बीजेपी के राज्यसभा सांसद राघव चड्ढा उन 13.37 करोड़ नामों में शामिल हैं जिन्हें चुनाव आयोग (EC) की विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) प्रक्रिया के तहत तैयार की गई ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाया गया है। यह प्रक्रिया पिछले साल जून से चल रही है।

द इंडियन एक्सप्रेस ने गुरुवार को अपनी रिपोर्ट में बताया कि चड्ढा का नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाए गए अनुपस्थित, दूसरी जगह शिफ्ट हो चुके, मृत और डुप्लिकेट नाम वाले मतदाताओं की सूची में राघव चड्ढा का नाम भी शामिल है। पंजाब की यह ड्राफ्ट मतदाता सूची 13 अगस्त को प्रकाशित की गई थी।

नाम हटने के बाद क्या होता है?

अगर किसी व्यक्ति का नाम मतदाता सूची से हटा दिया जाता है तो उसके सामने सवाल होता है कि अब आगे क्या करना होगा और वह अपना नाम दोबारा मतदाता सूची में कैसे शामिल करा सकता है?

राघव चड्ढा का नाम कैसे हटाया गया?

चुनाव आयोग के SIR आदेश और दिशा-निर्देशों के अनुसार, राज्य में SIR की घोषणा होने की तारीख तक मतदाता सूची में दर्ज सभी मतदाताओं को मतदाता सूची में अपना नाम बनाए रखने के लिए अपनी पात्रता दोबारा साबित करनी होगी।

चुनाव आयोग ने सबसे पहले जून 2025 में बिहार में SIR प्रक्रिया शुरू करते समय ये दिशा-निर्देश जारी किए थे। इसके बाद अक्टूबर 2025 और इस साल मई में दूसरे राज्यो मे शुरू किए गए SIR के दौरान भी इन्हीं दिशा-निर्देशों को दोहराया गया।

इसके लिए बूथ लेवल अधिकारियों (BLO) को घर-घर जाकर गणना फॉर्म बांटने होते हैं। इन फॉर्म में मतदाता का नाम, ईपीआईसी नंबर, बूथ जैसी जानकारी पहले से भरी होती है। एक महीने की तय गणना अवधि के दौरान जो मतदाता फॉर्म भरकर जमा करते हैं, उनके नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किए जाते हैं।

14 मई को 16 राज्यों (जिनमें पंजाब भी शामिल था) और तीन केंद्र शासित प्रदेशों में SIR के तीसरे चरण की घोषणा की गई थी। इसके लिए चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों में कहा गया था कि जिन मतदाताओं के गणना फॉर्म वापस नहीं मिलते हैं। वहां BLO आसपास के मतदाताओं से पूछताछ कर यह पता लगा सकते हैं कि मतदाता अनुपस्थित है, दूसरी जगह शिफ्ट हो चुका है, उसकी मृत्यु हो चुकी है या उसका नाम दो जगह दर्ज है। इसके बाद संभावित कारण को दर्ज किया जा सकता है।

ऐसे मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल नहीं किए जाते। हालांकि, चुनाव आयोग के दिशा-निर्देशों के मुताबिक अगर किसी व्यक्ति का नाम हटाया गया है और वह इससे असहमत है तो वह ड्राफ्ट सूची जारी होने के बाद मिलने वाली एक महीने की दावा और आपत्ति अवधि में मतदाता पंजीकरण फॉर्म (फॉर्म-6) जमा कर सकता है। जांच में पात्र पाए जाने पर उसका नाम अंतिम मतदाता सूची में दोबारा शामिल किया जा सकता है।

राघव चड्ढा के मामले में पंजाब के मुख्य निर्वाचन अधिकारी की ओर से जारी ASDD सूची में उनके नाम के सामने उन्हें उस बूथ से ‘स्थायी रूप से दूसरी जगह जा चुके’ मतदाता के तौर पर दर्ज किया गया है। यहा साहिबजादा अजीत सिंह नगर (SAS नगर) में उनका नाम मतदाता के रूप में दर्ज था।

नाम हटने के बाद राघव चड्ढा- आप में आरोप-प्रत्यारोप

चड्ढा ने आरोप लगाया है कि आम आदमी पार्टी (AAP) की पंजाब सरकार की ‘राजनीतिक बदले की भावना’ के कारण उनका नाम मतदाता सूची से हटाया गया। उन्होंने इस साल अप्रैल में AAP छोड़कर बीजेपी का दामन थामा था।

पंजाब सरकार ने इस आरोप से इनकार किया है। सरकार ने कहा कि SIR की पूरी प्रक्रिया चुनाव आयोग की ओर से कराई जा रही है। AAP प्रवक्ता सौरभ भारद्वाज ने गुरुवार को कहा कि चड्ढा पंजाब में नहीं बल्कि दिल्ली में रहते हैं।

उन्होंने कहा, ”अगर राघव चड्ढा पंजाब में नहीं रहते हैं तो वहां से उनका वोट हटा दिया जाना चाहिए।”

SIR के दिशा-निर्देशों में नाम दोबारा जोड़ने का क्या प्रावधान है?

