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रामदेव के पतंजलि ट्रस्ट को कैसे मिली भारतीय शिक्षा बोर्ड की कमान? साल 2016 में खारिज हुआ था प्रस्ताव

9 मार्च, 2019 को अनुमोदन के बाद से, बीएसबी को एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत किया गया है और हरिद्वार में एक कार्यालय स्थापित किया गया है।

Translated By सचिन शेखर नई दिल्ली | Updated: June 21, 2021 3:55 PM
बाबा रामदेव के ट्रस्ट को भारतीय शिक्षा बोर्ड संचालित करने की मंजूरी मिली थी (फोटो -इंडियन एक्सप्रेस)

बाबा रामदेव के पतंजलि योगपीठ ट्रस्ट के हाथों में भारतीय शिक्षा बोर्ड की कमान सौपे जाने के मामले में कई सवाल उत्पन्न हो रहे हैं। साथ ही केंद्र सरकार का इस मुद्दे पर ढुलमुल रवैया भी सामने आया है। शिक्षा मंत्रालय द्वारा बाबा रामदेव के प्रस्ताव को साल 2016 में खारिज भी कर दिया गया था।

गौरतलब है कि शिक्षा के “स्वदेशीकरण (स्वदेशीकरण)” के लिए सीबीएसई की तर्ज पर एक  राष्ट्रीय स्कूल बोर्ड स्थापित करने का विचार सबसे पहले रामदेव ने रखा था। 2015 में, योग गुरु ने अपने हरिद्वार स्थित वैदिक शिक्षा अनुसंधान संस्थान (वीईआरआई) के माध्यम से, “महर्षि दयानंद की पुरातन शिक्षा” और आधुनिक शिक्षा के मिश्रण की पेशकश करके शिक्षा का भारतीयकरण करने में मदद करने के लिए एक स्कूल बोर्ड स्थापित करने का प्रस्ताव उन्होंनेरखा था।

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प्रधान मंत्री कार्यालय ने विशेष रूप से रामदेव के प्रस्ताव पर एक बैठक भी की थी। लेकिन शिक्षा मंत्रालय द्वारा एक निजी स्कूल बोर्ड को मान्यता देने के सवाल पर शिक्षा मंत्रालय द्वारा आपत्ति व्यक्त करने के बाद अंततः इसे बंद कर दिया गया था। दरअसल, 13 अप्रैल 2016 को प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता में हुई एक बैठक में तत्कालीन स्कूल शिक्षा सचिव एससी खुंटिया ने इस आधार पर प्रस्ताव का विरोध किया था कि एक निजी बोर्ड के लिए राज्य की मंजूरी अन्य लोगों के समान अनुरोधों के लिए दरवाजे खोल देगी।

जिसके बाद मंत्रालय ने एमएसआरवीवीपी के तहत “वेद विद्या’ (वैदिक शिक्षा) के लिए अपना स्कूल बोर्ड स्थापित करने की योजना बनाई।
हालांकि, इसे जनवरी 2019 में फिर से चर्चा में आने से पहले तक होल्ड पर रखा गया था। जब एमएसआरवीवीपी की तरफ से बैठक कर बोर्ड स्थापित करने की बात कही गयी तो, इसे निजी क्षेत्र को सौपे जाने पर विचार हुआ।

विशेषज्ञों का मानना है कि अभी पारंपरिक पाठशालाओं में लगभग 10,000 “वेद विद्या” छात्र पढ़ रहे हैं। इसके साथ ही इसमें रामदेव के आचार्यकुलम को संबद्ध करने की संभावना है। आरएसएस द्वारा संचालित विद्या भारती स्कूल और आर्य समाज द्वारा संचालित स्कूलों को भी इस बोर्ड के अंदर लाने की योजना है। क्योंकि यह उन्हें बारहवीं कक्षा तक शिक्षा के अपने मॉडल को बनाए रखने की अनुमति देगा, जिसे सीबीएसई जैसे स्कूल बोर्ड अभी अनुमति नहीं दे रहे हैं।

बताते चलें कि 9 मार्च, 2019 को अनुमोदन के बाद से, बीएसबी को एक सोसायटी के रूप में पंजीकृत किया गया है और हरिद्वार में एक कार्यालय स्थापित किया गया है। इसके बैंक खाते में कॉर्पस फंड और विकास निधि के रूप में 71 करोड़ रुपये की राशि जमा की गई है और बीएसबी के कार्यकारी बोर्ड का भी गठन किया गया है, जिसके अध्यक्ष रामदेव हैं। बोर्ड अब अपने पाठ्यक्रम का मसौदा तैयार करने की प्रक्रिया में है।

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