शिवसेना एक ऐसी पार्टी जिसकी स्थापना उद्धव ठाकरे के पिता बाला साहब ठाकरे ने 19 जून 1966 को मुंबई के शिवाजी पार्क में की थी,लेकिन 17 नवंबर 2012 को बाला साहब ठाकरे के निधन के बाद शिवसेना में विभाजन और सत्ता संघर्ष का एक बड़ा दौर शुरू हुआ।

साल 2022 में तत्कालीन मुख्यमंत्री उद्धव ठाकरे के खिलाफ बड़े पैमाने पर बगावत हुई और एकनाथ शिंदे ने भाजपा के साथ मिलकर महाराष्ट्र में नई सरकार बनाई। फरवरी, 2023 में असली शिवसेना को लेकर मामला चुनाव आयोग पहुंचा। चुनाव आयोग ने ‘शिवसेना’ नाम और उसका चुनाव चिन्ह (तीर-कमान) एकनाथ शिंदे गुट को सौंप दिया। जबकि उद्धव ठाकरे के नेतृत्व वाले गुट का नाम शिवसेना (उद्धव बालासाहब ठाकरे) दिया।

ऐसे में उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) अब तक दो बड़ी टूटों का सामना कर चुकी है। पहली 2022 में और दूसरी जून 2026 में हुए हालिया पलायन के रूप में। लगातार लग रहे झटकों के बाद जब शिवसेना (यूबीटी) अपने अस्तित्व की लड़ाई लग रही है। तब यह समझना जरूरी हो जाता है कि इन आंकड़ों के पीछे की कहानी क्या है?

दल-बदल की कहानी

जून 2022 का विद्रोह: पार्टी में बड़ी फूट

जून 2022 में एकनाथ शिंदे के नेतृत्व में 40 विधायकों ने महा विकास अघाड़ी सरकार से अलग होने का फैसला किया। जिसकी वजह से उद्धव ठाकरे की सरकार गिर गई। इसके बाद अविभाजित पार्टी के टिकट पर चुने गए 18 लोकसभा सांसदों में से 13 सांसदों ने भी अपनी निष्ठा बदलते हुए शिंदे गुट का साथ दे दिया।

जून 2026 का पलायन: “ऑपरेशन टाइगर”

2024 के आम चुनावों के बादजब ठाकरे गुट ने किसी तरह अपनी अस्थायी राजनीतिक मौजूदगी फिर से खड़ी की। उसके बाद एक दूसरी बड़ी लहर में पार्टी का बचा-खुचा संसदीय ढांचा पूरी तरह टूट गया।

22 जून 2026 को 6 लोकसभा सांसद एक साथ पाला बदलकर दूसरी ओर चले गए। इस समूह में ओमप्रकाश निंबालकर, नागेश पाटिल आष्टिकर, संजय जाधव, संजय देशमुख, संजय दिना पाटिल और भाऊसाहेब वाकचौरे शामिल थे।

शिवसेना UBT में हालिया घटनाक्रम- वरिष्ठ MLC का पाला बदलना

वरिष्ठ MLC और उद्धव ठाकरे गुट के करीबी माने जाने वाले सचिन अहिर, जो आदित्य ठाकरे के भी नजदीकी सहयोगी हैं। उन्होंने 30 जून 2026 को आधिकारिक रूप से शिंदे गुट में शामिल होकर विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया।

बीएमसी में स्थिति

मुंबई महानगरपालिका (BMC) में उद्धव ठाकरे गुट के कई पूर्व नगरसेवक शिंदे गुट में शामिल हो चुके हैं। विभाजन के बाद अब तक 40 से ज्यादा पुराने शिवसेना (UBT) नगरसेवक शिंदे गुट में जा चुके हैं। 2023 के अंत तक यह संख्या लगभग 40 मानी जा रही थी।

2026 के निकाय चुनावों तक अनुमान है कि कम से कम 44 पूर्व नगरसेवक शिंदे गुट के साथ जुड़ चुके हैं, जबकि लगभग 55 अब भी उद्धव ठाकरे के साथ हैं। इसके अलावा माघाठाणे क्षेत्र के दो नगरसेवकों सहित कुछ और छोटे समूह भी हाल ही में शिंदे गुट में शामिल हुए हैं।

