Sunetra Pawar News: राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के नेता अजित पवार के निधन के बाद उनकी पत्नी सुनेत्रा पवार ने शनिवार को महाराष्ट्र की पहली डिप्टी सीएम के तौर पर शपथ ली। सुनेत्रा पवार महाराष्ट्र विधानसभा के किसी भी सदन की सदस्य नहीं हैं। फिर भी, शनिवार दोपहर मुंबई में हुई एक बैठक में उन्हें राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी के विधायक दल का नेता चुना गया। लेकिन अब सभी के मन में एक ही सवाल आता है कि क्या कोई व्यक्ति विधानसभा सदस्य हुए बिना डिप्टी सीएम बन सकता है। आइए जानते हैं कि इस बारे में कानून क्या कहता है।

संविधान के अनुच्छेद 164(4) के मुताबिक, कोई भी व्यक्ति राज्य की विधान सभा का सदस्य न होते हुए भी मंत्री (उपमुख्यमंत्री या मुख्यमंत्री) नियुक्त किया जा सकता है। हालांकि, इस पद पर बने रहने के लिए शपथ ग्रहण की तारीख से लगातार छह महीनों के भीतर विधान सभा या विधान परिषद का सदस्य बनना अनिवार्य है। अगर वह इस अवधि के अंदर सदस्य नहीं बनता है, तो उसे अपने पद से इस्तीफा देना होगा।

कई नेताओं के उदाहरण

देश में कई नेता विधायक बने बिना ही मंत्री बन चुके हैं। सुनेत्रा पवार के मामले में भी यही राह अपनाई जा रही है। कई बड़े नेताओं ने शुरुआत में विधायक बने बिना ही पदभार संभाला था। अब कुछ उदाहरणों पर नजर डालें तो उद्धव ठाकरे ने 2019 में मुख्यमंत्री के रूप में शपथ ली, तब वे न तो विधायक थे और न ही विधान परिषद के सदस्य। बाद में वे विधान परिषद के लिए निर्वाचित हुए।

ये भी पढ़ें: सुनेत्रा पवार बनीं डिप्टी सीएम लेकिन कौन पेश करेगा महाराष्ट्र का बजट?

वहीं मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 2017 में मुख्यमंत्री बनने के समय सांसद थे। बाद में वे विधान परिषद के सदस्य बने। दिनेश शर्मा और केशव प्रसाद मौर्य इन दोनों को 2017 में उपमुख्यमंत्री नियुक्त किया गया था, तब वे शुरू में विधानमंडल के सदस्य नहीं थे। पृथ्वीराज चव्हाण मुख्यमंत्री नियुक्त होने के समय वे केंद्रीय मंत्री थे। बाद में उन्होंने उपचुनाव जीता और विधायक बने।

कौन हैं सुनेत्रा पवार?

महाराष्ट्र के तेर में 18 अक्टूबर 1963 को जन्मीं सुनेत्रा पवार एक राजनीतिक विरासत वाले परिवार से आती हैं। उनके पिता बाजीराव पाटिल एक वरिष्ठ क्षेत्रीय नेता थे और उनके भाई पद्मसिंह बाजीराव पाटिल एक प्रभावशाली राजनेता थे। उन्होंने औरंगाबाद के एस.बी. कॉलेज से कॉमर्स की डिग्री हासिल की। उनकी शादी साल 1985 में अजित पवार से हुई।

सुनेत्रा पवार एक सामाजिक कार्यकर्ता और पर्यावरणविद् के रूप में भी जानी जाती हैं। उन्होंने ‘एनवायरनमेंटल फोरम ऑफ इंडिया’ की स्थापना की। वे बारामती हाई-टेक टेक्सटाइल पार्क की अध्यक्ष रह चुकी हैं। वे विद्या प्रतिष्ठान की न्यासी और सावित्रीबाई फुले पुणे विश्वविद्यालय की सीनेट की सदस्य भी हैं। 2024 के लोकसभा चुनावों तक सुनेत्रा पवार राजनीति में बहुत सक्रिय नहीं थीं। उसी साल के लोकसभा चुनावों में उन्होंने बारामती से चुनाव लड़ा। हालांकि, प्रतिष्ठा की इस लड़ाई में उन्हें ननद सुप्रिया सुले से हार का सामना करना पड़ा। इसके बाद, सुनेत्रा पवार राज्यसभा के लिए चुनी गईं।

बजट 2026: देश में इन 7 जगहों पर बनेगा हाई स्पीड रेल कॉरिडोर, क्यों है गेमचेंजर?