SIR प्रक्रिया में अगर किसी मतदाता का नाम गलती से ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटा दिया गया है तो उसे दोबारा सूची में शामिल कराने का मौका दिया जाता है। इसके लिए चुनाव आयोग के फॉर्म-6 को भरना होता है जो मतदाता पंजीकरण के लिए आधिकारिक फॉर्म है।

पंजाब में जिन मतदाताओं के नाम ड्राफ्ट सूची से हटाए गए हैं, वे 13 अगस्त से 12 सितंबर के बीच फॉर्म-6 जमा कर सकते हैं। इसके बाद पात्र पाए जाने वाले लोगों के नाम 12 अक्टूबर को जारी होने वाली अंतिम मतदाता सूची में शामिल किए जा सकते हैं।

राघव चड्ढा ने कहा है कि वह SIR के तहत उपलब्ध इन विकल्पों का इस्तेमाल करने की प्रक्रिया में हैं।

फॉर्म-6 के साथ कौन से दस्तावेज देने होंगे?

फॉर्म-6 में आवेदक को अपने निवास और जन्मतिथि का दस्तावेजी प्रमाण देना होता है। साथ ही यह घोषणा भी करनी होती है कि वह भारत का नागरिक है। चुनाव आयोग के SIR दिशा-निर्देशों के मुताबिक, SIR के दौरान जमा किए जाने वाले नए फॉर्म-6 के साथ एक ‘एफिडेविट’ भी देना होगा।

इस घोषणा पत्र के लिए आवेदक को 12 तरह के दस्तावेजों में से जरूरी दस्तावेज देने होते हैं। इनमें पासपोर्ट, जन्म प्रमाण पत्र और शैक्षणिक प्रमाण पत्र जैसे दस्तावेज शामिल हैं। 1 जुलाई 1987 के बाद जन्मे लोगों को अपने साथ-साथ अपने माता-पिता से जुड़े दस्तावेज भी देने होंगे।

राघव चड्ढा ने क्या तर्क दिया?

चड्ढा ने चुनाव आयोग के SIR दिशा-निर्देशों का हवाला देते हुए कहा है कि उनका नाम ड्राफ्ट मतदाता सूची से हटाया ही नहीं जाना चाहिए था। उनका तर्क है कि आयोग के दिशा-निर्देशों में सांसदों को ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किए जाने की बात स्पष्ट रूप से कही गई है।

सांसदों के नाम ड्राफ्ट सूची में शामिल करने का क्या नियम है?

चुनाव आयोग के 24 जून 2025 के SIR दिशा-निर्देशों में कहा गया है कि न्यायपालिका के सदस्यों, जनप्रतिनिधियों, संवैधानिक या घोषित पदों पर बैठे लोगों और कला, संस्कृति, पत्रकारिता, खेल तथा सार्वजनिक सेवा जैसे क्षेत्रों से जुड़ी प्रमुख हस्तियों के वे सभी नाम जिन्हें पहले चुनावी डेटाबेस में चिन्हित किया गया था, ड्राफ्ट मतदाता सूची में शामिल किए जाने चाहिए। इसका उद्देश्य यह है कि दावा और आपत्ति की अवधि के दौरान जरूरी दस्तावेज भी जमा किए जा सकें।

राज्यसभा सदस्य बनने के लिए मतदाता होना जरूरी

जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1951 (Representation of the People Act, 1951) की धारा 3 के मुताबिक, राज्यसभा का सदस्य बनने के लिए उम्मीदवार का देश की किसी भी संसदीय सीट की मतदाता सूची में पंजीकृत होना जरूरी है।

2022 में राज्यसभा चुनाव के लिए दिए गए अपने हलफनामे में राघव चड्ढा ने बताया था कि उनका नाम दिल्ली के राजिंदर नगर के बूथ नंबर 52 की मतदाता सूची में दर्ज है।

हालांकि पंजाब से राज्यसभा सांसद बनने के बाद चड्ढा ने अपना मतदाता पंजीकरण पंजाब में ट्रांसफर करा लिया। उन्होंने 2024 के लोकसभा चुनाव में 1 जून को पंजाब के साहिबजादा अजीत सिंह नगर (SAS नगर) यानी मोहाली के एक बूथ पर मतदान किया था। इस तरह चड्ढा का मतदाता पंजीकरण दिल्ली से पंजाब में ट्रांसफर हुआ था।

‘मित्र आप अकेले नहीं हैं…’, ड्राफ्ट वोटर लिस्ट से राघव चड्ढा का नाम कटने पर चिदंबरम ने ली चुटकी

कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम ने भारतीय जनता पार्टी के सांसद राघव चड्ढा पर तंज कसा। पंजाब की स्पेशल इंटेंसिव रिविजन ड्राफ्ट वोटर लिस्ट में चड्ढा का नाम ‘शिफ्टेड’ दिखाए जाने पर चिदंबरम ने उन्हें भारत का वोट न देने वाला नागरिक कहा है।

सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म एक्स पर पोस्ट कर कांग्रेस नेता पी चिदंबरम ने कहा, “कल मैंने अपने मित्र श्री राघव चड्ढा को भारत का गैर-मतदाता नागरिक बनने पर बधाई दी! वे अकेले नहीं हैं। भारत की वयस्क आबादी के पूरे 10 प्रतिशत लोगों को भारतीय चुनाव आयोग द्वारा गैर-मतदाता नागरिक घोषित किया गया है।”