Jammu-Kashmir News: भारत में अपने कार्यकाल को याद करते हुए बांग्लादेश के राजदूत रियाज हमीदुल्लाह ने कश्मीर के स्कूल का दिलचस्प अनुभव साझा किया है। उन्होंने कहा कि इस दौरे पर वह एक स्कूल में गए थे। यहां पर एक छात्रा के सवाल को सुनकर वह हैरान रह गए। हालांकि, उन्होंने उस सवाल का जवाब दिया।
समाचार एजेंसी एएनआई से बातचीत में रियाज हामिदुल्लाह ने कहा, “लगभग तीन हफ्ते पहले मैं श्रीनगर में कश्मीर घाटी में था। एयरपोर्ट से मैं सीधे डीपीएस श्रीनगर स्कूल गया। दो बातें मुझे चौंका गईं। वहां लगभग 5000 छात्र थे और मुझे लगता है कि उनमें से लगभग 40 प्रतिशत लड़कियां थीं।”
फातिमा का सवाल सुन चौंके हामिदुल्लाह
हामिदुल्लाह ने आगे कहा, “अचानक, कक्षा 12 की एक छात्रा फातिमा मेरे पास आई। उसने अपना परिचय रेडियो जॉकी के रूप में दिया। मुझे यह जानकर आश्चर्य हुआ कि स्कूल एक डिजिटल रेडियो स्टेशन चला रहा है। वह मुझे एक रेडियो स्टूडियो में ले गई और मुझसे बातचीत करने लगी। दूसरा सवाल वाकई चौंकाने वाला था। मुझे उससे इसकी उम्मीद नहीं थी। उसने मुझसे पूछा, “आप बॉर्डर को किस नजरिये से देखते हैं?” कल्पना कीजिए, श्रीनगर में बैठे हुए, एक छोटी लड़की मुझसे यह सवाल पूछ रही है। मैंने पूरी ईमानदारी से उसका जवाब दिया और जब मैं जाने लगा, तो मैंने छोटे बच्चों को एक गाना गाते हुए सुना।”
हामिदुल्लाह ने कहा, “यह अल्लामा इकबाल की मेरी पसंदीदा रचनाओं में से एक थी, तो, जिस बात ने मुझे सबसे ज़्यादा प्रभावित किया, वह यह है कि हम हमेशा उन रेखाओं को देखते हैं जो हमें विभाजित करती हैं, लेकिन हमें यह भी देखना चाहिए कि कैसे आबादी का बड़ा हिस्सा बिना किसी विभाजनकारी रेखाओं या मतभेदों की परवाह किए, अनोखे ढंग से आगे बढ़ता रहता है। यह उन ताजा यादों में से एक है जो मेरे साथ हमेशा रहेंगी।”
अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रुका था- हामिदुल्लाह
भारत में अपने सफर के बारे में बात करते हुए हामिदुल्लाह ने बताया कि भारत से उनका पहला परिचय सितंबर 1990 में हुआ, जब वे एक युवा छात्र के रूप में आए और अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में ठहरे। हामिदुल्लाह ने एएनआई को बताया, “जब मैं 35 साल पहले, सितंबर 1990 में एक युवा छात्र के रूप में आया, तो मैं अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी के हॉस्टल में रुका। इससे मुझे भारत को समझने और विभिन्न राज्यों के लोगों से मिलने का एक बेहतरीन अवसर मिला।” बांग्लादेश के राजदूत ने कहा कि इस अनुभव ने उन्हें भारत की विविध सामाजिक और सांस्कृतिक विशेषताओं को समझने में मदद की।
हमीदुल्लाह ने कहा कि भारतीय समाज को समझने में उनकी रुचि उनके राजनयिक करियर के दौरान उनकी भागीदारी का केंद्र बिंदु बनी रही। उन्होंने कहा, “राज्य-दर-राज्य संबंध एक बात है, लेकिन अगर आप भारत के गहरे पहलुओं को समझना चाहते हैं, तो मुझे लगता है कि हमें समाज को नजर अंदाज नहीं करना चाहिए। यही वह बात थी जिसने मुझे बिना किसी झिझक के लोगों के साथ जुड़ने के लिए प्रेरित किया।”
यह भी पढ़ें: दुर्गा पूजा पर ‘पद्मा की हिलसा’ का संकट, बांग्लादेश ने रद्द किए परमिट, जानिए क्यों नहीं आ रही मछली
मछली प्रेमियों के लिए यह खबर निराशाजनक है कि बांग्लादेश दुर्गा पूजा के इस मौसम में भारत को हिलसा मछली का निर्यात नहीं करेगा और उसने भारत से इस प्रसिद्ध मछली का आयात भी बंद कर दिया है। यह घटना भारत द्वारा बांग्लादेश को 500 मीट्रिक टन हिलसा मछली का निर्यात करने के कुछ हफ्ते बाद हुई है। यहां क्लिक कर पढ़ें पूरी खबर…
