने लगातार रोड़े अटकाए हैं। दोनों देशों के बीच ताजा विवाद लद्दाख में चीन की घुसपैठ के बाद शुरू हुआ है। इन हर एक मौकों पर भारत ने चीन की चालबाजी पर दबी जुबान नाराजगी जताई और उस पर व्यापारिक निर्भरता कम करने की भी बात कही। लेकिन सरकार के आंकड़े ही कुछ और सच्चाई बयां करते हैं।

क्या कहते हैं सरकार के आंकड़े?: चीन के वाणिज्य मंत्रालय ने पिछले महीने ही एक बयान जारी कर कहा था कि भारत-चीन व्यापार संबंध में पूरी मजबूती दिख रही है और इस साल की पहली तिमाही में द्विपक्षीय वस्तु व्यापार सालाना आधार पर 42.8 प्रतिशत बढ़कर 27.7 अरब डॉलर रहा। वाणिज्य मंत्रालय के प्रवक्ता गाओ फेंग ने कहा था कि साल 2020 में चीन और भारत का व्यापार कुल 87.6 अरब डॉलर था।

चीनी प्रवक्ता ने कहा था कि यह दोनों देशों के बीच मजबूत व्यापार संबंधों को प्रदर्शित करता है। चौंकाने वाली बात यह है कि भारत सरकार के आधिकारिक आंकड़े कहते हैं कि भारत ने 2020 में चीन से 58.7 अरब डॉलर मूल्य का सामान आयात किया। यानी कुल व्यापार में 67 फीसदी हिस्सा भारत की ओर से आयात का रहा।

विश्लेषकों के अनुसार पूर्वी लद्दाख में वास्तविक नियंत्रण रेखा पर पिछले साल मई से दोनों देशों के बीच गतिरोध के बावजूद भारत-चीन के बीच व्यापार बढ़ रहा है। खुद भारतीय वाणिज्य मंत्रालय की ओर से सालान तौर पर जो आंकड़े जारी किए जाते हैं, उनसे साफ है कि भारत लगातार चीन पर निर्भरता बढ़ाता गया है। खासकर तकनीक और चिकित्सा के क्षेत्र में।

UPA हो या NDA हर साल बढ़ा चीन से आयात का हिस्सा: गौरतलब है कि भारत और चीन के बीच 1996-97 में व्यापार कम था। इस दौरान भारत के कुल आयात में चीन का हिस्सा महज 1.93% ही रहा था। हालांकि, साल 2000-01 के बाद से यह लगातार बढ़ता गया। यूपीए के शासन की बात करें, तो 2004-05 की शुरुआत में दुनियाभर से भारत जितना आयात करता था, उसका 6.36 फीसदी हिस्सा चीन से आता था। हालांकि, इसके बाद 2006-07 में यह आंकड़ा 9.40%, 2012-13 में यह 10.64% तक पहुंच गया था।

यूपीए सरकार के जाने और एनडीए के आने के बाद भी भारतीय आयात में चीन का हिस्सा बढ़ता चला गया। 2014-15 में भारत के आयात का 13.48 फीसदी हिस्सा चीन का रहा। 2016-17 में यह 15.94%, 2017-18 में 16.40% रहा। डोकलाम विवाद के बाद भारत ने चीन से व्यापार कम करने की कोशिश की और 2018-19 में कुल आयात में चीन का हिस्सा 13.68% तक गिर गया। 2019-20 में यह 13.73% तक आ गया था।

लद्दाख में हुए भारत-चीन सेना के टकराव के बावजूद चीन से बढ़ा व्यापार: 2020-21 वह वित्तीय वर्ष रहा, जब भारत और चीन के बीच तनाव खुलकर सामने आने लगा। इसकी शुरुआत लद्दाख में दोनों सेनाओं के टकराव से हुई, जिसमें सैनिकों की जानें गईं। इसके बाद भारत सरकार ने ‘वोकल फॉर लोकल’ का नारा देते हुए आत्मनिर्भरता बढ़ाने का संकल्प लिया था। इसी दौरान चीनी मोबाइल ऐप्स को बैन किया गया और 5G समेत भारत में चल रहे कई प्रोजेक्ट में चीन की भागीदारी को खत्म कर दिया गया। इसके बावजूद वित्तीय वर्ष 2020-21 के अप्रैल से फरवरी के जो प्रोविजनल आंकड़े आए, उनके मुताबिक, भारत में चीन की ओर से आयात अब तक के सबसे ऊंचे आंकड़े 16.92 फीसदी तक पहुंच चुका है।

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