आगरा: स्‍कूल में हुआ प्‍यार, घर से हुए फरार, लौटे तो जलती लाशों में खाक हो गई हिंदू लड़की और मुस्लिम लड़के की प्रेम कहानी - Jansatta
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आगरा: स्‍कूल में हुआ प्‍यार, घर से हुए फरार, लौटे तो जलती लाशों में खाक हो गई हिंदू लड़की और मुस्लिम लड़के की प्रेम कहानी

सोनू को उसके घर के पास ही दफना दिया गया जबकि शीलम का अंतिम संस्कार उसके सुरालवालों की मौजूदगी में हुआ। दोनों की मां का रो-रोकर बुरा हाल है।

Author आगरा | May 19, 2016 1:05 PM
आगरा में रहने वाली शीलम कुमारी के घर की तस्वीर। (एक्सप्रेस फोटो : Tashi Tobgyal)

ताजमहल से 5 किलोमीटर दूर बने श्री राम किशन इंटर कॉलेज में उन दोनों के बीच पहली बार बात हुई। दोनों बचपन से एक-दूसरे के पड़ोस में रहते थे लेकिन कभी कोई बात नहीं हुई थी। वजह थी दोनों का अलग-अलग मज़हब।

2015 में, 17 साल की शीलम कुमारी ने नैनना जाट के इकलौते को-एड स्कूल में एडमिशन लिया। 11वीं कक्षा में पढ़ने आई शीलम वहां 17 साल के सोनू मोहम्मद की जूनियर थी। दोनों के बीच प्यार हो गया, दोनों करीब साल भर तक अपने रिश्ते को दोस्तों और परिवार से छिपाकर रखने में कामयाब भी रहे। फिर एक दिन दोनों की लाशें सोनू के कमरे में मिली, वो 14 मई की सुबह थी।

शीलम के पिता रामू नाई ने उसे काम पर जाने से पहले एलपीजी सिलिंडर लाने के लिए 800 रुपए दिए थे। शीलम उस वक्त घर में अकेली थी। बिना किसी को बताए शीलम और सोनू स्कूल में मिले और आगरा छोड़ने का फैसला किया। करीब 11 बजे, मोहम्मद वकील खान के पास स्कूल से फोन आया। पता चला कि सोनू एग्जाम देने नहीं पहुंचा। जब माता-पिता स्कूल पहुंचे तो उन्हें बताया गया कि वो मोटरसाइकिल पर शीलम के साथ कहीं जाते हुए दिखा था। सोनू के भाई अली मोहम्मद ने बताया, “उसने दिवाली पर बाइक खरीदी थी क्योंकि तब डिस्काउंट ज्यादा मिल रहा था। वो कभी आगरा से बाहर नहीं गया, लेकिन उसने बताया कि वो रोड पर लगे साइन बोर्ड देखकर आगे बढ़ता रहा।”

कुछ सौ रुपए साथ लिए सोनू और शीलम पहले अजमेर गए, फिर हैदराबाद। चार दिन में सारे पैसे खत्म हो गए, तो सोनू ने सुबह-सुबह घर फोन किया। वकील खान बताते हैं, “उसने पूछा कि अगर वो घर लौटेगा तो क्या उसकी पिटाई होगी। सोनू ने ये भी कबूला कि लड़की उसके साथ थी।” 25 मार्च की शाम को सोनू और शीलम घर लौट आए। घरवालों ने मामला पुलिस तक नहीं पहुंचने दिया। एक ऐसे गांव में जहां 400 मुस्लिम परिवार, 700 हिंदू परिवारों के साथ रहते हों, शांति बनाए रखने के लिए अलग-अलग रास्ते इस्तेमाल किए गए।

सोनू और शीलम को स्कूल छोड़ने पर मजबूर किया गया। सोनू को उसके चाचा की इलेक्ट्रॉनिक्स की दुकान पर बिठा दिया गया। उसी मार्केट में उसके पिता पान की दुकान चलाते हैं। 9 मई को रामू नाई ने घर के बड़े-बुजुर्गों के कहने पर शीलम की शादी पास के ही एक व्यक्ति से तय कर दी। शादी के पांचवें दिन वो अपने मायके वापस लौटी। रामू के मुताबिक शीलम बहुत खुश थी। उसे अपने ससुराल में कोई दिक्कत नहीं थी।

रात में, रामू बाहर से दरवाजा बंद कर छत पर सोने चला गया। उसकी पत्नी और बच्चे अंदर ही थे। रामू के मुताबिक शीलम ने एक चाभी छिपा रखी थी, क्योंकि उसे पता था कि जो कुछ भी करना है, उसे आज ही करना होगा। पुलिस के मुताबिक, शीलम आधी रात को सोनू के घर गई। सोनू के माता-पिता आंगन में सो रहे थे और दोनों भाई जमीन पर। बिना किसी की नजर में आए शीलम पहली मंजिल पर बने सोनू के कमरे की तरफ बढ़ी। कोतवाली सदर के एसएचओ आदित्य कुमार द्विवेदी ने बताया, “दोनों ने दरवाजा बंद किया। सुबह करीब 4 बजे उन्होंने खुद पर केरोसीन छिड़ककर आग लगा ली।”

जब घरवालों ने कमरे से धुआं उठता देखा तो उन्हें लगा कि सोनू ने दिल टूटने की वजह से खुदकुशी कर ली है। जब पुलिस ने दीवार तोड़ी तब पता चला कि कमरे में दो लोग थे। दूसरी तरफ, शीलम के पिता सोनू के घर के बाहर जुटती भीड़ देख रहे थे। उन्हें ये समझने में ज्यादा देर नहींं लगी कि उनकी बेटी गायब थी। रामू ने पुलिस को बताया, “ये सब सुबह 4 बजे शुरू हुआ। शीलम के ससुराल वाले उसे ले जाने के लिए 8 बजे आने वाले थे। मैं सोनू के घर गया और कमरे में दोनों की लाशें देखा। जब शीलम के सुरालवाले आए, तब मैंने उन्हें पूरी बात बताई।”

सोनू को उसके घर के पास ही दफना दिया गया जबकि शीलम का अंतिम संस्कार उसके ससुरालवालों की मौजूदगी में हुआ। दोनों की मां का रो-रोकर बुरा हाल है। आने-जाने वाले लोग इस बात पर बहस कर रहे हैं कि कि “बच्चों को प्यार करने की ऐसी सजा मिलनी चाहिए थी या नहीं” इस बात के जवाब में सोनू के पिता वकील खान कहते हैं, “जब तैरना नहीं आता तो पानी के नजदीक जाने की जरूरत क्या है।”

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