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‘वाड्रा-डीएलएफ सौदे से संबंधित फाइल के पन्ने ग़ायब’

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अशोक खेमका ने एक प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने इससे पहले एक आरटीआई के माध्यम से विवादित डीएलएफ-रॉबर्ट वाड्रा सौदे की जानकारी मांगी थी। इसमें उन्हे इस सौदे के सरकारी दस्तावेजों से दो पृष्ठ गायब मिले हैं। हरियाणा के मुख्य सचिव पीके गुप्ता ने माना कि फाइल […]

Author Updated: December 20, 2014 12:09 PM

भारतीय प्रशासनिक सेवा के अधिकारी अशोक खेमका ने एक प्राथमिकी दर्ज करने की मांग की है। उन्होंने इससे पहले एक आरटीआई के माध्यम से विवादित डीएलएफ-रॉबर्ट वाड्रा सौदे की जानकारी मांगी थी। इसमें उन्हे इस सौदे के सरकारी दस्तावेजों से दो पृष्ठ गायब मिले हैं।

हरियाणा के मुख्य सचिव पीके गुप्ता ने माना कि फाइल में से पृष्ठ गायब हैं और बताया कि इस मामले की विभागीय जांच शुरू की गई है तथा फाइल को फिर से तैयार करने के प्रयास किए जा रहे हैं।

दो साल पहले खेमका ने रॉबर्ट वाड्रा की कंपनी और डीएलएफ के बीच हुए भूमि सौदे को रद्द कर दिया था। उन्होंने कहा कि मुख्य फाइल से भूपेंद्र सिंह हुड्डा सरकार द्वारा इस मामले के लिए गठित की गई तीन सदस्यीय समिति की आधिकारिक सरकारी नोटिंग गायब हैं। इस समिति ने वाड्रा की कंपनियों को क्लीन चिट दे दी थी।

इस संबंध में मामला दर्ज करने की मांग करते हुए खेमका ने पीटीआई भाषा से कहा, ‘‘यह एक गंभीर मामला है और इसकी जांच होनी चाहिए। अचानक से ऐसा कैसे है कि नोटिंग्स के बारे में कुछ पता ही नहीं चल रहा है।’’

खेमका ने कल मुख्य सचिव को लिखे एक पत्र में कहा, ‘‘फाइल नोटिंग दस्तावेजों का एक बहुत ही महत्वपूर्ण हिस्सा होता है। समिति के गठन की नोटिंग गायब होने से यह स्थापित होता है कि इसका गठन गैर कानूनी था।’’

खेमका की आरटीआई के जवाब में सामने आया कि पिछली कांग्रेस सरकार द्वारा आधिकारिक जांच समिति के गठन से संबंधित फाइल नोटिंग के दो पृष्ठ गायब हैं।

राज्य लोक सूचना अधिकारी डी. आर. वाधवा ने राज्य सूचना आयोग में एक हलफनामे में कहा कि कई प्रयासों के बाद भी फाइल नोटिंग के पृष्ठ एक और दो को हासिल नहीं किया जा सका और यह पृष्ठ खेमका को नहीं सौंपे जा सके।

 

 

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