स्थानीय निकायों में स्थिति

सिर्फ विधायक ही नहीं, बल्कि स्थानीय स्तर पर भी बड़ी संख्या में लोग पाला बदल चुके हैं। धुले, नवी मुंबई और पालघर जैसे क्षेत्रों से सैकड़ों नगरसेवक, जिला प्रमुख और युवा सेना के पदाधिकारी समय-समय पर शिंदे गुट में शामिल होते रहे हैं। ‘ऑपरेशन टाइगर’ के तहत हालिया बड़े पैमाने पर हुए टूट के बाद शिवसेना (UBT) गंभीर संकट का सामना कर रही है। ऐसे उद्धव की शिवसेना को इस वक्त कई अहम मोर्चों पर एक साथ काम करना पड़ रहा है-

कानूनी लड़ाई

उद्धव ठाकरे ने उन छह लोकसभा सांसदों की तत्काल अयोग्यता (Disqualification) की मांग की है, जिन्होंने शिंदे गुट में शामिल होकर पाला बदल लिया। शिवसेना यूबीटी के नेता जैसे संजय राउत और अनिल देसाई ने लोकसभा अध्यक्ष ओम बिरला से मुलाकात कर यह आग्रह किया है कि लोकसभा सचिवालय उस टूटे हुए समूह को एक अलग वैध गुट या “मर्जर” के रूप में मान्यता न दे। पार्टी ने सख्त व्हिप जारी किए हैं और यदि बागियों को एंटी-डिफेक्शन कानून से सुरक्षा मिलती है तो अदालत में व्यापक कानूनी लड़ाई की तैयारी भी कर रही है।

और अधिक विधायकों को टूटने से रोकना

पार्टी को एक और बड़ा झटका 30 जून 2026 को लगा जब वरिष्ठ MLC और आदित्य ठाकरे के करीबी माने जाने वाले सचिन आहिर शिंदे गुट में शामिल हो गए और विधान परिषद के उपसभापति पद के लिए नामांकन दाखिल किया। सत्ता पक्ष के महायुति नेताओं का दावा है कि “ऑपरेशन टाइगर 3.0” का लक्ष्य शिवसेना UBT के बचे हुए 20 में से 14 विधायकों को तोड़ना है। ऐसे में उद्धव ठाकरे के लिए सबसे बड़ी प्राथमिकता अपने भीतर के कोर ग्रुप को बचाए रखना और पार्टी में टूट को रोकना है।

जन संपर्क और जन संवाद अभियान

नैरेटिव बदलने और यह दिखाने के लिए कि पार्टी खत्म नहीं हुई है, उद्धव ठाकरे ने राज्यव्यापी दौरे शुरू किए हैं। वे उन क्षेत्रों में रैलियां कर रहे हैं जहां से बागी सांसद चुने गए थे (जैसे यवतमाल)। वे जनता के बीच भावनात्मक अपील कर रहे हैं, क्षेत्रीय अस्मिता पर जोर दे रहे हैं, बागियों पर भ्रष्टाचार के आरोप लगा रहे हैं और यह दावा कर रहे हैं कि शिंदे गुट बालासाहेब ठाकरे की असली विचारधारा को छीनने की कोशिश कर रहा है।

BMC और नगर निगम चुनावों पर फोकस

शिंदे गुट ने स्पष्ट कर दिया है कि अगला बड़ा लक्ष्य मुंबई महानगरपालिका (BMC) पर पूरी तरह नियंत्रण हासिल करना है। इसके जवाब में शिवसेना UBT मुंबई में अपने स्थानीय नेटवर्क और शाखा स्तर के कार्यकर्ताओं को मजबूत करने पर ध्यान दे रही है, ताकि नगर निगम चुनावों से पहले जमीनी स्तर पर अपने पार्षद और कार्यकर्ता टूटने से बचा सके।

मुंबई की मेयर बोलीं- शिवसेना (यूबीटी) नेता पेडणेकर गैर- मौजूदगी में मेरे ऑफिस में घुसीं, वीडियो बनाया

मुंबई की मेयर रितु तावड़े ने आरोप लगाया है कि शिवसेना (यूबीटी) की पार्षद और बीएमसी में विपक्ष की नेता किशोरी पेडणेकर बिना अनुमति के उनके दफ्तर में घुस गईं। तावड़े ने आरोप लगाया है कि किशोरी पेडणेकर ने दफ्तर में महत्वपूर्ण दस्तावेजों की तस्वीर खींच ली और वीडियो रिकॉर्डिंग की। पढ़ें पूरी खबर।