Rajya Sabha Election: मध्य प्रदेश राज्य सभा चुनाव के लिए कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन मंगलवार को खारिज हो जाने के बाद भाजपा नेता कैलाश विजयवर्गीय ने दावा किया कि यह साजिश कांग्रेस के लोगों ने ही की है। दूसरी तरफ, कांग्रेस के वरिष्ठ नेता पीठासीन अधिकारी द्वारा मीनाक्षी नटराजन के नामांकन को खारिज करने को गैर-कानूनी बता रहे हैं। इसी बीच एक मीडिया रिपोर्ट में भाजपा के सूत्रों के हवाले से सनसनीखेज दावा किया गया है।
एनडीटीवी के अनुसार उन्हें भाजपा के सूत्रों ने बताया कि बीजेपी को मीनाक्षी नटराजन के दस्तावेज एक सुनियोजित राजनीतिक चैनल के माध्यम से प्राप्त हुए।
एनडीटीवी ने सूत्रों से मिली जानकारी के आधार पर दावा किया है कि तेलंगाना अध्यक्ष रामचंद्र राव ने मध्य प्रदेश बीजेपी अध्यक्ष हेमंत खंडेलवाल को मीनाक्षी नटराजन से संबंधित दस्तावेज मुहैया कराए हैं, जिनमें अदालती मामलों और कानूनी नोटिसों का विवरण शामिल है।
राज्यसभा की तीन सीटों पर होने वाले चुनाव में प्रत्येक सीट पर जीत के लिए 58 विधायकों की जरूरत थी। बीजेपी के पास तीसरा प्रत्याशी जिताने के लिए 11 वोट कम थे। किसी भी तरह की हॉर्स ट्रेडिंग को रोकने के लिए अपने विधायकों को कर्नाटक बैंगलोर भेजा था। हालांकि, कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन का नामांकन दस्तावेज में एक केस का जिक्र न होने के चलते रद्द हो गया है। इसे कांग्रेस के लिए एक झटका माना जा रहा है।
मध्य प्रदेश की तीन सीटों के राज्यसभा चुनावों में एक सीट का मामला नाटकीय हो गया है। BJP ने नंबर्स न होने के बावजूद महेश केवट को तीसरे प्रत्याशी के रूप में उतार दिया। सबसे बड़ा झटका कांग्रेस प्रत्याशी मीनाक्षी नटराजन को लगा। उनका नामांकन दस्तावेजों में एक केस का जिक्र न होने के चलते चुनाव आयोग ने रद्द कर दिया है। कांग्रेस चुनाव आयोग पर सवाल उठा रही है और BJP पर लोकतंत्र की हत्या करने का आरोप लगा रही है। वहीं, अहम सवाल यह है कि आखिर BJP को मीनाक्षी नटराजन के खिलाफ कागजात कैसे मिले?
मीनाक्षी नटराजन के नामांकन रद्द होने के बवाल की आग में बीजेपी ने घी डालने का काम किया है। बीजेपी के नेताओं ने दावा किया है कि कांग्रेस प्रत्याशी के खिलाफ कागजात कांग्रेस के अंदर से ही मिले थे। बीजेपी नेता और मध्य प्रदेश के कैबिनेट मंत्री कैलाश विजयवर्गीय ने कहा है कि मीनाक्षी के खिलाफ असल साजिश कांग्रेस के अंदर ही रची गई थी।
कैलाश विजय वर्गीय ने किया कांग्रेस में साजिश का दावा
दरअसल, बीजेपी नेता कैलाश विजयवर्गीय ने मीडिया से बातचीत के दौरान कहा,”हमें ये दस्तावेज किसने मुहैया कराए? इससे आप कांग्रेस पार्टी की हालत का अंदाजा लगा सकते हैं। हमें ये दस्तावेज तेलंगाना से मिल रहे हैं, जहां वे सत्ता में हैं।” इतना ही नहीं, उन्होंने कहा, “हमें यह जानकारी कांग्रेस के भीतर के लोगों से ही मिली होगी।”
ध्यान देने वाली बात यह भी है कि केवल बीजेपी ही कांग्रेस में आंतरिक साजिश का दावा नहीं कर रही है। इस थ्योरी को बढ़ावा तेलंगाना में मुख्य विपक्षी पार्टी बीआरएस ने भी दिया है। बीआरएस ने इस मामले के लीक होने और मीनाक्षी नटराजन का इस्तीफा रद्द होने की मुख्य वजह कांग्रेस की आंतरिक लड़ाई को बताया है।
कांग्रेस ने खारिज किए बीजेपी के दावे
पार्टी में आंतरिक साजिश के बीजेपी के दावों पर कांग्रेस पार्टी ने आपत्ति जताई है। कांग्रेस नेता और वकील जेपी धनोपिया ने नामांकन जांच प्रक्रिया के दौरान सेवानिवृत्त उच्च न्यायालय के न्यायाधीश रोहित आर्य की उपस्थिति पर आपत्ति जताई। जेपी धनोपिया ने कहा, “वह वहां किस हैसियत से मौजूद थे? वह न तो उम्मीदवार थे, न ही प्रतिनिधि, और न ही चुनाव प्रक्रिया में शामिल कोई अधिकृत पक्ष थे। अपनाई गई प्रक्रिया को लेकर भी गंभीर सवाल उठते हैं।”
मीनाक्षी नटराजन के किस केस दस्तावेज पर है विवाद?
जिस केस के दस्तावेज नामांकन में मौजूद न होने के चलते मीनाक्षी नटराजन का नामांकन रद्द हुआ है, वह मामला तेलंगाना का है। एक महिला ने 2022 में कांग्रेस के ही एक अन्य नेता पर उत्पीड़न और धमकियों का आरोप लगाया था।
महिला का आरोप था कि उसकी शिकायत के बावजूद कांग्रेस नेतृत्व ने आरोपी पर कोई एक्शन नहीं लिया। महिला का कहना है कि उन्होंने यह मामला मीनाक्षी नटराजन के समक्ष भी उठाया था, जो उस समय तेलंगाना में कांग्रेस संगठन से जुड़ी हुई थीं।
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भारतीय चुनावी लोकतंत्र में चुनावी हलफनामे को लंबे समय तक महज एक औपचारिक दस्तावेज माना जाता रहा है लेकिन पिछले दो दशकों में सुप्रीम कोर्ट के कई महत्वपूर्ण फैसलों ने इसे मतदाताओं के ‘जानने के अधिकार’ का केंद्रीय आधार बना दिया है। उम्मीदवार के खिलाफ आपराधिक मामले, उसकी संपत्ति, देनदारियां और शैक्षणिक योग्यता जैसी जानकारियां अब केवल निजी विवरण नहीं रह गए हैं बल्कि लोकतांत्रिक पारदर्शिता का हिस्सा हैं। पढ़िए पूरी खबर…
