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सरकार ने किए तीन उपाय: आज महीने का आखिरी दिन, बड़ा सवाल- कैसे बंटेगी सैलरी ?

देशभर के लोग और बैंक इस वक्त नोटबंदी के बाद हो रही परेशानी से जूझ रहे हैं। ऐसे में नवंबर महीने का अंत और ज्यादा परेशानी लेकर आया है।
एटीएम के बाहर खड़ा एक शख्स। (पीटीआई फोटो)

देशभर के लोग और बैंक इस वक्त नोटबंदी के बाद हो रही परेशानी से जूझ रहे हैं। ऐसे में नवंबर महीने का अंत और ज्यादा परेशानी लेकर आया है। वह परेशानी है सैलरी की। यह ऐसा वक्त है कि सैलरी देने और लेने वाला दोनों ही परेशान हैं। नवंबर महीने के अंत और दिसंबर की पहली तारीख से लाखों तनख्वाह धारी लोग बैंकों से पैसे निकालने के इंतजार में खड़े हो सकते हैं। ऐसे में भीड़ बहुत ज्यादा तादाद में बढ़ सकती है। भीड़ से बचने के लिए सरकार कई तरह की तैयारी कर रही है। सरकार प्राइवेट फर्म को डिजिटल रूप से सैलरी देने का निर्देश दे रही है। वहीं बैंकों द्वारा बड़ी कंपनियों को प्रीपेड कार्ड इशू करके उसमें सैलरी डलवाने की सलाह दी जा रही है। इसके अलावा सरकारी दफ्तरों और कुछ मंत्रालयों में पीओएस मशीन लगा दी गई हैं। ताकि कर्मचारी वहीं से पैसे निकाल सकें और बैंक के बाहर ना खड़े हों। इससे बैंक पर प्रेशर घटने की उम्मीद है।

इसके अलावा रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया ने पहले ही प्रीपेड वॉलेट में पैसे रखने की लिमिट को 10 हजार से 20 हजार रुपए कर दिया है। वहीं केंद्रीय कर्मचारियों को 10 हजार रुपए सैलरी कैश में देने की बात भी कही गई थी। रेलवे के कर्मचारियों को वह सैलरी मिली भी। इसके अलावा एटीएम से एक दिन में 2,500 और एक हफ्ते में 24,000 रुपए निकालने की छूट है।

बैंकों ने अपनी परेशानी बताते हुए कहा है कि उन्हें मांग के हिसाब से कुल 35-40 प्रतिशत कैश ही आरबीआई द्वारा दिया जा रहा है। हालांकि बैंकों का कहना है कि कई लोग डिजिटल मोड के पैसों का लेनदेन करने लगे हैं जिससे उनपर प्रेशर कम हो गया है। नोटों की कमी का अंदाजा आरबीआई के ताजा आंकड़ों को देखकर लगाया जा सकता है। 10 से 27 नवंबर के बीच लोग बैंक और एटीएम से कुल 2.16 लाख करोड़ रुपए निकाल पाए हैं जबकि इसी वक्त में 8.11 लाख करोड़ रुपए के पुराने नोट जमा करवाए गए हैं।

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